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Begusarai News: बेगूसराय में दो भाइयों विनय और संजय कुमार ने अपने पिता पशुपति सिंह की याद में उनके पुराने स्कूल, राजकीय कृत मध्य विद्यालय, चेरिया बरियारपुर को ₹25,000 दान किए. यह शिक्षा के प्रति पिता की सोच को जीवित किया है. आइये जानते हैं दोनों भाइयों ने ये रकम दान क्यों की है.
बेगूसराय: जिस स्कूल की चौखट से पिता ने पढ़ाई शुरू की, उसी स्कूल को बेटों ने पिता की आखिरी याद बना दिया. बिहार के बेगूसराय में 2 भाइयों ने अपने पिता के निधन के बाद ऐसा कदम उठाया, जिसने शिक्षा, संस्कार और पिता के सपनों को एक साथ जोड़ उदाहरण पेश किया. हालांकि यह स्कूलों के प्रति सोच अंतिम संस्कार के बाद राशि डोनेट करना चेरिया बरियारपुर गांव के नई कहानी है, लेकिन बेगूसराय जिले से जोड़कर चर्चा की जाए तो ये एक अनोखी परंपरा का हिस्सा है. बेगूसराय में दो भाइयों यानी विनय कुमार और संजय कुमार ने मिलकर इस परंपरा की शुरुआत की है. आइये जानते हैं पूरी कहानी के बारे में.
बेटों ने शिक्षा के प्रति उनकी सोच को रखा जिंदा
बेगूसराय जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर चेरिया बरियारपुर प्रखंड सह गांव निवासी भवेश कुमार सिंह के पिता पशुपति सिंह का 28 अगस्त को निधन हो गया था. पशुपति सिंह NCC बिहार 9 बटालियन से रिटायर्ड थे, नौकरी से रिटायर होने के बाद उनका जीवन शिक्षा और समाजसेवा से और गहराई से जुड़ गया था. परिवार के मुताबिक, पशुपति सिंह शिक्षा को लेकर बेहद जागरूक थे.
वह चाहते थे कि बच्चे पढ़ें, आगे बढ़ें और समाज में शिक्षा की अहमियत को समझें. साथ ही जरूरतमंद लोगों की मदद करने में भी वह हमेशा आगे रहते थे. इधर पिता के निधन के बाद परिवार ने पूरे रीति-रिवाज निभाए. करीब 14 दिनों तक अंतिम संस्कार से जुड़े भोज-भात और दूसरे संस्कार चलते रहे. जब ये सभी जिम्मेदारियां पूरी हुईं, तब दोनों भाइयों के मन में पिता से जुड़ी एक पुरानी याद फिर ताजा हो गई.
जिस स्कूल ने पिता को पढ़ाया, उसी को दिया सम्मान
स्वर्गीय पशुपति सिंह ने बचपन में राजकीय कृत मध्य विद्यालय, चेरिया बरियारपुर से पढ़ाई की थी. उस दौर में गांव में प्राइवेट स्कूल जैसी व्यवस्था नहीं थी. यही सरकारी विद्यालय बच्चों की शिक्षा का सबसे बड़ा सहारा था. यहीं से पशुपति सिंह ने शिक्षा की पहली सीढ़ी चढ़ी. आगे चलकर उन्होंने सेना में नौकरी की और जीवन में अपनी पहचान बनाई. शायद यही वजह थी कि पिता के जाने के बाद उनके बेटों को सबसे पहले अपने पिता का वही स्कूल याद आया.
सरकारी स्कूल को डोनेट किया 25 हजार का चेक
भवेश और भूपेश कुमार सिंह ने आपसी सहमति से कुछ दिनों के बाद ₹25 हजार का चेक सरकारी विद्यालय के नाम कर दिया. भूपेश कुमार सिंह कहते हैं कि दोनों भाइयों ने मिलकर स्कूल को ₹25 हजार देने का निर्णय लिया .बेगूसराय की यह कहानी सिर्फ दो भाइयों के ₹25 हजार देने की कहानी नहीं है. यह उस रिश्ते की कहानी है, जो बेगूसराय की परंपरा के रूप में जिंदा है. कुछ वर्ष पहले यह अंतिम संस्कार के बाद डोनेट करने का रिवाज महानपुर स्कूल में चलता था, लेकिन अब चेरिया बरियारपुर गांव में भी शुरू हो गया है. जो सरकारी स्कूल को हाईटेक बनाने का काम सरकार और जिला प्रशासन शिक्षा विभाग का था. अब वह गांव वाले खुद से करते हुए जिम्मेदार को निभा रहे हैं.