किसान की डबरी बनी कमाई का जरिया, मछली पालन और सब्जी की खेती से बदली किस्मत
Last Updated:
Fish Farming Vegetable Cultivation: छत्तीसगढ़ के सरगुजा में किसान शिव बालक ने ग्रामीण रोजगार योजना से बनी डबरी को कमाई का जरिया बना लिया है. कतला, रोहू, मृगल और ग्रास कार्प का मिश्रित पालन कर वे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.जिससे परिवार को अतिरिक्त आमदनी मिल रही है.
Fish Farming Vegetable Cultivation: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के एक किसान ने धान की खेती से कम मुनाफा मिलने के बाद डबरी के जरिए मछली पालन और सब्जी की खेती शुरू की है. इस प्रयास से उन्हें पहली बार में ही अच्छा लाभ मिला है और यह उनके लिए आजीविका का एक नया साधन बन गया है.
ग्रामीण रोजगार योजना से मिली मदद
किसान शिव बालक ने बताया कि उनकी डबरी ग्रामीण रोजगार योजना के तहत बनवाई गई थी. डबरी बनने के बाद उन्होंने इसमें मछली पालन शुरू किया, जो अब उनके लिए आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन बन गई है. पहले जहां धान की खेती से अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल पाता था, वहीं अब बेहतर आमदनी की उम्मीद है.
मछली बेचकर हुई कमाई
शिव बालक के मुताबिक उन्होंने शुरुआत में ही करीब 2 क्विंटल मछली बेचकर 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी प्राप्त की है. इस साल वह मछलियों को बेहतर तरीके से दाना खिला रहे हैं, जिससे उत्पादन और बिक्री बढ़ने की उम्मीद है और आने वाले समय में और अधिक कमाई हो सकती है.
विभिन्न प्रजातियों का पालन
डबरी में केवल एक प्रजाति की मछली नहीं, बल्कि कतला, रोहू, मृगल और ग्रास कार्प जैसी विभिन्न किस्मों का मिश्रित पालन किया जा रहा है. अलग-अलग प्रजातियों के पालन से डबरी की उपलब्ध जगह और पानी का बेहतर उपयोग हो रहा है.
सब्जी की खेती में भी फायदा
डबरी का लाभ केवल मछली पालन तक सीमित नहीं है. शिव बालक धान की खेती के बाद गर्मी के मौसम में इसी डबरी के पानी का उपयोग सब्जी की खेती के लिए भी करते हैं, जिससे पानी का सदुपयोग होता है और परिवार को अतिरिक्त आमदनी मिलती है.
आगे क्या होगा
धान की खेती में कम मुनाफा मिलने के बाद शिव बालक ने मछली पालन को कमाई के एक बेहतर विकल्प के रूप में अपनाया है. उनका कहना है कि डबरी बनने से उन्हें आजीविका का पक्का साधन मिल गया है और आने वाले दिनों में इससे और अधिक मुनाफे की उम्मीद है.