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Cotton Candy Business: बिलासपुर के नंद कुमार निर्मलकर 10-11 साल की उम्र से बंबई मिठाई बेच रहे हैं. साइकिल पर मिठाई बेचकर उन्होंने परिवार का पालन-पोषण किया और घर-खेत बनाया. रोजाना करीब 1000 रुपये तक का कारोबार हो जाता है. बच्चे भी पढ़ाई के साथ खाली समय में इस काम में उनका हाथ बंटाते हैं.
Cotton Candy Business: शहर के कंपनी गार्डन के पास शाम होते ही एक साइकिल पर लटके रंग-बिरंगे डिब्बे लोगों का ध्यान खींचते हैं. साइकिल के साथ खड़े नंद कुमार निर्मलकर शक्कर और फ्लेवर से तैयार होने वाली बंबई मिठाई यानी कॉटन कैंडी बेचते नजर आते हैं. कोई इसे हवाई मिठाई कहता है तो कोई गुलाब लच्छी के नाम से जानता है. लेकिन नंद कुमार के लिए यह सिर्फ मिठाई बेचने का काम नहीं, बल्कि उनकी पूरी जिंदगी और परिवार की रोजी-रोटी का जरिया है.
नंद कुमार बताते हैं कि उन्होंने महज 10-11 साल की उम्र से यह काम शुरू कर दिया था. बचपन से इसी छोटे से कारोबार को करते-करते उन्होंने अपने परिवार का पालन-पोषण किया. इसी कमाई से घर बनाया, जमीन खरीदी और खेती भी शुरू की. आज भी वह रोज शाम को साइकिल से कंपनी गार्डन के पास पहुंचते हैं और लोगों को बंबई मिठाई बेचते हैं.
शक्कर और फ्लेवर से तैयार होती है बंबई मिठाई
नंद कुमार के मुताबिक बंबई मिठाई बनाने के लिए मुख्य रूप से शक्कर, फ्लेवर और खाने वाले रंगों का इस्तेमाल किया जाता है. अलग-अलग फ्लेवर और रंग मिलाकर इसे तैयार किया जाता है. इसके लिए वह चिमनी वाली मशीन का इस्तेमाल करते हैं. उनके अनुसार इलेक्ट्रिक मशीन भी बाजार में आ गई है, लेकिन चिमनी वाली मशीन से काम करना उन्हें ज्यादा सुविधाजनक लगता है.
एक किलो शक्कर से तैयार होती है करीब 650-700 रुपये की मिठाई
नंद कुमार बताते हैं कि करीब एक किलो शक्कर से बंबई मिठाई तैयार करने में लगभग एक से सवा घंटे का समय लगता है. एक किलो शक्कर से लगभग 650 से 700 रुपये तक की मिठाई तैयार हो जाती है. रोजाना वह करीब 100 से 120 पीस 10 रुपये वाली मिठाई लेकर आते हैं, जबकि 20 रुपये वाले पैक भी बड़ी संख्या में तैयार रखते हैं. बिक्री के हिसाब से रोजाना करीब 1000 रुपये तक का कारोबार हो जाता है.
कम लागत में शुरू किया जा सकता है रोजगार
नंद कुमार का कहना है कि इस काम को शुरू करने के लिए बहुत बड़े निवेश की जरूरत नहीं है. गरीब परिवार का व्यक्ति भी कम लागत में इसे शुरू करके अपना रोजगार चला सकता है. उनका मानना है कि बच्चों के लिए भी यह काम खाली समय में जेब खर्च निकालने का जरिया बन सकता है.
पढ़ाई के साथ बच्चे भी करते हैं बंबई मिठाई का काम
नंद कुमार अपने बच्चों को भी इस काम से जोड़ रहे हैं. उनके दो बच्चे स्कूल से आने के बाद खाली समय में करीब एक-दो घंटे बंबई मिठाई बेचने में उनकी मदद करते हैं. वह बताते हैं कि बच्चे पढ़ाई के साथ काम भी सीख रहे हैं और अपना जेब खर्च भी निकाल लेते हैं. बड़ा बेटा 12वीं में पढ़ रहा है, जबकि दूसरे बच्चे भी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं.
मेहनत से बदली जिंदगी, अब बच्चों को भी सिखा रहे आत्मनिर्भरता
नंद कुमार कहते हैं कि उन्होंने बचपन से इस काम को मेहनत और लगन के साथ किया. इसी कमाई से उन्होंने अपना घर बनाया और जमीन लेकर खेती शुरू की. उनके लिए बंबई मिठाई सिर्फ एक छोटा कारोबार नहीं, बल्कि परिवार को आगे बढ़ाने का माध्यम है. वह चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ाई के साथ मेहनत और रोजगार की अहमियत भी समझें.