कोडरमा: झारखंड के कोडरमा जिले के जयनगर प्रखंड के डंडाहीह गांव की रहने वाली अश्विनी चंद्रवंशी इन दिनों अपनी अंग्रेजी पढ़ाने की अनोखी शैली को लेकर चर्चा में हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति भले ही मजबूत नहीं रही, लेकिन अश्विनी ने सीमित संसाधनों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी. अब उसी ज्ञान को गांव के बच्चों तक पहुंचा रही हैं. कभी जिस स्कूल में खुद पढ़ाई की, आज वहीं बच्चों को अंग्रेजी सिखाकर उनके भीतर आत्मविश्वास पैदा कर रही हैं. अश्विनी की कहानी यह बताती है कि संसाधनों की कमी का रोना रोने की जगह उस कमी से जूझते हुए भी ज्ञान हासिल किया जा सकता है. हम आपको जो रिपोर्ट दिखा रहे हैं इसके फोटो-वीडियो जयनगर प्रखंड के डंडाहीह गांव की रहने वाली अश्विनी चंद्रवंशी की है. मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ी अश्विनी के सामने आर्थिक चुनौतियां जरूर थी, लेकिन उन्होंने इन्हें अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया.
अश्विनी ने जयनगर के सरस्वती पब्लिक हाई स्कूल से वर्ष 2019 में दसवीं तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद अंग्रेजी विषय में उच्च शिक्षा हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ी. आज पढ़ाई के साथ-साथ उसी स्कूल के बच्चों को अंग्रेजी पढ़ा रही हैं. खास बात यह है कि अश्विनी सिर्फ किताबों तक सीमित रहकर अंग्रेजी नहीं सिखातीं, बल्कि बच्चों को बोलने, पढ़ने और रोजमर्रा की बातचीत में अंग्रेजी का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करती हैं. उनकी इसी आधुनिक और सहज शिक्षण शैली से बच्चे भी अंग्रेजी सीखने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
अश्विनी की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का संघर्ष भी जुड़ा हुआ है. उनकी मां ज्योति देवी खुद पांचवीं कक्षा तक ही पढ़ सकीं. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि महंगी शिक्षा का खर्च आसानी से उठाया जा सके, लेकिन उन्होंने बेटी की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी. ज्योति देवी और उनके पति घर पर सिलाई का काम करते हैं. इसी मेहनत की कमाई से बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया. ज्योति देवी बताती हैं कि परिवार में किसी ने उच्च स्तर की अंग्रेजी शिक्षा हासिल नहीं की, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ने और आगे बढ़ने की पूरी आजादी दी. उनका मानना है कि गरीबी किसी बच्चे के सपनों के रास्ते में दीवार नहीं बननी चाहिए. आज बेटी जब गांव के बच्चों को अंग्रेजी सिखा रही है, तो परिवार को अपनी मेहनत सफल होती नजर आ रही है.
अश्विनी के पिता मनोज राम पेशे से दर्जी हैं. सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने और उनकी पत्नी ने मिलकर बेटी की पढ़ाई जारी रखी. मनोज राम बताते हैं कि अश्विनी में बचपन से ही पढ़ाई को लेकर अलग तरह की लगन थी. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने बेटी की शिक्षा के लिए लगातार मेहनत की. मनोज राम खुद भी आर्थिक परिस्थितियों के कारण ज्यादा पढ़ाई नहीं कर सके लेकिन, उनका सपना था कि उनकी बेटी बेहतर शिक्षा हासिल करे और अपने पैरों पर खड़ी हो. आज अश्विनी जिस तरह बच्चों को अंग्रेजी पढ़ा रही हैं, उससे परिवार को उम्मीद है कि वह आगे चलकर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाएंगी.
अश्विनी के प्रयास को गांव के लोग भी करीब से देख रहे हैं. पड़ोसी जवाहर दास बताते हैं कि गांव के कई बच्चे अंग्रेजी विषय में कमजोर थे. अश्विनी ने जिस तरीके से बच्चों को अंग्रेजी बोलना और समझना सिखाना शुरू किया है, उससे बच्चों में धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ रहा है. उनका कहना है कि अश्विनी का प्रयास केवल बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गांव के बच्चों में आगे बढ़ने की सोच भी विकसित हो रही है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि अश्विनी की यह पहल आने वाले दिनों में क्षेत्र के दूसरे बच्चों के लिए भी प्रेरणा बनेगी.
एक तरफ सीमित संसाधनों के बीच अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश और दूसरी तरफ गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का जुनून. अश्विनी चंद्रवंशी की कहानी इसी संघर्ष और संकल्प की कहानी है. अब उनकी कोशिश है कि अंग्रेजी शिक्षा को सिर्फ स्कूल की चारदीवारी तक सीमित न रखा जाए, बल्कि ग्रामीण बच्चों तक इसे आसान और रोचक तरीके से पहुंचाया जाए.
अश्विनी अब सिर्फ स्कूल में बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं. वह सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर रही हैं. छोटे-छोटे ज्ञानवर्धक रील्स और वीडियो के जरिए अंग्रेजी के आसान शब्दों और वाक्यों की जानकारी बच्चों और आम लोगों तक पहुंचा रही हैं. अश्विनी और उनका परिवार चाहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के इस प्रयास को प्रशासन और सरकार का भी सहयोग मिले. उनका मानना है कि अगर संसाधन और बेहतर मंच उपलब्ध कराया जाए, तो गांव के बच्चों के बीच अंग्रेजी शिक्षा को लेकर बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. एक छोटे से गांव से शुरू हुई यह पहल अब शिक्षा और आत्मविश्वास की नई कहानी लिखने की कोशिश कर रही है.
सरस्वती पब्लिक हाई स्कूल डंडाडीह के प्रिंसिपल अर्जुन चौधरी ने बताया कि, “अश्विनी हमारे विद्यालय की होनहार और प्रतिभाशाली पूर्ववर्ती छात्रा रही हैं. उनकी प्रतिभा को हमने काफी करीब से देखा और समझा है. उनकी पढ़ाई को आगे बढ़ाने के लिए हमने उनके घर जाकर उनके माता-पिता को भी लगातार प्रेरित किया. आज हमें खुशी है कि मैट्रिक की पढ़ाई इसी विद्यालय से पूरी करने के बाद अश्विनी फिर से हमारे विद्यालय से जुड़ी हैं और यहां बच्चों को अंग्रेजी की शिक्षा दे रही हैं. उनके प्रयास का असर साफ दिखाई दे रहा है. बच्चे अब केवल सिलेबस के तहत अंग्रेजी पढ़ नहीं रहे, बल्कि उसे समझने और बोलने का प्रयास कर रहे हैं. वे आपस में अंग्रेजी में बातचीत भी कर रहे हैं. फिलहाल अश्विनी इग्नू से अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही हैं. हमें उम्मीद है कि आगे भी वह अपनी प्रतिभा से शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर योगदान देंगी.”