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पहाड़ों पर पाई जाने वाली जंगली सरसों यानी ‘जखिया’ सिर्फ एक शानदार तड़के वाला मसाला ही नहीं, बल्कि अचूक औषधि भी है. इसके बीज जीरे और अजवाइन से भी ज्यादा स्वादिष्ट और खुशबूदार होते हैं. आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि इसके पत्तों के काढ़े में पैरासिटामोल जैसे गुण होते हैं, जो बुखार को दूर भगाते हैं. वहीं, इसकी पत्तियों का रस कान के दर्द में रामबाण इलाज का काम करता है. स्वाद और सेहत का यह अनूठा संगम वाकई कमाल का है!
जखिया जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ हमारी रसोई और फर्स्ट-एड किट दोनों का हिस्सा बन सकती हैं.(wikipedia)
जखिया की पहचान और खासियत
जखिया (Cleome viscosa) को पहचानना बहुत आसान है. इसकी पत्तियां काफी चिपचिपी (Sticky) होती हैं, जिन्हें छूने पर एक खास तरह का अहसास होता है. इसके पीले रंग के सुंदर फूल मुख्य रूप से सुबह के समय ही खिलते हैं, क्योंकि तेज धूप निकलते ही ये मुरझा जाते हैं.
फूलों के झड़ने के बाद इनमें छोटी-छोटी फलियां बनती हैं, जिनके अंदर छोटे-छोटे काले बीज होते हैं. जब ये फलियां सूख जाती हैं, तो इनके अंदर से ये बीज निकलते हैं. पहाड़ी संस्कृति में इन बीजों को दाल, सब्जी और कढ़ी में तड़का लगाने के लिए जीरे और अजवाइन से भी ज्यादा पसंद किया जाता है. इसकी खूशबू और तीखापन खाने के स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है.
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