धरती से 790 प्रकाश वर्ष दूर चमत्कार: मर चुके तारे की राख से जन्मा बृहस्पति जितना बड़ा ग्रह, पहली बार ऐसी खोज

धरती से 790 प्रकाश वर्ष दूर चमत्कार: मर चुके तारे की राख से जन्मा बृहस्पति जितना बड़ा ग्रह, पहली बार ऐसी खोज


नई दिल्ली: ब्रह्मांड को हम जितना समझते हैं, यह हमें उतना ही उलझा देता है. अब वैज्ञानिकों ने धरती से करीब 790 प्रकाश वर्ष दूर एक मरे हुए सफेद बौने तारे की राख से पैदा हुए एक ग्रह को खोज निकाला है. एचएस 0209+0832 नाम का यह वाइट ड्वार्फ अपनी मौत के बाद भी शांत नहीं बैठा. इसने अपने अंतिम समय में निकले मलबे को समेटकर एक जुपिटर जितना बड़ा गैस दानव तैयार कर दिया. नेचर एस्ट्रोनॉमी में पब्लिश स्टडी के मुताबिक ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी मरे हुए वाइट ड्वार्फ के पास दूसरी पीढ़ी का नया ग्रह मिला है. अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि तारे की मौत उसके आसपास के सभी ग्रहों के लिए केवल महाप्रलय लाती है.

मरे हुए सितारे की राख से कैसे पैदा हुआ जुपिटर जैसा दानव ग्रह?

आम तौर पर जब कोई सितारा अपनी उम्र पूरी करके मरता है तो वह अपने आसपास की पूरी व्यवस्था को तहस-नहस कर देता है. हमारा सूरज भी आज से करीब पांच अरब साल बाद ईंधन खत्म होने पर एक विशाल लाल दानव यानी रेड जायंट में बदल जाएगा. उस भयानक विस्तार के दौरान बुध और शुक्र के साथ हमारी पृथ्वी भी उसके पेट में समा सकती है. जब तारे की बाहरी परतें उड़ जाती हैं तो केंद्र में सिर्फ एक सुलगता हुआ सफेद बौना तारा बचता है.

वैज्ञानिकों को लंबे समय से पल्सार जैसे न्यूट्रॉन तारों के पास नए ग्रह बनने का शक था. किसी वाइट ड्वार्फ के अवशेषों से एक पूरे ग्रह का जन्म होना अनपेक्षित था. नासा के टेस सैटेलाइट ने इस मरे हुए तारे की चमक में हर 4.4 दिन पर एक हल्की गिरावट दर्ज की.

डेटा के एनालिसिस से पता चला कि यह कोई मामूली पत्थर नहीं बल्कि जुपिटर के बराबर आकार वाला एक भारी गैस दानव है. यह ग्रह अपने मृत जनक तारे के बेहद करीब कक्षा में घूम रहा है.

इस नए नवेले ग्रह के वायुमंडल में ऐसा क्या मिला जिसने वैज्ञानिकों को चौंकाया?

जब कोई वाइट ड्वार्फ अंतरिक्ष में बचता है तो उसका भारी गुरुत्वाकर्षण आसपास मौजूद पुराने ग्रहों के टुकड़ों को अपनी तरफ खींचता है. आमतौर पर ऐसे मामलों में सिलिकॉन और लोहे जैसे आम चट्टानी तत्वों के सबूत मिलते हैं. इस सिस्टम में वैज्ञानिकों को जो केमिकल सिग्नेचर मिले उन्होंने पूरी कहानी ही बदल दी.
  1. यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के एस्ट्रोनॉमर जेमी विलियम्स और उनकी टीम ने देखा कि इस तारे के वातावरण में तांबा और जस्ता जैसे भारी तत्व तैर रहे हैं. सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि वहां नायोबियम नाम की धातु सूरज की तुलना में 1000 गुना अधिक मात्रा में मौजूद थी. यह धातु पहली पीढ़ी के किसी भी सामान्य ग्रह में इतनी बड़ी मात्रा में कभी नहीं पाई जाती है.
  2. यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन के एस्ट्रोनॉमर निकोलस स्टोन ने कहा, ‘तत्वों का यह पैटर्न एस-प्रोसेस का साफ संकेत है जो मरते हुए तारों के रेड जायंट फेज के दौरान भारी तत्वों का निर्माण करता है’. इस अजीब केमिकल बनावट ने वैज्ञानिकों को यकीन दिलाया कि यह ग्रह तारे की मौत के दौरान निकले कचरे से ही बना है.
  3. अंतरिक्ष में किसी मरे हुए तारे के मलबे से नया ग्रह बनना आसान काम नहीं है. जब कोई अकेला तारा मरता है तो वह अपने पूरे द्रव्यमान को अंतरिक्ष में चारों तरफ बराबर मात्रा में फेंक देता है. ऐसे में उस मलबे का बिखर जाना तय होता है जिससे नया ग्रह बनने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है.

एचएस 0209+0832 के मामले में हालात बिल्कुल अलग और बेहद पेचीदा रहे होंगे. रिसर्च टीम का मानना है कि इस तारे के पास जरूर कोई दूसरा साथी तारा मौजूद रहा होगा. उस साथी तारे के गुरुत्वाकर्षण ने अंतरिक्ष में फैलते मलबे को बाहर जाने से रोका होगा. उसने उस भारी सामग्री को खींचकर वापस कक्षा में एक डिस्क के रूप में जमा कर दिया. इसी प्रोटॉप्लैनेटरी डिस्क के अंदर धीरे-धीरे धूल और गैस आपस में जुड़े और एक नए ग्रह ने आकार ले लिया.

HS 0209+0832 के चारों ओर चक्कर लगाने वाले दूसरी पीढ़ी के ग्रह का आर्टिस्ट इम्प्रेशन. यह ऐसा पहला ग्रह है जो किसी व्हाइट ड्वार्फ के चारों ओर चक्कर लगाता हुआ पाया गया है. (Image Credit. Dr. Snehalata Sahu / University of Warwick.)

यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के जेमी विलियम्स ने कहा, ‘यह बिल्कुल वैसा है जैसे कोई ग्रह उसी तारे की राख से उठ खड़ा हुआ हो जिसके चक्कर वह कभी लगाता था’.

अगर यह प्रक्रिया साबित हो जाती है तो अंतरिक्ष में ऐसे कई और पुनर्जन्म वाले ग्रह मिल सकते हैं.

  • इस नई दुनिया की कहानी जितनी हैरान करने वाली है उतनी ही क्रूर और दर्दनाक भी दिखाई देती है. यह गैस दानव अपने जन्मदाता वाइट ड्वार्फ के इतने नजदीक घूम रहा है कि इसका एक चक्कर सिर्फ 4.4 दिन में पूरा हो जाता है. यह ग्रह अपने तारे के साथ टाइडली लॉक्ड है जिसका मतलब है कि इसका एक ही हिस्सा हमेशा तारे की तरफ रहता है.
  • इतने करीब होने की वजह से सफेद बौने तारे से निकलने वाला भयानक रेडिएशन इस ग्रह पर लगातार हमला कर रहा है. इस भयंकर गर्मी और रेडिएशन के कारण इस दैत्य ग्रह का वायुमंडल धीरे-धीरे उबलकर अंतरिक्ष में भाप बनकर उड़ रहा है. जो गैसें और धातुएं ग्रह से अलग हो रही हैं उन्हें यह सफेद बौना तारा वापस अपने अंदर खींच रहा है.
  • यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के एस्ट्रोफिजिसिस्ट बोरिस गैंसिके ने कहा, ‘इस ग्रह की सबसे खास बात यह है कि यह कहीं बाहर से नहीं आया बल्कि इस सिस्टम ने पुरानी दुनिया की नींव पर ही एक नई दुनिया को जन्म दिया है’. अब वही मृत तारा अपने द्वारा बनाए गए इस नए बच्चे को धीरे-धीरे निगलकर खत्म कर रहा है.

सूरज के बुझने के बाद क्या हमारी पृथ्वी की राख से भी बनेगी नई दुनिया?

इस स्टडी ने यह उम्मीद जगा दी है कि तबाही के बाद भी सौर मंडल में पुनर्निर्माण संभव हो सकता है. हो सकता है कि जब हमारा सूरज लाल दानव बनकर पृथ्वी और बाकी आंतरिक ग्रहों को निगल ले तब उसका बिखरा हुआ मलबा शांत न बैठे. अगर उस मलबे से हमारे सौर मंडल में भी दूसरी पीढ़ी का कोई नया ग्रह जन्म ले ले तो यह कोई अजूबा नहीं होगा.

वैज्ञानिक अब नासा के डेटा का इस्तेमाल करके अंतरिक्ष में मौजूद दूसरे वाइट ड्वार्फ तारों के आसपास भी ऐसी ही राख से उपजी दुनिया तलाशने की तैयारी कर रहे हैं.



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