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बिहार में नीतीश सरकार के समय से ही शराब बंदी लागू है. इसके बाद भी राज्य में आए दिन शराब पकड़ी जाती है. विभिन्न कार्रवाईयों में पकड़ी गई इन शराब को नष्ट कर दिया जाता है. इस पर जीतन राम मांझी ने कहा कि जब्त शराब को नष्ट करने की जगह इसे सैनेटाइजर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाए. उन्होंने कहा कि…
पटना: बिहार में शराबबंदी के बावजूद आए दिन कहीं न कहीं से अवैध शराब बरामद होती रहती है. शराब तस्करी और शराब बरामदगी की खबरें लगातार सुर्खियों में बनी रहती हैं. कई बार कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध शराब जब्त भी की जाती है. बाद में जब्त की गई इन शराब को नियमों के तहत नष्ट कर दिया जाता है. अब इसी जब्त शराब के सदुपयोग को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने गया में एक नया सुझाव दिया है.
मांझी का कहना है कि जब्त की गई शराब को सीधे नष्ट करने के बजाय, यदि सुरक्षित और कानूनी प्रक्रिया के तहत इसे एक जगह संग्रहित कर इसका उपयोग सैनिटाइजर समेत दूसरे औद्योगिक उत्पाद बनाने में किया जा सके, तो इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है और राजस्व की बचत भी संभव है.
मांझी ने कहा कि बिहार में बड़ी मात्रा में शराब पकड़ी जाती है और बाद में उसे नष्ट कर दिया जाता है. ऐसे में उनका सुझाव है कि जब्त शराब को एक जगह सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाए और विशेषज्ञों की निगरानी में इसका उपयोग सैनिटाइजर सहित दूसरे उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जाए.
उनका तर्क है कि अगर बड़ी मात्रा में जब्त शराब का तकनीकी और सुरक्षित तरीके से सदुपयोग संभव हो, तो उसे पूरी तरह नष्ट करके नुकसान करने के बजाय उससे राज्य को आर्थिक लाभ दिलाने की दिशा में विचार किया जा सकता है.
आपको बता दें कि जीतन राम मांझी उन नेताओं में हैं जो बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग करते रहे हैं. मांझी यह भी आरोप लगा चुके हैं कि इस कानून के तहत मुख्य रूप से गरीबों और कमजोर वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जाता है, जबकि बड़े अपराधी और शराब माफिया आसानी से बच निकलते हैं.
मांझी शराबबंदी के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कानून के क्रियान्वयन की समीक्षा की मांग भी करते रहे हैं. वह विशेष रूप से गरीब और वंचित तबके पर पड़ने वाले कानूनी प्रभाव का मुद्दा उठाते रहे हैं.