दिल्ली में बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा राणव का पुतला, क्रेन से किया जाएगा खड़ा
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Delhi Ramlila World Tallest Ravan: दिल्ली की श्री रामलीला सोसाइटी इस बार द्वारका सेक्टर 10 में दुनिया का सबसे बड़ा 221 फीट ऊंचा इको फ्रेंडली रावण जलाएगी. इसे बनाने में 7 टन लोहे का इस्तेमाल हुआ है और इस पर करीब 55 लाख रुपए की लागत आई है. बता दें कि इसे क्रेन से खड़ा किया जाएगा.
नई दिल्ली: दिल्ली की श्री रामलीला सोसाइटी इस बार इतिहास रचने जा रही है. यहां पर दशहरे के दिन पूरी दुनिया का सबसे बड़ा रावण जलाया जाएगा, जिसकी लंबाई 221 फीट रखी गई है. कई महीनो से इसे तैयार करने का काम किया जा रहा है. बड़ी संख्या में मजदूर मिलकर इसे बना रहे हैं. यह रावण पूरी तरह से इको फ्रेंडली है. आपको बता दें कि दिल्ली के द्वारका सेक्टर 10 में स्थित श्री रामलीला सोसाइटी इस बार इतने बड़े रावण को तैयार कर रही है.
जहां 8 अक्टूबर को इसे 3 से 4 क्रेन खड़ा करने के लिए आएंगे. 8 अक्टूबर को ही इसे दिल्ली वालों के लिए खड़ा कर दिया जाएगा, ताकि लोग आएं और इतने बड़े रावण को देखें. सबसे खास बात यह है कि इस रावण का बारिश भी कुछ बिगाड़ नहीं पाएगी. क्योंकि इसमें कागज और गोंद का इस्तेमाल नहीं किया गया है. यानी दिल्ली वाले इस बार बेहद अनोखा दशहरा देखने जा रहे हैं.
7 टन लोहे का किया गया है इस्तेमाल
द्वारका सेक्टर 10 श्री रामलीला सोसाइटी के प्रेसिडेंट संजीव गोयल ने बताया कि यह आइडिया इस सोसाइटी के फाउंडर नेताजी राजेश गहलोत का था. उन्होंने हर साल कुछ ना कुछ अलग करने का फैसला लिया था इसीलिए इस परंपरा को उनके स्वर्गवासी होने के बाद भी जारी रखा गया है. उन्होंने बताया कि रावण की लंबाई 221 फीट है. जबकि कुंभकर्ण और मेघनाद की 90-90 फीट लंबाई रखी गई है. इसमें 7 टन लोहा इस्तेमाल किया गया है. इसमें कागज और गोंद का इस्तेमाल नहीं हुआ है.
उन्होंने बताया कि पिछले 4 महीने से इसे बनाने का काम किया जा रहा है. अभी से ही लोग आने लगे हैं और लोग इसे देखकर जा रहे हैं. लोग वीडियो बना रहे हैं. लोग बहुत उत्साहित हैं. उन्होंने बताया कि लगभग 40 से ज्यादा मजदूर 14 घंटे काम करके इसे तैयार कर रहे हैं. लगभग अब इसको अंतिम रूप दिया जा चुका है. 8 अक्टूबर को इसे खड़ा कर दिया जाएगा.
55 लाख रुपए से बनाया गया इको फ्रेंडली रावण
प्रेसिडेंट संजीव गोयल ने यह भी बताया कि दुनिया के सबसे लंबे रावण को तैयार करने के साथ ही कुंभकर्ण और मेघनाद पर कुल खर्च देखें तो 50 से 55 लाख रुपए का आया है. उन्होंने बताया कि बारिश और आंधी तूफान में भी इस रावण को कोई नुकसान नहीं होगा. इस रावण को जलाने के लिए देश के प्रधानमंत्री और दिल्ली की मुख्यमंत्री समेत कई केंद्रीय मंत्रियों को आमंत्रित किया गया है. हर साल दशहरे के दिन इस ग्राउंड पर 3 लाख से ज्यादा लोग पहुंचते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि इससे कोई भी प्रदूषण नहीं होगा. क्योंकि यह रावण पूरी तरह से इको फ्रेंडली है.
सोमनाथ मंदिर का दिया गया रूप
प्रेसिडेंट संजीव गोयल ने बताया कि सोमनाथ मंदिर को 75 साल होने जा रहे हैं. इसलिए इस बार जो रामलीला का स्टेज सजेगा वह सोमनाथ मंदिर के द्वार और सोमनाथ मंदिर के रूप जैसा बनाया गया है. स्टेज भी लगभग बनकर तैयार है. रामलीला भी कुछ ही दिनों में शुरू हो जाएगी. यहां की रामलीला पूरे देश में सबसे अलग होती है.
उन्होंने यह भी बताया कि रावण का मतलब होता है बुराई का अंत और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने का. इसलिए हर साल कुछ ना कुछ नया प्रयोग किया जाता है. वहीं, कैप्टन प्रमोद कुमार ने बताया कि रावण हमारे समाज में व्याप्त बुराई है और हम लोग बुराई को ही हर साल जलाते हैं. ताकि संदेश जाए की बुराई कितनी ही बड़ी क्यों ना हो, उसका अंत जरूर होता है.