Online ठगी या दुकानदार ने लगाया चूना? व्यापारी खुद आएगा माफी मांगने, जानें उपभोक्ता कानून का ये पावरफुल अधिकार

Online ठगी या दुकानदार ने लगाया चूना? व्यापारी खुद आएगा माफी मांगने, जानें उपभोक्ता कानून का ये पावरफुल अधिकार


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Consumer Protection Bill 2019: उपभोक्ता अधिनियम 2019 के तहत, अब ऑनलाइन ठगी या खराब सामान/सेवा के लिए शिकायत की जा सकती है. जिला उपभोक्ता फोरम दरभंगा के प्रभारी अध्यक्ष पीयूष कमल दीक्षित ने बताया कि ई-कॉमर्स खरीद भी इसमें शामिल है. शिकायत ई-जागृति पोर्टल पर की जा सकती है और 3 महीने में निपटारा होता है.

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दरभंगा: क्या आप भी ऑनलाइन खरीदारी में ठगी का शिकार हो गए हैं या दुकानदार ने आपको खराब सामान देकर चूना लगा दिया है? तो घबराइए नहीं, अब व्यापारी आपके पीछे आएगा और माफी तक मांगेगा. या फिर लाखों रुपये जुर्माना भी भरेगा. ऐसा हम नहीं बल्कि सरकार के नियम कहते हैं. जिसे जानना हर उपभोक्ता के लिए जरूरी है. इस संदर्भ में हमने बात की जिला उपभोक्ता फोरम दरभंगा के प्रभारी अध्यक्ष पीयूष कमल दीक्षित से. उन्होंने उपभोक्ता अधिनियम 2019 के बारे में विस्तृत जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि गुड्स और सर्विसेज जैसे सेवा प्रदान करने वाली कंपनियां, जैसे बैंकिंग सेक्टर, पोस्टल डिपार्टमेंट, बिजली विभाग या कोई भी दुकानदार यदि आपसे ज्यादा पैसा ले रहा है, या उसकी क्वालिटी सही नहीं है, तो आप शिकायत कर सकते हैं. जैसे आपने गाड़ी ली और उसमें मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट है, तो इसके लिए अधिनियम काम करता है.

दो तरह से काम करता है कानून
यह कानून दो तरह से काम करता है. चाहे वह वस्तु हो या सेवा. यदि आपने किसी वस्तु या सेवा के लिए पैसा दिया, सामने वाला विक्रेता आपको डैमेज सामान देता है, अपने वादे पर खरा नहीं उतरता, आपकी शिकायत नहीं सुनता, तो वहां जिला उपभोक्ता फोरम का रोल होता है. आप वहां आवेदन कर सकते हैं. बशर्ते कि वह दुकान या सेवा प्रदाता स्थानीय हो या शिकायतकर्ता इस जिले का मूल निवासी हो. यदि शिकायतकर्ता यहां का नहीं है, तो उसे रेंट एग्रीमेंट आवेदन के साथ देना होगा. आवेदन ई-जागृति पोर्टल पर किया जाता है.

जानिए क्या है प्रक्रिया
श्री दीक्षित ने बताया कि शिकायत दाखिल करने के बाद उसे एडमिट किया जाता है. फिर विपक्षी को नोटिस भेजा जाता है. अगर वह तय सीमा के अंदर अपना पक्ष नहीं रखता है, तो एकपक्षीय निर्णय भी लिया जा सकता है. उन्होंने बताया कि 2019 से पहले ई-कॉमर्स ऑनलाइन खरीद का प्रावधान इसमें नहीं था. लेकिन 2019 के नए कानून के बाद ऑनलाइन मार्केटिंग भी इसकी परिधि में आ गई है. आप ट्रांजैक्शन डॉक्यूमेंट और छोटे-छोटे एविडेंस देकर आवेदन कर सकते हैं. यह सिविल कोर्ट की तरह लंबी प्रक्रिया नहीं है. इसमें अधिकतम 3 महीने के अंदर मामले को खत्म करना होता है. पीड़ित को मुआवजा दिलाया जाता है.



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