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12वीं पास और 18 वर्ष के युवा एयरलाइंस में केबिन क्रू के रूप में करियर बना सकते हैं. 4 महीने की ट्रेनिंग के बाद मिलने वाली इस जॉब में 35,000 फीट की ऊंचाई पर यात्रियों की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी होती है. भारत में शुरुआती सैलरी ₹50,000 से ₹60,000 के बीच मिलती है.
नई दिल्ली: देश-विदेश की एयरलाइंस में केबिन क्रू बनकर उड़ने का सपना कई युवा देखते हैं. लेकिन इस ग्लैमरस जॉब के पीछे बड़ी जिम्मेदारी और कड़ी मेहनत होती है. 2006 से 2021 तक केबिन क्रू और सेफ्टी ट्रेनर रह चुकीं संगीता भगत ने इस करियर से जुड़ी तमाम अहम जानकारियां साझा की हैं.
केबिन क्रू की मुख्य जिम्मेदारियां
35,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते विमान में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा की पूरी जिम्मेदारी केबिन क्रू की होती है. मेडिकल इमरजेंसी के दौरान प्राथमिक उपचार देना, हार्ट अटैक आने पर सीपीआर (CPR) देना, बच्चे के जन्म से लेकर चोट लगने पर खून रोकने तक का काम केबिन क्रू ही संभालते हैं.
योग्यता और शारीरिक मानक
केबिन क्रू बनने के लिए न्यूनतम योग्यता और मापदंड इस प्रकार हैं:
- शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार का 12वीं पास होना जरूरी है.
- उम्र सीमा: न्यूनतम उम्र 18 साल होनी चाहिए .मेडिकली फिट रहने पर 50 साल की उम्र तक काम किया जा सकता है.
- भाषा ज्ञान: हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ होना अनिवार्य है.
- लंबाई: लड़कियों की न्यूनतम लंबाई 155 सेंटीमीटर होनी चाहिए. यह मानक इसलिए है ताकि वे ऊपर रखे मेडिकल इमरजेंसी उपकरणों तक आसानी से पहुंच सकें.
- अन्य नियम: शरीर पर कोई टैटू या कट का निशान नहीं होना चाहिए. हर साल फुल बॉडी चेकअप कराना जरूरी होता है.
चयन प्रक्रिया और ट्रेनिंग
उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा और इंटरव्यू पास करना होता है. इसके बाद 4 महीने की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है. इसमें सुरक्षा, इमरजेंसी लैंडिंग और फर्स्ट एड जैसी जरूरी चीजें सिखाई जाती हैं.
सैलरी और सुविधाएं
भारत में केबिन क्रू की शुरुआती सैलरी आमतौर पर 50,000 रुपये से 60,000 रुपये प्रति महीना होती है. सैलरी उड़ान के घंटों और एयरलाइंस पर निर्भर करती है. इसके अलावा मेडिकल बीमा, ट्रैवलिंग और यात्रा के दौरान रहने-खाने का पूरा खर्च एयरलाइंस कंपनी ही उठाती है.