Last Updated:
बस्तर लंबे समय तक नक्सलियों से प्रभावित जिला रहा है. नक्सल मुक्त होने के बाद यहां विकास के कई तरह के काम कराए जा रहे हैं. इनमें एक काम है बच्चों की पढ़ाई से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर का है. नारायणपुर में आदिवासी छात्रों के लिए हॉस्टल बनाया है. खास बात यह है कि हॉस्टल बनने से पहले इसे सुरक्षा बलों ने कैंप बनाया हुआ था. नक्सलियों को खत्म करने की प्लानिंग होती थी. अब पैरामिलिट्री जवानों की जगह यहां आदिवासी छात्र रह रहे हैं.
आदिवासी छात्रों के लिए सिक्योरिटी कैंप को हॉस्टल में बदला. (यह तस्वीर AI से बनाई गई है.)
नारायणपुर. बस्तर संभाग में कभी जिस इमारत का इस्तेमाल सुरक्षा बल नक्सलवादियों के खिलाफ अभियान के लिए करते थे, आज वहां आदिवासी छात्र रहकर अपने भविष्य की तैयारी कर रहे हैं. नारायणपुर के भटपाल में करीब 15 साल पहले बनाया गया सिक्योरिटी कैंप अब छात्रों के लिए हॉस्टल में बदल चुका है. अगस्त से यहां पैरामिलिट्री जवानों की जगह आसपास के नक्सलवाद से प्रभावित इलाकों से आए छात्र रह रहे हैं. भटपाल कैंपस में फिलहाल 2 हॉस्टल चल रहे हैं. इनमें एक प्री-मैट्रिक और दूसरा पोस्ट-मैट्रिक हॉस्टल है. दोनों में अनुसूचित जनजाति यानी ST वर्ग के लड़के रह रहे हैं.
अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद दूर-दराज के इलाकों से आने वाले आदिवासी छात्रों को स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा, “भटपाल इलाके में लड़कों के लिए पहले कोई पोस्ट-मैट्रिक हॉस्टल नहीं था. ऐसे में दूरस्थ इलाकों के आदिवासी छात्रों के सामने पढ़ाई जारी रखने के साथ रहने की भी बड़ी समस्या थी. उन्होंने कहा कि पहली बार पोस्ट-मैट्रिक हॉस्टल बनने से छात्रों को सुरक्षित रहने की जगह मिली है. इससे उन्हें आगे की पढ़ाई जारी रखने और बेहतर अवसर हासिल करने में मदद मिलेगी. कलेक्टर हाल ही में हॉस्टल की रसोई का निरीक्षण करने पहुंचीं और छात्रों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता भी जांची.
हॉस्टल में रहते हैं 150 से ज्यादा छात्र
भटपाल के प्री-मैट्रिक हॉस्टल में छठी से दसवीं कक्षा तक के छात्र रहते हैं. इसकी मंजूर क्षमता 100 छात्रों की है, लेकिन फिलहाल यहां 114 छात्र रह रहे हैं. वहीं, पोस्ट-मैट्रिक हॉस्टल में 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्र रहते हैं. इसकी क्षमता 50 छात्रों की है और लेकिन अभी में यहां 39 छात्र रह रहे हैं. छात्रों की बढ़ती संख्या और हॉस्टल को मिल रहे अच्छे रिस्पॉन्स को देखते हुए प्रशासन अब ऐसे और हॉस्टल तैयार करने की योजना बना रहा है.
अबूझमाड़ में बनेगा हॉस्टल
अगला हॉस्टल कुरुशनार में बनाया जा रहा है. यह नारायणपुर की तरफ से अबूझमाड़ यानी स्थानीय भाषा में ‘माड़’ के प्रवेश द्वार पर स्थित है. यहां लड़कियों के लिए हॉस्टल तैयार किया जा रहा है. बताया गया कि इसी इलाके में 2011 में एक रेजिडेंशियल स्कूल बनाया गया था. उस समय माओवादियों की ओर से स्कूल निर्माण को लेकर कुछ शर्तें रखी गई थीं. इनमें पक्की छत और ऊंची बाउंड्री वॉल नहीं बनाने की बात शामिल थी, ताकि सुरक्षा बल वहां अपना कैंप न बना सकें. अब नक्सलियों के प्रभाव में कमी के बाद इसी क्षेत्र में बने पुराने सिक्योरिटी कैंप को लड़कियों के हॉस्टल में बदला जा रहा है. प्रशासन को उम्मीद है कि यह हॉस्टल जल्द तैयार हो जाएगा.
नक्सलियों के गढ़ से शिक्षा के केंद्र तक
भटपाल हॉस्टल में आसपास के कई गांवों के छात्र रह रहे हैं. इनमें कोहकामेटा, मैडमनार, ओरछा, नेलवाड़, छोटे डोंगर, कोरेन्डा, चिमडी, रेमावंड और बेनूर शामिल हैं. अबूझमाड़ लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है. पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में 100 से ज्यादा माओवादी मारे गए हैं और बड़ी संख्या में लोगों ने आत्मसमर्पण भी किया है. इसी बदलाव के बीच बस्तर के माड़ और जगारगुंडा जैसे इलाकों को आधुनिक शिक्षा केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम हो रहा है. इस साल की शुरुआत में दोनों क्षेत्रों के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया था. सुरक्षा कैंपों का हॉस्टल में बदलना इसी बदलती तस्वीर की एक अहम मिसाल माना जा रहा है.