धान में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट का कहर, एक्सपर्ट से जानें बचाव के 4 अचूक उपाय
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धान की फसल में ‘बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट’ रोग से बड़ा नुकसान हो सकता है. यह बीमारी पत्ती के किनारे से शुरू होकर पूरे पौधे को सुखा देती है. इससे बचाव के लिए ICAR ने प्रतिरोधी किस्में चुनने, जल प्रबंधन, संतुलित यूरिया प्रयोग और खेत की सफाई जैसे 4 अचूक उपाय सुझाए हैं.
दरभंगा: खरीफ में धान की पैदावार स्थानीय किसानों के द्वारा बृहद पैमाने पर की जाती है. धान की फसल आर्थिक तौर पर किसानों को मजबूत भी करती है. लेकिन कई बार ऐसा देखा गया है कि कुछ ऐसी बीमारियां होती है जिससे किसान सही समय पर नहीं परख पाते हैं. जिस वजह से उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है इस पर विशेष जानकारी देते हुए. धान सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है. ऐसे में धान की बीमारियां केवल किसान की नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौती बन जाती हैं. इन्हीं में सबसे खतरनाक है बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट.
इस विषय पर विशेष जानकारी देते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट पैथोलॉजी एवं नेमेटोलॉजी के प्रोफेसर सह मुख्य वैज्ञानिक (पादप रोग) डॉ. एस. के. सिंह ने बताया कि इस रोग का कारण जीवाणु Xanthomonas oryzae pv. oryzae है. अनुकूल मौसम में यह तेजी से फैलकर पत्तियों की प्रकाश-संश्लेषण क्षमता घटा देता है और दाना भरने की प्रक्रिया रोक देता है.
पहचान कैसे करें?
इसकी शुरुआत पत्ती के किनारे या सिरे से पानी से भीगे हुए हल्के पीले धब्बों से होती है. बाद में ये धब्बे लंबी पीली-भूरी धारियों में बदल जाते हैं और पूरी पत्ती सूख जाती है. सुबह के समय संक्रमित पत्ती पर पीले-सफेद जीवाणु की बूंदें दिखना इसकी पुख्ता पहचान है. छोटी अवस्था में इसे क्रेसेक कहा जाता है, जिसमें पूरा पौधा मुरझा कर सूख जाता है. कई बार इसके लक्षण जिंक की कमी जैसे लगते हैं, इसलिए सही पहचान जरूरी है.
रोग कब फैलता है?
गर्म, नम और लगातार बारिश का मौसम, खेत में ज्यादा पानी, घनी बुवाई और अधिक यूरिया का प्रयोग इस रोग को बढ़ाता है. तेज हवा और बारिश से यह एक पौधे से दूसरे पौधे में फैलता है. ICAR की सलाह है कि रोग दिखते ही यूरिया की टॉप ड्रेसिंग रोक दें.
बचाव के 4 सूत्र:
- प्रतिरोधी किस्म: DRR Dhan 53 और DRR Dhan 62 जैसी BLB प्रतिरोधी किस्में लगाएं.
- जल प्रबंधन: खेत में अतिरिक्त पानी न जमा होने दें.
- संतुलित पोषण: नाइट्रोजन को विभाजित मात्रा में दें और पोटाश का प्रयोग मिट्टी जांच के आधार पर करें. लीफ कलर चार्ट का उपयोग करें.
- खेत की सफाई: संक्रमित अवशेष और खरपतवार को हटाएं.
डॉ. सिंह कहते हैं कि यह जीवाणु रोग है, इसलिए सामान्य फफूंदनाशक काम नहीं करते. एंटीबायोटिक का अंधाधुंध प्रयोग न करें, हमेशा लेबल और कृषि विभाग की सलाह मानें.