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Bihar MLC Chunav 2026: बिहार की सियासत को समझना सबके बूते की बात नहीं. दिल्ली में दोस्ती के इजहार के अगले ही दिन महागठबंधन (I.N.D.I.A) में दरार पड़ गई. विधान परिषद (MLC) की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए राजद ने इकतरफा 6 उम्मीदवारों की घोषणा की तो कांग्रेस ने भी गठबंधन की परवाह किए बिना 5 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं. एनडीए में भी पटना स्नातक सीट पर जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार को खुला समर्थन दे दिया है.
बिहार में 24 घंटे में ही बिखरा इंडिया गठबंधन, 4 सीटों पर आपस में भिड़ेंगे कांग्रेस और RJD के उम्मीदवार
चुनाव आयोग की SIR के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए दिल्ली में विपक्ष की एकजुटता तो दिखी, लेकिन 24 घंटों के अंदर ही बिहार में इसकी धज्जियां उड़ गईं. बिहार में महागठबंधन के नाम से मशहूर विपक्षी दलों का इंडिया ब्लाक पूरी तरह से बिखर गया. यह बिखराव भी छोटे स्तर की पार्टियों के स्तर पर नहीं हुआ. राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर गठबंधन का नेतृत्व करने वाले दलों ने ही इसकी शुरुआत की.
आपस में टकरांगे राजद-कांग्रेस
असेंबली चुनाव में भी टकराहट
महागठबंधन में उम्मीदवारों के आपसी टकराव को फ्रेंडली फाइट कहकर सामान्य घटना ठहराने की परिपाटी 2025 विधानसभा चुनाव से शुरू हुई है. उस वक्त भी सीटों की संख्या पर बिना कोई तालमेल हुए राजद ने इकतरफा अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए थे. बाद में सहयोगी दलों ने भी करीब दर्जन भर सीटों पर अपने उम्मीदवार भी उतार दिए. इनमें ज्यादातर कांग्रेस के कैंडिडेट थे. इसे फ्रेंडली फाइट कह कर स्थिति की गंभीरता को टाल दिया गया. परिणाम सबने देखा. 243 सीटों वाली विधानभा में महागठबंधन के महज 35 उम्मीदवार ही जीत पाए. कांग्रेस 6 सीटों पर सिमट गई, जबकि राजद पिछली 75 सीटों से खिसक कर 25 पर आ गई. इस बार एमएलसी चुनाव में परिणाम क्या होगा, यह वक्त बताएगा, लेकिन आपस में इस घमासान से महागठबंधन की एकता पर सवाल तो उठने ही लगे हैं.
जन सुराज ने लड़ाई रोचक बनाई
इस बार तो जन सुराज पार्टी भी एक बड़ा फैक्टर बनने वाली है. भाजपा से बांकीपुर सीट छीनने के बाद जन सुराज के बारे में लोगों की धारणा बदली है. पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर का उत्साह चरम पर है. उन्होंने भी सभी सीटों पर अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. सारण से जन सुराज समर्थित उम्मीदवार पिछली बार जीता भी था. तिरहुत क्षेत्र से भी जन सुराज के कैंडिडेंट का जलवा दिखा था. उसकी जीत तो नहीं हुई थी, लेकिन उसे खासा वोट मिले थे. नतीजतन वहां से एनडीए और महागठबंधन समर्थित दलीय उम्मीदवार हार गए थे. निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई थी. बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के चीफ प्रशांत किशोर ने भाजपा और राजद के उम्मीदवारों को धूल चटाकर जीत हासिल की है. ऐसे में दलीय उम्मीदवारों के बीच होने वाले चुनावी घमासान के परिणाम का अनुमान लगाया जा सकता है.
अनंत सिंह का जनसुराज को सपोर्ट
जन सुराज की कूटनीति ने एनडीए के लिए भी परेशानी पैदा कर दी है. पटना स्नातक क्षेत्र से एनडीए समर्थित जेडीय के नीरज कुमार उम्मीदवार हैं. उनके खिलाफ जन सुराज ने डॉ. अनुज कुमार सिंह को अपना प्रताशी बानाया है. इस सीट पर मुकाबला इसलिए दिलचस्प हो गया है, क्योंकि मोकामा से जेडीयू के विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज प्रत्याशी का समर्थन कर दिया है. अनंत सिंह का प्रभावशाली व्यक्तित्व और जन सुराज के बारे में बांकीपुर उपचुनाव के बाद बने परसेप्शन से पटना स्नातक सीट का चुनाव काफी रोचक हो गया है. अनंत सिंह ने नीरज के खिलाफ पहले से ही बगावती तेवर अपनाया था.
नीरज और उनके बीच जुबानी जंग भी होती रही है. उनकी रणनीति भी कमाल की रही है. अनुज के नामांकन के जुलूस में न सिर्फ अनंत सिंह ने उन्हें आशीर्वाद दिया, बल्कि जुलूस में शामिल लोग ‘नीतीश कुमार, निशांत कुमार और ललन सिंह जिंदाबाद’ के नारा लगाते जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आवास तक भी गए.
जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करने के सवाल पर अनंत सिंह तर्क दे रहे हैं कि यह चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं होता है. इसमें जीतने वाले प्रत्याशी ना तो मुख्यमंत्री तय करते हैं और ना प्रधानमंत्री. जहां तक नीरज कुमार के विरोध का सवाल है तो यह उनका व्यक्तिगत है. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन चुनावों से नीरज कुमार उन्हें विधायकी में और एक ललन सिंह के सांसदी चुनाव में पार्टी से खिलाफ जाकर काम कर चुके हैं. अनंत सिंह ने कहा कि वह केवल नीरज कुमार को हरवाकर अपना बदला पुरा करना चाहते हैं.