Bihar Daroga Candidate Protest: बिहार में 1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती को लेकर एक बार फिर बवाल बढ़ गया है.पटना में सोमवार को बड़ी संख्या में दारोगा अभ्यर्थी सड़क पर उतर आए. अभ्यर्थियों का गुस्सा उस फैसले को लेकर है जिसमें दारोगा भर्ती की मेंस परीक्षा रद्द कर दी गई है. अभ्यर्थियों का कहना है कि वे प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद मेंस परीक्षा पास कर चुके थे और करीब 10 हजार अभ्यर्थियों का रिजल्ट भी जारी हो चुका था.इसके बाद पिछले करीब चार महीने से वे शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं.अब मेंस परीक्षा रद्द होने से उन्हें अपना भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है.
इसी मांग को लेकर पिछले सात दिनों से गर्दनीबाग में धरना दे रहे अभ्यर्थियों ने सोमवार को बड़ा प्रदर्शन किया.सुबह से ही पटना में अभ्यर्थियों के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया.करीब 11:30 बजे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी गांधी मैदान से जेपी गोलंबर की ओर मार्च करने निकले.पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया.इसके बाद अभ्यर्थी बीच सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे. प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और बल प्रयोग किया.हालात को देखते हुए जेपी गोलंबर से डाकबंगला तक सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
बिहार दारोगा भर्ती को लेकर इतना बड़ा विवाद क्यों?
इस पूरे विवाद की शुरुआत दारोगा भर्ती की मेंस परीक्षा रद्द किए जाने से हुई है.यह भर्ती 1,799 दारोगा पदों के लिए हो रही है.अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने इस भर्ती के लिए लंबे समय तक मेहनत की.प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद वे मेंस परीक्षा में शामिल हुए और करीब 10 हजार अभ्यर्थियों का परिणाम जारी किया गया.अभ्यर्थियों के मुताबिक मेंस परीक्षा में सफल होने के बाद उनका अगला चरण शारीरिक दक्षता परीक्षा था. इसी उम्मीद में वे करीब चार महीने से फिजिकल परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं लेकिन इसी बीच मेंस परीक्षा रद्द कर दी गई. अभ्यर्थियों का कहना है कि इस फैसले ने उनकी अब तक की पूरी मेहनत और आगे की नौकरी की उम्मीद पर सवाल खड़ा कर दिया है.उनका सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब उन्होंने परीक्षा पास कर ली और अगली प्रक्रिया के लिए तैयारी कर रहे थे तो पूरी मेंस परीक्षा को रद्द करने की जरूरत क्यों पड़ी?
शिकायतों के आधार पर रद्द हुई परीक्षा
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुछ शिक्षा माफिया और छात्र नेताओं की शिकायतों के आधार पर बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने मेंस परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है.अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर परीक्षा के किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई थी तो उसकी जांच की जानी चाहिए थी. उनका तर्क है कि जांच के बाद जिन लोगों को दोषी पाया जाता उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करने से उन हजारों अभ्यर्थियों को भी नुकसान हो रहा है जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की थी.यही वजह है कि अभ्यर्थी परीक्षा रद्द करने के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.
चार महीने से फिजिकल की तैयारी
मेंस परीक्षा पास करने के बाद अभ्यर्थियों ने करीब चार महीने से शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी.उनका कहना है कि वे लगातार फिजिकल टेस्ट की तैयारी कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही अगली प्रक्रिया शुरू होगी.अब वे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं.अभ्यर्थियों की मांग है कि मेंस परीक्षा रद्द करने का आदेश वापस लिया जाए और शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीख जल्द जारी की जाए.उनका कहना है कि जितना ज्यादा समय इस मामले में लगेगा, उतनी ही उनकी परेशानी बढ़ती जाएगी.
उम्र निकलने का डर
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की चिंता सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि कई ऐसे अभ्यर्थी हैं जिनकी उम्र सीमा अब पार हो चुकी है या जल्द ही पार होने वाली है.ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में और देरी उनके लिए बड़ा नुकसान बन सकती है.अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि लंबे समय से तैयारी के दौरान परिवार आर्थिक मदद कर रहा था. मेंस परीक्षा पास होने के बाद घरवालों को उम्मीद थी कि अब नौकरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद परिवार भी निराश है और घर से आर्थिक मदद मिलना लगातार मुश्किल होता जा रहा है.यही वजह है कि अभ्यर्थी चाहते हैं कि सरकार और आयोग इस मामले पर जल्द फैसला लें.
गलती किसी और की तो सजा हमें क्यों?
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर परीक्षा में किसी एक केंद्र पर गड़बड़ी हुई है तो कार्रवाई उसी केंद्र और उससे जुड़े दोषियों के खिलाफ होनी चाहिए. पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करना उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है जिन्होंने बिना किसी गलती के परीक्षा पास की है.इसी बात को समझाने के लिए अभ्यर्थी चुनाव का उदाहरण भी दे रहे हैं. उनका कहना है कि अगर किसी एक या दो बूथ पर गड़बड़ी होती है तो पूरे राज्य का चुनाव रद्द नहीं किया जाता. संबंधित बूथ या क्षेत्र में जांच कर कार्रवाई की जाती है. उसी तरह अगर दारोगा भर्ती परीक्षा में कहीं गड़बड़ी हुई है तो उस जगह की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.अभ्यर्थियों का सवाल है कि गलती किसी और की होने पर उसकी सजा हमें क्यों दी जा रही है?
पटना में क्या हो रहा है?
सोमवार को अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन शुरू किया. सुबह से ही प्रदर्शन की तैयारी चल रही थी. अभ्यर्थियों के जुटने में कुछ समय लगा, लेकिन करीब 11:30 बजे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी गांधी मैदान से जेपी गोलंबर की तरफ मार्च करने निकल पड़े.अभ्यर्थियों का उद्देश्य मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखना है. मार्च के दौरान नारेबाजी हुई और कई जगह यातायात प्रभावित हुआ. सड़क पर प्रदर्शन के कारण आम लोगों को परेशानी हुई. स्कूली बसें भी जाम में फंसती नजर आईं.जेपी गोलंबर पहुंचने पर पुलिस ने अभ्यर्थियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग कर रखी थी. बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर मौजूद थे.इसके बाद भी अभ्यर्थी आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे और बाद में जेपी गोलंबर के पास बीच सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे.प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और बल प्रयोग किया. इससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई.
जेपी गोलंबर से डाकबंगला तक भारी बैरिकेडिंग
अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को देखते हुए पटना पुलिस और जिला प्रशासन ने जेपी गोलंबर से डाकबंगला चौराहे तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. दोनों स्थानों के बीच जगह-जगह बड़े बैरिकेड लगाए गए हैं.जेपी गोलंबर के आसपास बांस-बल्ले से तैयार बैरिकेडिंग को मोटी रस्सियों से मजबूत किया गया है. वहीं डाकबंगला चौराहे पर लोहे के बड़े बैरिकेड लगाए गए हैं.इसका मकसद प्रदर्शनकारियों के मार्च को नियंत्रित करना और उन्हें आगे बढ़ने से रोकना है.मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है.
सात दिन से गर्दनीबाग में चल रहा है धरना
यह प्रदर्शन अचानक शुरू नहीं हुआ है.दारोगा भर्ती के अभ्यर्थी पिछले सात दिनों से गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पर बैठे हैं.वे मेंस परीक्षा रद्द किए जाने के बाद भर्ती की आगे की प्रक्रिया शुरू करने और उसकी तारीख जारी करने की मांग कर रहे हैं.सोमवार को इसी धरने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने पटना में मार्च और प्रदर्शन का फैसला किया. प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी.
प्रशासन ने क्या कहा?
पटना जिला प्रशासन की ओर से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से अपील की जा रही है कि वे अपना एक प्रतिनिधिमंडल बनाकर सरकार से मिले और अपनी मांगें सामने रखें. प्रशासन का कहना है कि इस तरह सड़क पर धरना और प्रदर्शन करने से समस्या का समाधान नहीं होगा.प्रशासन ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.दूसरी तरफ अभ्यर्थियों का कहना है कि वे कई बार अपनी मांग सरकार और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा चुके हैं, लेकिन जब तक उनकी बात पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक उन्हें आंदोलन करना जरूरी लग रहा है.
अभ्यर्थी बिहार के अलग-अलग जिलों से पटना पहुंचे
दारोगा बनने का सपना लेकर बिहार के अलग-अलग जिलों से अभ्यर्थी पटना आकर तैयारी कर रहे हैं. कई अभ्यर्थियों ने लंबे समय तक पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में समय और पैसा लगाया है. मेंस परीक्षा पास करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण की ओर बढ़ेगी लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद उनका कहना है कि उनका पूरा भविष्य अधर में लटक गया है. उम्र सीमा निकलने और आर्थिक दबाव की चिंता भी उनके साथ जुड़ी हुई है इसीलिए वे चाहते हैं कि सरकार और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग इस मामले पर जल्द फैसला करें, ताकि उनकी मेहनत बेकार न जाए और भर्ती प्रक्रिया का रास्ता साफ हो सके.प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग मुख्यमंत्री से मुलाकात की है. वे चाहते हैं कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद मामले में हस्तक्षेप करें और मेंस परीक्षा रद्द करने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए.उनकी मांग है कि अगर परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी हुई थी तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन पूरी भर्ती में शामिल उन अभ्यर्थियों को नुकसान न पहुंचाया जाए जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की है.