Little Africa in Hyderabad I हैदराबाद की इस कॉलोनी में कदम रखते ही लगेगा जैसे अफ्रीका पहुंच गए, जानिए क्यों

Little Africa in Hyderabad I हैदराबाद की इस कॉलोनी में कदम रखते ही लगेगा जैसे अफ्रीका पहुंच गए, जानिए क्यों


होमताजा खबरदेश

दराबाद में बसा है लिटिल अफ्रीका, गलियों में सुनाई देती है सोमाली-अरबी की आवाज

Last Updated:

Little Africa in Hyderabad: हैदराबाद के टोलीचौकी स्थित पैरामाउंट कॉलोनी और सनसिटी इलाके को ‘लिटिल अफ्रीका’ के नाम से जाना जाता है. यहां सोमालिया, सूडान, यमन, एरिट्रिया और नाइजीरिया समेत कई देशों के लोग रहते हैं. अफ्रीकी खानपान, भाषाएं और संस्कृति के साथ शिक्षा, मेडिकल टूरिज्म और पुराने निजामकालीन रिश्ते इस इलाके को खास पहचान देते हैं.

हैदराबाद. चारमीनार, मोतियों के बाजार और दम बिरयानी के लिए मशहूर हैदराबाद के भीतर एक ऐसा इलाका भी आबाद है जहां कदम रखते ही आपको किसी अफ्रीकी मुल्क की गलियों में होने का अहसास होने लगता है. टोलीचौकी स्थित पैरामाउंट कॉलोनी और सनसिटी का यह इलाका आज शहर में लिटिल अफ्रीका के नाम से अपनी अनोखी पहचान बना चुका है. शाम ढलते ही यहां का मिजाज पूरी तरह बदल जाता है.

पारंपरिक लंबा कुर्ता पहने लोग, अफ्रीकी और अरबी बोलियों में होती गुफ्तगू और कैफे से आती खास मसालों की खुशबू इस पूरे इलाके को देश के बाकी हिस्सों से बिल्कुल जुदा बनाती है. यहां सोमालिया, सूडान, यमन, एरिट्रिया और नाइजीरिया समेत कई अफ्रीकी देशों के नागरिक बड़ी तादाद में बसे हुए हैं. हैदराबाद का यह इलाका अचानक इस तरह विकसित नहीं हुआ. उस्मानिया यूनिवर्सिटी, इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेस यूनिवर्सिटी (EFLU) और शहर के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में किफायती अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई अफ्रीकी छात्रों को यहां खींच लाती है.

अफ्रीका और हैदराबाद का रिश्ता नया नहीं

इसके अलावा, हैदराबाद का मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों का सस्ता व गुणवत्तापूर्ण इलाज अफ्रीकी देशों के मरीजों को मेडिकल टूरिज्म के तहत यहां लाता है. यहां की दिनचर्या में पारंपरिक जीवनशैली साफ झलकती है. स्थानीय भोजनालयों में फाउल, सबायाड, अगाशी चिकन और खास मसालों वाली सोमाली चाय का स्वाद मिलता है. दुकानों पर अरबी और सोमाली भाषाओं के साइनबोर्ड, खास हेयर सैलून और विदेशी खान-पान की जरूरतों को पूरा करने वाली किराना दुकानें यहां के पूरे इकोसिस्टम को आत्मनिर्भर बनाती हैं.

अफ्रीका और हैदराबाद का रिश्ता नया नहीं है, आसफ जाही दौर में छठे निज़ाम महबूब अली पाशा ने अफ्रीकी सैनिकों की एक खास घुड़सवार टुकड़ी तैयार की थी, जिसे अफ्रीकन कैवेलरी गार्ड्स कहा गया. इसी के नाम पर आज भी शहर में एसी गार्ड्स इलाका मौजूद है, जहां सिद्दी समुदाय की पीढ़ियां रहती हैं. वहीं, टोलीचौकी का यह नया स्वरूप आधुनिक दौर में शिक्षा, व्यापार और चिकित्सा के जरिए इस पुराने रिश्ते को एक नए और वैश्विक मुकाम पर ले जा रहा है.



Source link