Pitru Paksha: दो साल तक बड़ी बहन ने गोद में खेलाया था, उसी का पिंडदान करने भोपाल से गया पहुंचा 8 साल का ऋषभ

Pitru Paksha: दो साल तक बड़ी बहन ने गोद में खेलाया था, उसी का पिंडदान करने भोपाल से गया पहुंचा 8 साल का ऋषभ


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दो साल तक बड़ी बहन ने गोद में खेलाया था, उसी का पिंडदान करने गया पहुंचा ऋषभ

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पितृपक्ष में पिंडदान करने भोपाल से गयाजी पहुंचे 8 साल के ऋषभ की कहानी भावुक करने वाली है. कोरोना में अपनी बड़ी बहन को खोने वाले ऋषभ तब सिर्फ दो साल के थे. तीर्थ पुरोहितों के निर्देश पर ऋषभ ने अपनी बहन का पिंडदान किया. इससे उनके परिवार को आत्मिक शांति मिली.

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गयाजीः बिहार के गयाजी में इन दिनों पितृपक्ष महासंगम चल रहा है. जिसमें देश-विदेश के तीर्थ यात्री यहां पहुंचकर अपने पितरों का पिंडदान कर रहे हैं. पिंडदान के दौरान कई भावुक करने वाली तस्वीरें भी सामने आ रही है. जिसमें एक तस्वीर 8 साल के नन्हे बालक ऋषभ की है. ऋषभ मूल रूप से भोपाल के रहने वाले हैं और अपने माता-पिता के साथ गयाजी पहुंचकर अपनी बड़ी बहन का पिंडदान कर रहे हैं.

6 साल पूर्व अपनी बड़ी बहन के गोद में खेलने वाले ऋषभ को उन दिनों यह नहीं पता था कि वह अपनी बड़ी बहन के गोद में आखिरी बार खेल रहा है. उन दिनों कोरोना महामारी पूरे विश्व में पांव पसार चुका था और उसी के चपेट में ऋषभ की बड़ी बहन आ गई और वायरस के कारण निधन हो गया. बडी बहन के गोद में खेलने वाले ऋषभ आज अपनी दीदी का पिंडदान करने गयाजी पहुंचे हैं.

5 साल बड़ी बहन का पिंडदान
देवघाट पर ऋषभ अपने से 5 साल बड़ी बहन का पिंडदान गया जी के तीर्थ पुरोहित की देखरेख में कर रहे हैं. देवघाट के बाद इन्होंने विष्णुपद और अक्षय वट में भी अपनी बड़ी बहन का पिंडदान किया. पिंडदान करते समय ऋषभ भावुक थे. ऋषभ बताते हैं कि वह काफी छोटे थे और दीदी का चेहरा तक इन्हें याद नहीं है. उनका निधन कैसे हुआ यह भी पता नहीं.

हालांकि ऋषभ के पिता अजय कुमार सोनी ने बताया कि ऋषभ की बड़ी बहन जो घर की इकलौती लड़की थी. 6 साल पूर्व कोरोना के कारण निधन हो गया था. पुरोहित के अनुसार पिंडदान करने का अधिकार बेटी से छोटे लड़के को था. इसीलिए ऋषभ अपनी बड़ी बहन का पिंडदान कर रहा है. अजय कुमार सोनी बताते हैं कि बेटी को खोने के दर्द तो ताउम्र रहेगा. गयाजी आकर उसका पिंडदान करा रहा हूं. जो मन को संतुष्टि दे रहा है.

ऋषभ तब दो साल का था, बहन का चेहरा तक याद नहीं
ऋषभ को सही से अपनी बहन का चेहरा याद भी नहीं है. उन दिनों ऋषभ 1.5 से 2 साल का था और सही से अपने पैरों पर चलना भी नहीं सीखा था. इनकी बड़ी बहन बड़े प्यार से इन्हें गोद लेकर खेलाते थे. लेकिन अचानक कोरोना महामारी के चपेट में आने से वह अपने 2 साल के छोटे भाई और मां पिता को छोड़कर इस दुनिया से दूर हो गई.



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