Slum Area Increase: भोपाल में झुग्गी बस्तियों का विस्तार अब सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है. शहर की कई झुग्गियों में मकान अब एक मंजिल से बढ़कर दो और तीन मंजिल तक पहुंच गए हैं. शहर में करीब 388 झुग्गी बस्तियां हैं, जिनमें 1.56 लाख से ज्यादा परिवार रहते हैं. क्लस्टर आधारित आकलन के अनुसार, करीब 52 % झुग्गी आवास अब जी+1 से जी+3 तक बन चुके हैं.
जमीन पर भी झुग्गियों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. 2010 से 2026 के बीच बाणगंगा, अरेरा हिल्स-वल्लभ भवन और अन्ना नगर के तीन बड़े क्लस्टरों का कुल क्षेत्रफल 113.5 एकड़ से बढ़कर 164.4 एकड़ हो गया. यानी करीब 44.8% की बढ़ोतरी हुई. पूरे भोपाल में करीब 2,000 एकड़ जमीन पर झुग्गियों का फैलाव माना जा रहा है. इसमें लगभग 75% जमीन सरकारी है.
2 से 4 फीट की गलियों में बने बहुमंजिला मकान
कई पुरानी बस्तियों में गलियां सिर्फ 2 से 4 फीट चौड़ी हैं. इसके बावजूद यहां दो और तीन मंजिल के मकान बन गए हैं. कई घरों को मूल रूप से एक मंजिल के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में उनकी छतों और दीवारों पर अतिरिक्त मंजिलें जोड़ दी गईं. इससे मकानों की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं. आग, बीमारी या किसी दूसरी आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और पुलिस वाहन इन गलियों के अंदर तक नहीं पहुंच पाते. वहीं, परिवारों की संख्या बढ़ने के बावजूद पानी, नाली और सीवरेज जैसी सुविधाएं लगभग पहले जैसी ही हैं.
रोजगार शहर में, पुनर्वास बाहर
कोकता और भानपुर जैसे इलाकों में कई परिवारों का पुनर्वास किया गया, लेकिन उनका रोजगार अब भी शहर के पुराने हिस्सों में बना रहा. आने-जाने का खर्च और समय बढ़ने के कारण कुछ परिवार पुनर्वास वाले मकान किराए पर देकर या बेचकर वापस शहर की झुग्गियों में लौट आए. दूसरी ओर, रोजगार की तलाश में आने वाले नए मजदूरों को सस्ता किराए का मकान नहीं मिलता है. इससे नई झुग्गियां लगातार बन रही हैं.
तीन बड़े क्लस्टरों में तेज विस्तार
बाणगंगा की बस्ती 2010 में करीब 52 एकड़ में थी, जो अब 68.3 एकड़ हो गई है. अरेरा हिल्स-वल्लभ भवन क्षेत्र करीब 40 से बढ़कर 60.3 एकड़ हो गया. वहीं, अन्ना नगर में क्षेत्रफल 21.5 से बढ़कर 35.8 एकड़ हो गया, जो करीब 66.5 प्रतिशत वृद्धि है. इन इलाकों में जी+1 और जी+2 निर्माण तेजी से बढ़ रहा है.
इंदौर और ग्वालियर में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है. इंदौर में पिछले 40 सालों में झुग्गी और ईडब्ल्यूएस योजनाओं पर करीब 1,250 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद झुग्गी बस्तियों की संख्या 120 से बढ़कर करीब 600 हो गई. ग्वालियर में करीब 850 करोड़ रुपये की योजनाओं के बावजूद बस्तियां 70 से बढ़कर 195 हो गई हैं.