Ambedkar University Delhi: आंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली (Ambedkar University Delhi, AUD) में PhD स्कॉलर्स की अटेंडेंस को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है. छात्रों के विरोध के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने फेलोशिप पाने वाले फुल-टाइम PhD स्कॉलर्स के लिए जारी अटेंडेंस गाइडलाइन में बदलाव कर दिया है. विश्वविद्यालय ने30 सितंबर को नया ऑफिस ऑर्डर जारी करते हुए 31 जुलाई के आदेश को बदल दिया है.नए दिशा-निर्देशों में रिसर्च स्कॉलर्स को पहले की तुलना में ज्यादा लचीलापन दिया गया है, लेकिन उनके लिए कोर्सवर्क, सेमिनार में भाग लेना, अकादमिक गतिविधियों से जुड़े रहना और रिसर्च में प्रगति बनाए रखना जरूरी होगा.यह पूरा मामला सिर्फ अटेंडेंस तक सीमित नहीं रहा. इसके साथ कैंपस में प्रवेश, सुविधाओं के इस्तेमाल, विरोध-प्रदर्शन की जगह और एक प्रदर्शनकारी छात्र की मेडिकल मदद को लेकर भी छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच विवाद सामने आया है.
31 जुलाई के आदेश में क्या था?
आंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली ने इससे पहले31 जुलाई को एक ऑफिस नोटिफिकेशन जारी किया था.इसमें फेलोशिप हासिल करने वाले फुल-टाइम PhD स्कॉलर्स के लिए अटेंडेंस से जुड़ी शर्तें लागू की गई थीं.इस आदेश के बाद रिसर्च स्कॉलर्स के बीच चिंता बढ़ी. छात्रों को आशंका थी कि अटेंडेंस से जुड़ी इन शर्तों के कारण उनकी अकादमिक और रिसर्च से जुड़ी गतिविधियों पर प्रतिबंध लग सकता है. इसी मुद्दे को लेकर विश्वविद्यालय के छात्रों ने विरोध शुरू किया और मामला धीरे-धीरे बड़े छात्र आंदोलन में बदल गया.
30 सितंबर को विश्वविद्यालय ने बदली गाइडलाइन
विवाद के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने30 सितंबर को संशोधित ऑफिस ऑर्डर जारी किया.इसमें साफ किया गया कि नया आदेश 31 जुलाई को जारी किए गए ऑफिस ऑर्डर की जगह लागू होगा. नए दिशा-निर्देशों में फुल-टाइम PhD स्कॉलर्स जो फेलोशिप प्राप्त कर रहे हैं के लिए पहले की तुलना में ज्यादा लचीलापन रखा गया है हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि स्कॉलर्स को अकादमिक गतिविधियों से पूरी तरह छूट मिल गई है.उन्हें कोर्सवर्क और सेमिनार में हिस्सा लेना होगा.इसके अलावा उन्हें विश्वविद्यालय की अकादमिक गतिविधियों से जुड़े रहना और अपने रिसर्च वर्क में लगातार प्रगति बनाए रखना होगा.
PhD स्कॉलर की अटेंडेंस कौन रिकॉर्ड करेगा?
विश्वविद्यालय के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार PhD स्कॉलर्स की अटेंडेंस का रिकॉर्ड रिसर्च सुपरवाइजर और प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर रखेंगे.इसके बाद संबंधित स्कूल केडीन की ओर से इन रिकॉर्ड्स का सत्यापन किया जाएगा.रिसर्च सुपरवाइजर की जिम्मेदारी सिर्फ अटेंडेंस रिकॉर्ड रखने तक सीमित नहीं होगी. उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्कॉलर अकादमिक गतिविधियों में संतोषजनक रूप से भाग ले रहा है और उसके रिसर्च वर्क में उचित प्रगति हो रही है. यह काम संबंधित स्कूल के डीन के समग्र मार्गदर्शन में किया जाएगा.
गाइडलाइन का मकसद रिसर्च सिस्टम मजबूत करना
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये दिशा-निर्देश पूरी तरह अकादमिक प्रकृति के हैं. प्रशासन के अनुसार ये UGC के नियमों और दूसरे केंद्रीय व राज्य विश्वविद्यालयों में अपनाई जाने वाली प्रथाओं के अनुरूप हैं.विश्वविद्यालय ने कहा कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य PhD स्कॉलर्स पर अनावश्यक रोक लगाना नहीं, बल्कि रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत करना और रिसर्च स्कॉलर्स की अकादमिक व रिसर्च गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करना है.प्रशासन का कहना है कि PhD स्कॉलर्स का अकादमिक जुड़ाव बना रहना और उनके रिसर्च वर्क में लगातार प्रगति होना जरूरी है.
अटेंडेंस के मुद्दे पर AISA का सप्ताहभर चला विरोध
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब विश्वविद्यालय में All India Students’ Association (AISA) से जुड़े छात्रों का अटेंडेंस के मुद्दे पर करीब एक सप्ताह से विरोध चल रहा था.छात्रों की मांग केवल PhD अटेंडेंस गाइडलाइन तक सीमित नहीं थी. विरोध के दौरान कैंपस पर प्रतिबंध, सुविधाओं तक पहुंच और अन्य मांगों को भी उठाया गया.छात्र संगठन का कहना था कि विश्वविद्यालय की ओर से लगाए गए कुछ प्रतिबंधों का छात्रों की पढ़ाई और कैंपस में उनकी गतिविधियों पर असर पड़ रहा है.
शुक्रवार देर रात क्या हुआ?
विरोध के दौरान शुक्रवार देर रात स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा कर्मचारियों ने खाने और पानी को अंदर लाने से रोक दिया.प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि रात करीब 3 बजे एक छात्र के बेहोश होकर गिरने के बाद उसे मेडिकल सुविधा के लिए बाहर ले जाने में देरी हुई हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों के बीच कहा कि उसकी मेडिकल टीम लगातार प्रदर्शन कर रहे छात्रों के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही थी और जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध करा रही थी.इस मामले को लेकर छात्रों और प्रशासन के दावों में अंतर सामने आया है.
कैंपस में छात्रों की एंट्री को लेकर भी विवाद
AISA ने आरोप लगाया कि इसके बाद छात्रों को कैंपस में प्रवेश करने से भी रोका गया.संगठन के अनुसार इसका असर उन छात्रों पर पड़ा जो कक्षाओं और परीक्षाओं में शामिल होने के लिए कैंपस आ रहे थे.वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि लाइब्रेरी, लैबोरेटरी और कुछ अन्य ब्लॉकमेंटेनेंस और सुरक्षा कारणों से बंद किए गए थे. प्रशासन के अनुसार छात्रों को इन बंद किए जाने की जानकारी पहले ही दे दी गई थी.इस तरह कैंपस में छात्रों की आवाजाही को लेकर भी दोनों पक्षों की अलग-अलग बातें सामने आईं.
विश्वविद्यालय ने कहा- प्रदर्शन बिना अनुमति के चल रहा था
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना बिना पूर्व अनुमति के आयोजित किया जा रहा था.प्रशासन ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के लिए एक निर्धारित जगह उपलब्ध कराई गई थी. विश्वविद्यालय का यह भी आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने सुरक्षा गार्डों के साथ हाथापाई की.प्रशासन ने कहा कि इस मामले की जानकारी दिल्ली पुलिस को दे दी गई है.
AISA की क्या हैं प्रमुख मांगें?
वहीं AISA ने अपनी मांगों में कई मुद्दे शामिल किए हैं. संगठन की प्रमुख मांगों में कैंपस में लगाए गए भौतिक अवरोधों को हटाना, कैंपस में लोकतांत्रिक माहौल बहाल करना, कथित तौर पर इमरजेंसी मेडिकल एक्सेस में रुकावट की जवाबदेही तय करना और सभी रजिस्टर्ड छात्रों के लिए बिना रोक-टोक कैंपस में प्रवेश शामिल है यानी छात्रों का विरोध केवल PhD अटेंडेंस के नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि कैंपस के संचालन और छात्रों की सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए हैं.