Last Updated:
Radhakant Ojha News: उत्तर प्रदेश के 10 सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 8 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील राधाकांत ओझा का भी नाम शामिल हैं. राधाकांत ओझा पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा के भाई हैं.
बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवार राधाकांत ओझा.
लखनऊः उत्तर प्रदेश के 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने 8 उम्मीदवारों की लिस्ट बीते सोमवार को जारी की. इस लिस्ट में एक-दो नाम ऐसे थे, जो हर किसी के लिए नए थे. जिसमें एक नाम था राधाकांत ओझा का. यह नाम सामने आते ही हर किसी ने गूगल पर इनके बारे में खोजकर पढ़ना शुरू कर दिया. जब आप राधाकांत ओझा को इंटरनेट पर ढूंढेंगे तो उनके अधिवक्ता होने और दो दफा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष होने की जानकारी मिलेगी. इसके अलावा जो एक जानकारी मिलती है, उससे यह साफ जाहिर हो जाता है कि रामाकांत ओझा के जीवन में राजनीति बहुत पहले से रही है. दरअसल, राधाकांत ओझा ने पंडित केशरीनाथ त्रिपाठी से मुलाकात और उनसे सीखे गुण को लेकर एक लेख लिखा था.
‘जब वह फूलपुर से चुनाव लड़ रहे थे तब मैं उनसे…’
इस लेख में राधाकांत ओझा लिखते हैं, ‘पंडित केशरीनाथ त्रिपाठी के संपर्क में मैं पहली बार तब आया, जब वह फूलपुर से 1977 का विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे. तब मैं केवीएम इंटर कॉलेज कमलानगर में छात्र था और मेरे पिता जी, रमाशंकर ओझा उसी कॉलेज के प्रधानाचार्य थे. उस क्षेत्र के संपूर्ण चुनाव का संचालन पिताजी के निर्देश में हो रहा था. 1988 में जब हाईकोर्ट पहुंचा तो लालगंज, प्रतापगढ़ में पहली बार स्थापित बार एसोसिएशन का उद्धाटन करने के लिए उनके साथ गाड़ी में जाने का मौका मिला. रास्ते में ढेर सारी बातें हुईं. उके साथ इस संक्षिप्त यात्रा में अधिवक्ता जीवन का फलसफा सीखने को मिला. पहला तो यह कि अधिवक्ता को मुकदमे की पूर्ण तैयारी रखनी चाहिए. क्योंकि न्यायमूर्ति कभी भी कोई प्रश्न कर सकते हैं और दूसरा यह कि अधिवक्ता को अपने ड्रेस कोड में केवल न्यायिक उत्सवों और कार्यक्रमों में ही शामिल होना चाहिए. कभी बाजार, मार्केट, सामान खरीदने और दूसरी जगहों पर ड्रेस कोड में या बैंड लगाकर नहीं जाना चाहिए.’
‘कभी भी वकील को ड्रेस में बाहर क्लाइंट के साथ खाना नहीं खाना चाहिए’
राधाकांत ओझा आगे लिखते हैं, ‘कभी भी किसी अधिवक्ता को क्लाइंट के साथ ड्रेस कोड में हाईकोर्ट के बाहर न तो भोजन करना चाहिए और न ही चाय पीनी चाहिए. हाईकोर्ट में त्रिपाठी जी की शालीनता और उनका व्यवहार हमेशा अनुकरणीय रहा. उन्हीं से सीखने को मिला कि न्यायमूर्ति को अपनी बात शालीनता और बुद्धिमता के साथ बतानी चाहिए. निर्णय अगर विपक्ष में जा रहा है तो न्याय का सम्मान करते हुए शालीनता का परिचय देना चाहिए.’