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Gold Price Prediction : इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी के भाव ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे. जब अमेरिका और ईरान युद्ध शुरू हुआ तो बहुत से एनालिस्ट्स ने कहा कि अब गोल्ड का भाव और चढ़ेगा. लेकिन, हो उल्टा गया. रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से ही दोनों कीमती धातुओं में मुनाफावसूली का दौर शुरू हो गया. इस साल अब तक सोने का भाव 20 फीसदी टूट चुका है.
28 फरवरी से अमेरिका और ईरान के बीच भड़के सैन्य तनाव ने बुलियन मार्केट के समीकरणों को पूरी तरह उलट कर रख दिया. आमतौर पर युद्ध या किसी बड़े वैश्विक संकट के समय सोने को सुरक्षित निवेश मानकर इसमें तेजी आती है, लेकिन इस बार बाजार का रुख बिल्कुल विपरीत देखने को मिला.
इस कारोबारी हफ्ते भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में सुस्ती देखने को मिली. हफ्ते की शुरुआत में सोने ने थोड़ी बहुत रिकवरी दिखाने की कोशिश की थी, लेकिन शुक्रवार का सत्र खत्म होते-होते इसने अपनी सारी शुरुआती बढ़त गंवा दी. ग्लोबल मार्केट में शुक्रवार को हाजिर यानी स्पॉट गोल्ड करीब 0.9 फीसदी लुढ़ककर 4,140 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बंद हुआ. गोल्ड फ्यूचर्स 1 फीसदी टूटकर 4,162 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. पूरे हफ्ते में कुल गिरावट 3.4 फीसदी रही.
युद्ध के बावजूद सोने की चमक लगातार फीकी पड़ने के पीछे एक बहुत बड़ा आर्थिक गणित काम कर रहा है. दरअसल, वैश्विक वित्तीय बाजारों में यह डर गहराई से बैठ गया है कि अमेरिका और ईरान की लड़ाई की वजह से कच्चे तेल और जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई बेकाबू हो जाएगी. इस विकराल इन्फ्लेशन पर लगाम लगाने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व समेत दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दर बढ़ाएंगे.
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यही वजह है कि इस समय पूरी दुनिया के बुलियन मार्केट की नजरें इस महीने के आखिर में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी हैं. अमेरिकी केंद्रीय बैंक की इस अहम मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग को लेकर बाजार में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. पहले यह अनुमान जताया जा रहा था कि फेड चेयरमैन केविन वॉर्श 28 अक्टूबर को होने वाली बैठक में लगातार दूसरी बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कड़ा फैसला ले सकते हैं. इसी डर ने ही बीते कई महीनों से सोने और चांदी पर दबाव बनाया हुआ है.
अमेरिका में महंगाई थोड़ी कम हुई है. इससे फेडरल रिवर्ज पर ब्याज बढ़ाने का दबाव कुछ कम हुआ है. महंगाई के इन नरम आंकड़ों को देखने के बाद अब वित्तीय बाजार में यह राय बनने लगी है कि फेडरल रिजर्व 28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही स्थिर रखने का फैसला कर सकता है. अगर फेड की तरफ से दरों में ठहराव आता है, तो सोने के लिए यह एक बड़ा सपोर्ट साबित होगा.
ब्याज दरों के अनुमानों में आए इस तेज बदलाव का असर बुलियन एक्सपर्ट्स के सेंटीमेंट पर भी साफ दिखाई देने लगा है. इस हफ्ते की शुरुआत में अक्टूबर महीने के दौरान ब्याज दरें बढ़ने की संभावना करीब 70 फीसदी तक मानी जा रही थी, लेकिन नए डेटा के बाद यह उम्मीद घटकर महज 22 फीसदी के आसपास रह गई है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने की असली दिशा केवल और केवल फेडरल रिजर्व के रुख पर निर्भर करेगी.
भारत में इस हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन यानी शुक्रवार, 2 अक्टूबर को गांधी जयंती की वजह से सर्राफा बाजार और एमसीएक्स (MCX) बंद थे. इस छुट्टी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को आई 1 फीसदी तक की नई गिरावट का असर भारतीय बाजारों पर सीधे तौर पर दर्ज नहीं हो सका.
अब सभी की नजरें सोमवार, 5 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब भारतीय बाजार एक लंबे वीकेंड के बाद दोबारा ट्रेडिंग के लिए खुलेंगे. सोमवार को बाजार खुलते ही एमसीएक्स पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की कमजोरी का शुरुआती असर देखने को मिल सकता है.