Assam Medical Fees Hike: असम के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में पढ़ाई अब कुछ छात्रों के लिए पहले के मुकाबले काफी महंगी होने जा रही है. राज्य सरकार ने MBBS और BDS समेत मेडिकल कोर्सेज की सरकारी फीस में बड़ा बदलाव किया है. नई व्यवस्था में फीस अब सभी छात्रों के लिए एक जैसी नहीं होगी, बल्कि परिवार की सालाना आय के आधार पर तय की जाएगी. सबसे ज्यादा आय वाले परिवारों के छात्रों को MBBS के लिए हर साल 1 लाख रुपये और BDS के लिए 75 हजार रुपये तक फीस देनी होगी.
वहीं BPL और कम आय वाले परिवारों के छात्रों के लिए फीस काफी कम रखी गई है. इस नई व्यवस्था के तहत MBBS की फीस करीब पांच से छह गुना तक बढ़ी है. यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब देश के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल AIIMS में पूरे साढ़े पांच साल के MBBS कोर्स की फीस महज 5,856 रुपये है.
किस छात्र को MBBS के लिए कितनी फीस देनी होगी?
नई फीस व्यवस्था में परिवार की सालाना आय के आधार पर अलग-अलग स्लैब बनाए गए हैं. जिन छात्रों के परिवार की सालाना आय 9 लाख रुपये से ज्यादा है उन्हें MBBS की पढ़ाई के लिए हर साल 1 लाख रुपये सरकारी फीस के तौर पर देने होंगे.वहीं BPL और कम आय वाले परिवारों के छात्रों के लिए MBBS की सालाना सरकारी फीस 5,000 रुपये रखी गई है. जिन परिवारों की सालाना आय 4 लाख से 9 लाख रुपये के बीच है उनके छात्रों को हर साल 50,000 रुपये फीस देनी होगी.इस तरह एक ही सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों की फीस अब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति के हिसाब से अलग-अलग होगी.
BDS की फीस भी बढ़ी
BDS कोर्स के लिए भी इसी तरह आय आधारित फीस व्यवस्था लागू की गई है. जिन छात्रों के परिवार की सालाना आय 9 लाख रुपये या उससे ज्यादा है उन्हें हर साल 75,000 रुपये सरकारी फीस देनी होगी.BPL और कम आय वाले परिवारों के छात्रों के लिए BDS की सालाना फीस 3,750 रुपये रखी गई है. वहीं मध्यम आय वर्ग के छात्रों को 50 प्रतिशत की छूट के बाद 37,500 रुपये सालाना फीस देनी होगी.सरकार की नई व्यवस्था का मकसद यह है कि आर्थिक रूप से मजबूत परिवार मेडिकल शिक्षा की लागत में ज्यादा हिस्सा दें, जबकि कमजोर आर्थिक स्थिति वाले छात्रों को फीस में राहत मिलती रहे.
2022 से नहीं बदली थी फीस, अब आया बड़ा बदलाव
असम में MBBS, BDS और दूसरे मेडिकल कोर्सेज की फीस वर्ष 2022 से नहीं बदली थी. उस समय सभी छात्रों के लिए एक समान फीस व्यवस्था थी. परिवार की आय के आधार पर फीस में कोई अंतर नहीं किया जाता था.अब सरकार ने इस पुराने यूनिफॉर्म फीस सिस्टम को बदल दिया है. नई व्यवस्था में पहली बार परिवार की आय को सरकारी मेडिकल शिक्षा की फीस से सीधे जोड़ा गया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अधिकारी के मुताबिक नई फीस व्यवस्था पहले की एक समान फीस प्रणाली से अलग है. इसमें ज्यादा आय वाले परिवारों पर मेडिकल शिक्षा का ज्यादा आर्थिक बोझ डाला गया है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को महत्वपूर्ण छूट दी गई है.
पहले MBBS छात्रों से कितनी फीस ली जाती थी?
नई व्यवस्था लागू होने से पहले MBBS छात्रों से सरकारी फीस के अलावा कुछ अन्य शुल्क भी लिए जाते थे. हॉस्टल में रहने वाले MBBS छात्रों को एडमिशन के समय 21,500 रुपये नॉन-गवर्नमेंट फीस के तौर पर देने होते थे.जो छात्र हॉस्टल में नहीं रहते थे उनसे 15,500 रुपये लिए जाते थे. इन शुल्कों में हॉस्टल फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट, यूनियन फीस और स्टूडेंट वेलफेयर फंड समेत दूसरे खर्च शामिल थे.इसके अलावा छात्रों को एक बार 2,400 रुपये की सरकारी एडमिशन फीस भी देनी होती थी.दूसरे साल से MBBS छात्रों की सालाना नॉन-गवर्नमेंट फीस 8,000 रुपये थी.
BDS छात्रों के लिए पहले क्या था फीस स्ट्रक्चर?
BDS छात्रों के लिए भी एडमिशन के समय अलग-अलग नॉन-गवर्नमेंट फीस निर्धारित थी. हॉस्टल में रहने वाले BDS छात्रों को 13,000 रुपये और नॉन-हॉस्टल छात्रों को 11,000 रुपये देने होते थे.इन शुल्कों में भी हॉस्टल, सिक्योरिटी डिपॉजिट, यूनियन फीस और स्टूडेंट वेलफेयर से जुड़े खर्च शामिल थे.BDS छात्रों को भी 2,400 रुपये की वन-टाइम सरकारी एडमिशन फीस देनी होती थी. दूसरे साल से BDS छात्रों की सालाना नॉन-गवर्नमेंट फीस 4,000 रुपये थी.यह नॉन-गवर्नमेंट फीस फिलहाल पहले की तरह बनी हुई है.बदलाव मुख्य रूप से सरकारी फीस के स्ट्रक्चर में किया गया है.
असम की नई फीस कितनी ज्यादा?
असम में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की नई फीस को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसकी तुलना AIIMS से हो रही है.AIIMS में पूरा साढ़े पांच साल का MBBS कोर्स करने की कुल फीस 5,856 रुपये है.इसके मुकाबले असम में 9 लाख रुपये से ज्यादा सालाना आय वाले परिवार के छात्र को अब केवल एक साल की MBBS सरकारी फीस के तौर पर 1 लाख रुपये देने होंगे यानी असम की नई फीस व्यवस्था में ज्यादा आय वाले परिवारों के छात्रों पर पहले की तुलना में काफी ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ेगा.
एडमिशन प्रक्रिया के बीच लागू होगी नई फीस
असम के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के दो राउंड पूरे हो चुके हैं, जबकि तीसरा और अंतिम राउंड अभी बाकी है.एक सरकारी मेडिकल कॉलेज के अधिकारी के मुताबिक मौजूदा एकेडमिक सेशन में एडमिशन लेने वाले छात्रों से जल्द ही संशोधित सरकारी फीस ली जाएगी.अभी तक यह नई सरकारी फीस वसूल नहीं की गई है.पहले और दूसरे राउंड में एडमिशन ले चुके छात्रों ने एडमिशन के समय 21,500 रुपये की वन-टाइम नॉन-गवर्नमेंट फीस पहले ही जमा कर दी है. यह फीस पिछले कुछ वर्षों से नहीं बदली है.अधिकारियों के अनुसार नई सरकारी फीस की व्यवस्था मौजूदा एकेडमिक सेशन में एडमिशन लेने वाले छात्रों पर लागू होगी.
सरकार ने फीस बढ़ाने की क्या वजह बताई?
मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के सूत्रों का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों के रखरखाव और संचालन का खर्च लगातार बढ़ रहा है. इसी वजह से सरकारी फीस में बदलाव जरूरी माना गया.एक अधिकारी के मुताबिक मेडिकल कॉलेजों को बनाए रखने और उनसे जुड़े खर्च में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकारी फीस को संशोधित करना जरूरी हो गया था.सरकार की ओर से वसूली जाने वाली फीस पूरी तरह राज्य के सरकारी खजाने यानी स्टेट एक्सचेकर में जाएगी हालांकि सरकार ने संशोधित फीस स्ट्रक्चर को लेकर कोई अलग और विस्तृत आधिकारिक वजह नहीं बताई है.
छात्रों की फीस 50% तक माफ हो सकती है
नई फीस व्यवस्था में सिर्फ आय के आधार पर छूट ही नहीं है बल्कि असाधारण परिस्थितियों में छात्रों के लिए अलग राहत का प्रावधान भी किया गया है.नोटिफिकेशन के मुताबिक सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के प्रिंसिपल को यह अधिकार दिया गया है कि वे किसी छात्र की असाधारण आर्थिक या दूसरी ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए लागू सरकारी फीस में 50 प्रतिशत तक की छूट दे सकते हैं.यह छूट उन मामलों में दी जा सकती है जहां फीस का बोझ इतना ज्यादा हो कि छात्र को MBBS या BDS की पढ़ाई बीच में छोड़ने की नौबत आ जाए.
नई व्यवस्था में अमीर छात्रों पर ज्यादा बोझ
असम की नई फीस व्यवस्था का सबसे बड़ा बदलाव यही है कि अब सरकारी मेडिकल शिक्षा की लागत परिवार की आय के हिसाब से अलग-अलग होगी.जिन परिवारों की आय ज्यादा है उनके बच्चों को MBBS में सालाना 1 लाख और BDS में 75 हजार रुपये तक देने होंगे. दूसरी तरफ BPL और कम आय वाले परिवारों के छात्रों के लिए MBBS में 5,000 और BDS में 3,750 रुपये की फीस रखी गई है.मध्यम आय वर्ग के छात्रों को भी पूरी फीस नहीं देनी होगी और BDS में उन्हें 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी.इस तरह सरकार ने एक तरफ मेडिकल कॉलेजों के बढ़ते रखरखाव और संचालन खर्च को देखते हुए फीस बढ़ाई है, तो दूसरी तरफ आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को ज्यादा फीस के बोझ से बचाने के लिए आय आधारित स्लैब और विशेष छूट का प्रावधान किया है.अब असम के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए परिवार की आय सिर्फ आर्थिक स्थिति बताने वाला आंकड़ा नहीं होगी, बल्कि यह तय करने में भी अहम भूमिका निभाएगी कि उन्हें मेडिकल की पढ़ाई के लिए हर साल कितनी सरकारी फीस देनी होगी.