जीएसटी काउंसिल की 8 अक्टूबर की बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर फैसला हो सकता है. इनमें सबसे बड़ा बदलाव कर्मचारियों के ग्रुप हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस से जुड़ा है. मनीकंट्रोल को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार कंपनियों को कर्मचारियों के लिए खरीदे गए ग्रुप इंश्योरेंस के प्रीमियम पर इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC देने की अनुमति देने पर विचार कर रही है. इसके अलावा दुर्लभ बीमारियों की दवाओं और विदेशी कंपनियों के लिए काम करने वाली भारतीय फार्मा कंपनियों को भी GST में राहत मिल सकती है.
अभी कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए ग्रुप हेल्थ या ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस लेती हैं तो उस प्रीमियम पर आम तौर पर 18% GST लगता है. इस GST का ITC लेने की सुविधा नहीं है. अब सरकार इसमें बदलाव पर विचार कर रही है. अगर कोई कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए 1 लाख रुपये का ग्रुप इंश्योरेंस खरीदती है और उस पर 18000 रुपये GST देती है, तो अभी यह टैक्स कंपनी के लिए अतिरिक्त लागत बन जाता है. प्रस्ताव पास होने पर कंपनी को इस टैक्स का ITC मिल सकता है. इससे कंपनियों की इंश्योरेंस लागत घट सकती है.
कर्मचारी को इसका क्या फायदा होगा?
यह बदलाव सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में पैसा नहीं देगा. लेकिन इसका फायदा अप्रत्यक्ष तौर पर मिल सकता है. कंपनी के लिए इंश्योरेंस सस्ता हुआ तो वह उसी बजट में कर्मचारियों को ज्यादा कवर देने का विकल्प चुन सकती है. जैसे अभी किसी कंपनी के पास कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा पर 10 लाख रुपये खर्च करने का बजट है. GST में राहत मिलने के बाद कंपनी उसी खर्च में ज्यादा बीमा कवर खरीद सकती है. इससे कर्मचारियों को बेहतर हेल्थ कवर मिल सकता है.
सरकार का मानना है कि देश में ज्यादातर संगठित कंपनियां अपने कर्मचारियों को किसी न किसी तरह का बीमा देती हैं. इसलिए इस बदलाव से बीमा की पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
दुर्लभ बीमारी की दवाओं पर भी बड़ी राहत
GST काउंसिल के सामने एक और अहम प्रस्ताव है.सरकार सात दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली आयातित दवाओं, मेडिसिन और विशेष खाद्य पदार्थों को GST से छूट देने पर विचार कर रही है. अभी इन बीमारियों का इलाज कई परिवारों के लिए बेहद महंगा पड़ता है. कुछ मामलों में दवाओं और इलाज का खर्च हर महीने लाखों रुपये तक पहुंच सकता है. अगर GST से छूट मिलती है तो मरीज के परिवार को सीधे फायदा होगा. दवा खरीदने की कुल लागत कम हो सकती है. हालांकि अभी सरकार ने उन सात दुर्लभ बीमारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं.
विदेशी कंपनियों के लिए काम करने वाली फार्मा कंपनियों को भी राहत
GST में एक और बड़ा बदलाव भारतीय फार्मा कंपनियों से जुड़ा है. भारत की कई कंपनियां विदेश की कंपनियों के लिए क्लिनिकल ट्रायल, टेस्टिंग, रिसर्च, एनालिसिस और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग का काम करती हैं. प्रस्तावित बदलाव के तहत ऐसे काम को निर्यात यानी एक्सपोर्ट ऑफ सर्विसेज माना जा सकता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ऐसी सेवाओं पर GST नहीं लगेगा. अभी कई मामलों में इन सेवाओं पर 18% GST का बोझ पड़ता है. यानी भारतीय फार्मा कंपनी विदेशी ग्राहक के लिए काम करेगी तो उसे टैक्स के मामले में ज्यादा राहत मिल सकती है. इससे भारतीय कंपनियों की लागत घटेगी और विदेशी कारोबार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है.
18% GST वाले इनपुट का रिफंड भी तेजी से मिलेगा
फार्मा सेक्टर के लिए एक और राहत की तैयारी है. अगर किसी कंपनी ने अपने काम में ऐसे इनपुट इस्तेमाल किए हैं जिन पर 18% GST चुकाया गया है, तो उस टैक्स के रिफंड की व्यवस्था आसान हो सकती है. प्रस्ताव के मुताबिक, जोखिम की जांच पूरी होने के बाद करीब 90% रिफंड दावों को अपने आप जारी करने की व्यवस्था हो सकती है. इसका मतलब है कि कंपनियों का पैसा लंबे समय तक टैक्स विभाग के पास फंसा नहीं रहेगा. कारोबार को जल्दी पैसा मिलने से वर्किंग कैपिटल की समस्या कम हो सकती है.
विदेश में अपनी ही ब्रांच के जरिए कारोबार करने वालों को भी फायदा
GST काउंसिल एक्स्पोर्ट की परिभाषा में भी बदलाव पर विचार कर रही है. अभी कई भारतीय कंपनियां विदेश में अपनी ब्रांच के जरिए कारोबार करती हैं. कुछ मामलों में अपनी ही विदेशी ब्रांच के जरिए ग्राहक से भुगतान लेने पर उस लेन-देन को GST के तहत निर्यात का पूरा फायदा नहीं मिल पाता. अब इस शर्त को हटाने का प्रस्ताव है. अगर बदलाव लागू हुआ तो विदेशी ग्राहक को दी गई ऐसी सेवाओं को भी जीरो-रेटेड एक्सपोर्ट माना जा सकता है. यानी कंपनी को इन सेवाओं पर GST का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा.