एक ने कार धुलवाई तो दूसरे ने घर, फायर ब्रिगेड की गाड़ी है या नेता जी का पोछा?
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कुछ नेताओं की हरकतें साफ दिखाती हैं कि इन्हें जनता के पैसों और सरकारी तंत्र से कोई मतलब नहीं है. जब मन किया, इमरजेंसी फायर ब्रिगेड को अपनी कार या बंगला धोने की मशीन बना लिया और इसे पोछे की तरह इस्तेमाल कर लिया. वीआईपी कल्चर की ये घटिया मानसिकता लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है, जहां आम जनता की समस्याओं को दरकिनार कर ये हुक्मरान अपनी अय्याशी में सरकारी संसाधनों की धज्जियां उड़ा रहे हैं.
गुजरात की घटना के बाद बवाल हो गया है.
भाईसाहब, देश के कुछ नेताओं का सिस्टम ही अलग है. इन्हें लगता है कि जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाली फायर ब्रिगेड और सरकारी गाड़ियां इनके घर की प्राइवेट जागीर हैं. फायर ब्रिगेड का नाम सुनते ही दिमाग में आग, धुआं और लोगों को बचाने वाली गाड़ियां आती हैं. लेकिन पहले मध्य प्रदेश और अब गुजरात से सामने आए दो वीडियो ने इस तस्वीर को उलट दिया. एक जगह फायर ब्रिगेड की गाड़ी विधायक के बंगले पर पानी का छिड़काव करती दिखी. दूसरी जगह इसी तरह की सरकारी गाड़ी से विधायक की कार धोने का वीडियो वायरल हुआ. आग बुझाने वाली लाल गाड़ी को इन महानुभावों ने अपनी कार और बंगला धोने का पम्प या यूं कहें कि पोछा ही बना रखा है. लगता है नेता जी भूल गए कि वो पब्लिक सर्वेंट हैं, कोई राजा-महाराजा नहीं, जो इमरजेंसी सर्विस को अपनी बकैती और पर्सनल सफाई के लिए इस्तेमाल करेंगे. सिस्टम की ऐसी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं कि अब इसपर क्या ही कहा जाए.
मामले 1: दाहोद में विधायक बचुभाई खाबाद के बंगले पर छिड़काव
• गुजरात के दाहोद जिले के देवगढ़ बारिया से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री बचुभाई खाबाद के धनपुर तालुका स्थित आवास पर भी ऐसा ही एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया.
• देवगढ़ बारिया नगरपालिका की फायर ब्रिगेड की गाड़ी सीधे विधायक के बंगले पर पानी का छिड़काव करती हुई कैमरे में कैद हो गई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर भारी विवाद छिड़ गया.
• देवगढ़ बारिया नगरपालिका के अध्यक्ष घमेश कलाल ने मीडिया को बताया कि उन्हें विधायक की तरफ से फोन आया था कि फायर ब्रिगेड भेजी जाए, उन्हें लगा कि कोई गंभीर आपात स्थिति होगी इसलिए उन्होंने तुरंत गाड़ी भेज दी.
• हालांकि, जब गाड़ी वहां पहुंची और फायरमैनों ने बताया कि उनसे बंगला धोने को कहा जा रहा है, तो अधिकारियों ने तुरंत काम रोक दिया. इस मामले के तूल पकड़ने और वीडियो वायरल होने के बाद नगरपालिका ने विधायक बचुभाई खाबाद से 2,700 रुपये का जुर्माना वसूला.
• इससे पहले 26 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश के सिंगरौली से बीजेपी विधायक रामनिवास शाह की सरकारी कोठी के बाहर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हुआ था.
• इस वीडियो में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कर्मचारी फायर ब्रिगेड की गाड़ी के पाइप से विधायक की सफेद टोयोटा इनोवा कार धोते हुए साफ नजर आए.
• जब इस पर बवाल मचा और विपक्षी नेता उमंग सिंघार ने तंज कसते हुए कहा कि आम जनता के घर आग लगने पर फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंचती, बल्कि बीजेपी विधायक के लिए यह प्राइवेट वॉशिंग सेंटर बन गई है, तो विधायक जी अपनी सफाई में अजीबोगरीब तर्क देने लगे.
• विधायक रामनिवास शाह ने अजीब बचाव करते हुए कहा कि क्या विधायक खुद अपनी गाड़ी धोता है? साथ ही दावा किया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी क्योंकि वह अपनी कोठी पर मौजूद नहीं थे. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि शायद म्युनिसिपल टैंकों में पानी की सप्लाई न होने के कारण यह गाड़ी अधिकारियों के यहां पानी पहुंचाने आई होगी.
सत्ता की इतनी हनक क्यों?
इन दोनों मामलों ने एक बार फिर से इस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है कि कैसे सत्ता के गलियारों में बैठे लोग सरकारी संसाधनों और आपातकालीन सेवाओं का अपने निजी कामों के लिए धड़ल्ले से दुरुपयोग करते हैं. चाहे वह सिंगराउली में विधायक की गाड़ी धोना हो या दाहोद में बंगले पर पानी डलवाना हो, यह घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही और वीआईपी कल्चर की मानसिकता को दर्शाती हैं. जनता के टैक्स के पैसों से चलने वाली फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी सेवाओं को इस तरह पर्सनल कार वॉश या वाटर टैंकर की तरह इस्तेमाल करना लोकतंत्र और आम नागरिकों के साथ सीधा मजाक है. जब तक ऐसे मामलों में सख्त और मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई नहीं होगी, तब तक नेताओं की यह मनमानी यूं ही चलती रहेगी.