बच्चे से रोज ये एक सवाल पूछना बंद करें, पैरेंटिंग एक्सपर्ट्स क्यों दे रहे हैं इसकी जगह दूसरा तरीका?

बच्चे से रोज ये एक सवाल पूछना बंद करें, पैरेंटिंग एक्सपर्ट्स क्यों दे रहे हैं इसकी जगह दूसरा तरीका?


Parenting Tips: स्कूल से घर लौटते ही कई माता-पिता बच्चे से सबसे पहले पूछते हैं, “आज स्कूल में क्या हुआ?” सवाल बिल्कुल सामान्य लगता है, लेकिन अक्सर इसका जवाब मिलता है, “कुछ नहीं.” फिर माता-पिता दोबारा पूछते हैं, “आज क्या पढ़ाया?”, “किससे बात की?” और बच्चा बातचीत से बचने लगता है. दरअसल, समस्या हमेशा बच्चे के व्यवहार में नहीं होती. कई बार सवाल पूछने का तरीका ही ऐसा होता है जिससे उसे विस्तार से जवाब देने का मन नहीं करता.

बच्चे से दिनभर की बातें जानने के लिए लगातार सवालों की जगह बातचीत को सहज बनाना ज्यादा मददगार हो सकता है. पैरेंटिंग एक्सपर्ट्स भी बच्चों से जुड़ने के लिए खुले और अनुभव आधारित सवालों को बेहतर तरीका मानते हैं. इससे बातचीत पूछताछ जैसी महसूस नहीं होती.

क्यों “आज स्कूल में क्या हुआ?” का जवाब अक्सर “कुछ नहीं” मिलता है

बच्चे के लिए “आज स्कूल में क्या हुआ?” एक बहुत बड़ा और खुला सवाल है. उसके पूरे दिन में कई क्लास, दोस्तों से बातचीत, खेल, होमवर्क और छोटी-बड़ी घटनाएं होती हैं. ऐसे में उसे समझ नहीं आता कि शुरुआत कहां से करे. खासकर जब बच्चा थका हुआ घर आता है तो वह लंबा जवाब देने के मूड में भी नहीं होता. कई बार माता-पिता एक के बाद एक सवाल पूछने लगते हैं. “टीचर ने क्या कहा?”, “दोस्तों के साथ खेले?”, “लंच में क्या खाया?” जैसे सवाल बच्चे को बातचीत के बजाय जवाब देने की जिम्मेदारी जैसे लग सकते हैं. इसका मतलब यह नहीं कि माता-पिता की दिलचस्पी गलत है. बस बातचीत शुरू करने का तरीका थोड़ा बदला जा सकता है.

सवाल बदलने से बातचीत कैसे आसान हो सकती है

बच्चे से पूरे दिन का हिसाब मांगने के बजाय किसी एक खास अनुभव पर बात शुरू करें. उदाहरण के लिए “आज स्कूल में सबसे मजेदार बात क्या थी?” या “आज ऐसा क्या हुआ जिससे तुम्हें अच्छा लगा?” जैसे सवाल बच्चे को सोचने के लिए एक स्पष्ट दिशा देते हैं. अगर बच्चा फिर भी छोटा जवाब देता है तो तुरंत दूसरा सवाल दागने के बजाय अपनी तरफ से दिन की कोई छोटी बात साझा करें. जैसे, “आज मेरा दिन थोड़ा व्यस्त था, लेकिन रास्ते में मुझे एक मजेदार चीज दिखी.” इससे बच्चे को महसूस होता है कि बातचीत केवल उससे जवाब लेने के लिए नहीं हो रही है.

ऐसे सवाल पूछें जिनका जवाब सिर्फ हां या ना में न हो

“क्या स्कूल अच्छा था?” के जवाब में बच्चा आसानी से “हां” या “नहीं” कह सकता है. इसकी जगह सवाल को थोड़ा खास बनाया जा सकता है. जैसे, “आज किस क्लास में तुम्हें सबसे ज्यादा मजा आया?” या “आज तुम्हें किस बात पर हंसी आई?” इसी तरह “दोस्तों से मिले?” की जगह “आज तुमने किस दोस्त के साथ सबसे ज्यादा समय बिताया?” पूछा जा सकता है. ऐसे सवाल बच्चे को किसी घटना, व्यक्ति या भावना के बारे में बात करने का मौका देते हैं.

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बच्चे की बात बीच में न काटें

कई बार बच्चा कुछ बताना शुरू करता है और माता-पिता तुरंत सलाह देने लगते हैं, अगर बच्चा कहता है कि दोस्त से उसका झगड़ा हुआ तो तुरंत “तुमने ऐसा क्यों किया?” पूछने के बजाय पहले उसकी पूरी बात सुनना बेहतर है. बच्चे को यह भरोसा होना चाहिए कि वह अपनी छोटी-बड़ी बातें बिना डांट के बता सकता है. जब उसे लगेगा कि उसकी बात सुनी जा रही है तो वह धीरे-धीरे खुद ज्यादा बातें साझा कर सकता है.

हर दिन बातचीत का एक तय मौका बनाएं

बातचीत के लिए अलग से इंटरव्यू जैसा माहौल बनाने की जरूरत नहीं है. रात के खाने, साथ टहलने या सोने से पहले का समय इसके लिए अच्छा हो सकता है. उस समय मोबाइल और टीवी जैसी चीजों को कुछ देर दूर रखकर बच्चे के साथ सामान्य बातचीत करें. कभी आप अपने बचपन की कोई छोटी घटना भी बता सकते हैं. इससे बच्चे को समझ आता है कि माता-पिता भी अपनी भावनाएं और अनुभव साझा करते हैं. बातचीत दोतरफा होने पर बच्चा खुद भी सवाल पूछना शुरू कर सकता है.

सवाल से ज्यादा जरूरी है बातचीत का माहौल

पैरेंटिंग में कोई एक सवाल हर बच्चे पर समान तरीके से काम नहीं करता. कुछ बच्चे तुरंत अपनी बातें बताते हैं तो कुछ को खुलने में समय लगता है. इसलिए रोज एक ही सवाल पूछने के बजाय बच्चे की उम्र, स्वभाव और उस समय के मूड को समझना जरूरी है.



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