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Mittali Sethi IAS Story: महाराष्ट्र के नंदुरबार की कलेक्टर आईएएस मिताली सेठी चर्चा में हैं. डेंटिस्ट से आईएएस अफसर बनीं मिताली सेठी ने अपने जुड़वां बच्चों को महंगे स्कूल के बजाय सरकारी आंगनवाड़ी में भेजा है. जानिए आईएएस मिताली सेठी कौन हैं, उनकी यूपीएससी में रैंक क्या थी और उन्होंने बच्चों को आंगनवाड़ी क्यों भेजा.
Mittali Sethi IAS Story: आईएएस मिताली सेठी अपने जुड़वां बच्चों को आंगनवाड़ी में पढ़ा रही हैं
नई दिल्ली (Mittali Sethi IAS). देश के सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक पद यानी आईएएस की कुर्सी पर बैठने वाले अधिकारी अक्सर अपने बच्चों को इंटरनेशनल स्कूल, कॉन्वेंट संस्थान या नामी प्राइवेट बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाते हैं. आम जनता के मन में धारणा होती है कि बड़े अफसर के बच्चे लग्जरी लाइफ और VIP माहौल में ही पढ़ाई करते होंगे. इस लीक से हटकर फैसला लेने वाले अधिकारी चर्चा का विषय बन जाते हैं. नंदुरबार की महिला कलेक्टर मिताली सेठी ने अपने बच्चों को आंगनवाड़ी भेजकर मिसाल रच दी है.
आंगनवाड़ी की ‘झोली’ ने बदल दिया महिला कलेक्टर का नजरिया
आईएएस अफसर को सरकारी आंगनवाड़ी में क्या खास दिख गया? इसकी बेहद दिलचस्प कहानी है. बच्चों के दाखिले से पहले मिताली सेठी ने वहां का मुआयना किया था. उन्होंने देखा कि बच्चों का वजन तौलने के लिए झोली का इस्तेमाल किया जाता था. कई बच्चे उसमें असहज होकर रोने लगते थे. तब वहां की आंगनवाड़ी वर्कर ने दर्जी से ऐसी झोली तैयार करवाई, जिसमें बच्चे हंसते-खेलते बैठ सकें. उस वर्कर ने मिताली से कहा कि इसके लिए सरकारी टेंडर या कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं है, वे यह सेवाभाव से करेंगी.
आंगनवाड़ी वर्कर से इंप्रेस हो गईं आईएएस मिताली सेठी
इस छोटी सी घटना ने मिताली सेठी का दिल छू लिया. उन्हें महसूस हुआ कि किताबें रटने या महंगे विज्ञापनों से ज्यादा जरूरी है कि बच्चों को अपनों जैसा प्यार मिले. परिवार और रिश्तेदारों के शुरुआती विरोध और शक के बावजूद आईएएस मिताली सेठी अपने फैसले पर अडिग रहीं. अब उनके बच्चे 4 साल के हो चुके हैं और वे गर्व से आंगनवाड़ी जा रहे हैं. उनका मानना है कि शुरुआती उम्र में बच्चों को किताबी ज्ञान से ज्यादा मानवीय संवेदनाएं और आस-पास के माहौल से जुड़ना सीखना चाहिए.
आईएएस मिताली सेठी कौन हैं और उनका बैकग्राउंड क्या है?
यूपीएससी में मिली 56वीं रैंक
वक्त के साथ उनके अंदर देश और समाज के लिए कुछ बड़ा करने की इच्छा जागी. उन्होंने मेडिकल प्रैक्टिस छोड़कर सिविल सेवा का रुख किया. शुरुआती 2 प्रयासों में फेल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. साल 2017 के यूपीएससी एग्जाम में उन्होंने 56वीं रैंक हासिल की. वर्तमान में वह महाराष्ट्र कैडर की तेजतर्रार और संवेदनशील आईएएस अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं. उनके पति भी प्रशासनिक सेवा से जुड़े हुए हैं. यह परिवार अपनी सादगी और जमीनी फैसलों के लिए जाना जाता है.