हरीश रावत क्या उत्तराखंड में कांग्रेस के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं? ‘पार्टी लाइन पर चलने’ की बजाय ‘अब रुकना नहीं है’ कहते हुए आगे बढ़े

हरीश रावत क्या उत्तराखंड में कांग्रेस के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं? ‘पार्टी लाइन पर चलने’ की बजाय ‘अब रुकना नहीं है’ कहते हुए आगे बढ़े


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Harish Rawat News : बड़ा सवाल यही है कि क्या हरीश रावत पार्टी नेतृत्व की बात मानकर अपने कदम पीछे खींचेंगे या फिर अपने तरीके से राजनीतिक कार्यक्रम जारी रखेंगे? विधानसभा चुनाव से पहले इसका असर उत्तराखंड कांग्रेस की रणनीति और चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है. आइये जानते हैं इस रिपोर्ट में…

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हरीश रावत रुकने की बजाय अपने कार्यक्रमों पर आगे बढ़ गए हैं.

देहरादून : उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत क्या अपनी ही पार्टी के नेतृत्व से दो-दो हाथ करने की तैयारी में हैं? उत्तराखंड विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Chunav 2027) से कुछ महीने पहले पार्टी के भीतर उनके कार्यक्रमों को लेकर खींचतान तेज हो गई है. पार्टी नेतृत्व चाहता है कि रावत राज्यभर में अपने स्तर पर अलग से कार्यक्रम करने के बजाय संगठन के साथ मिलकर काम करें. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रविवार को हरीश रावत को दिल्ली बुलाया. पार्टी सूत्रों का कहना है कि रावत को साफ तौर पर अपनी राजनीतिक गतिविधियों पर लगाम लगाने और पार्टी के फैसलों के मुताबिक चलने को कहा गया है. लेकिन हरीश रावत रुकने की बजाय अपने कार्यक्रमों पर आगे बढ़ गए हैं. आइये जानते हैं इस रिपोर्ट में विस्‍तार से…

दरअसल, उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी और पार्टी की वरिष्ठ नेता कुमारी शैलजा ने हरीश रावत को एक चिट्ठी लिखी थी. इसकी कॉपी केसी वेणुगोपाल को भी भेजी गई थी. एक अक्टूबर की इस चिट्ठी में शैलजा ने रावत की यात्रा को लेकर सवाल उठाए थे. उन्होंने लिखा, आप राज्य में यात्रा कर रहे हैं. इस बारे में न तो मुझसे चर्चा की गई है और न ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से. शैलजा ने आगे कहा कि राज्य में विधानसभा चुनाव अगले कुछ महीनों में होने हैं. ऐसे में पार्टी को एकजुट होकर चुनाव लड़ना होगा और जनता के सामने एकजुटता दिखानी होगी.

लेकिन पार्टी नेतृत्व की इस नसीहत का हरीश रावत पर फिलहाल कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है. रावत सोमवार से ऊधम सिंह नगर जिले में अपने कार्यक्रमों के दूसरे चरण की शुरुआत कर रहे हैं. यह जिला उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है. रावत ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपने कार्यक्रम जारी रखने का संदेश दिया. उन्होंने लिखा, ‘दोस्तों, चुनौती बड़ी है, लेकिन उत्तराखंड के मान-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा का हमारा संकल्प भी उतना ही मजबूत है. धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा के इस चरण में अब रुकना नहीं है.’ उन्होंने आगे लिखा, ‘आज जसपुर से हल्द्वानी तक लोगों से संवाद करेंगे और देवभूमि के हक की लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे. आइए, इस अभियान में साथ चलें.’

कांग्रेस नेतृत्व के लिए नई चुनौती
पार्टी नेतृत्व की आपत्तियों के बीच रावत का अपने कार्यक्रम जारी रखना बताता है कि उत्तराखंड कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. चुनाव से पहले पार्टी के भीतर यह खींचतान कांग्रेस नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकती है.

हरीश रावत पिछले महीने करीब 2 महीने के इलाज और आराम के बाद देहरादून लौटे थे. इस दौरान वह राज्य की राजनीति से दूर रहे. इसी बीच, साल 2016 के एक कथित भर्ती घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके एक करीबी सहयोगी के खिलाफ मामला दर्ज किया. हाल ही में रावत अपने समर्थकों और अपनी मां की एक तस्वीर के साथ ईडी कार्यालय पहुंचे थे, जहां उनसे कई घंटे तक पूछताछ हुई.

उत्तराखंड की कांग्रेस की राजनीति को करीब से जानने वाले लोगों का मानना है कि पार्टी के लिए हरीश रावत को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा. राज्य में कांग्रेस के कई नेता ऐसे हैं, जिन्होंने रावत के साथ काम करते हुए राजनीति सीखी या उनके नेतृत्व में अपनी पहचान बनाई. ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती है. एक तरफ उसे पार्टी में एकजुटता बनाए रखनी है, तो दूसरी तरफ हरीश रावत जैसे अनुभवी और प्रभावशाली नेता को नाराज करने से भी बचना है.



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