पेड़-पौधों को भी महसूस होता है स्पर्श! छूते ही कोशिकाओं में क्या बदलता है? जानिए अनोखा राज

पेड़-पौधों को भी महसूस होता है स्पर्श! छूते ही कोशिकाओं में क्या बदलता है? जानिए अनोखा राज


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पेड़-पौधों को भी महसूस होता है स्पर्श! छूते ही सेल्स में क्या होता है? ये राज

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कोई इंसान, जानवर या हवा का झोंका किसी पौधे की पत्तियों को छूता है, तो उसके अंदर क्या हलचल होती है? सदियों से वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे थे. अब इस रहस्य से पर्दा उठ गया है.

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फाइल फोटो

क्या पौधे वाकई छूने का अहसास कर सकते हैं? जब कभी भी कोई इंसान, जानवर या हवा का झोंका किसी पौधे की पत्तियों को छूता है, तो उसके अंदर क्या हलचल होती है? सदियों से वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे थे. अब Lund University के रिसर्चर्स ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया है कि पौधे किस तरह स्पर्श यानी टच किए जाने को पहचानते हैं और छूने के तुरंत बाद उनकी कोशिकाओं के अंदर कौन सी बायोलॉजिकल प्रक्रियाएं शुरू होती हैं.

क्या है यह नई खोज?

  • कैल्शियम की वेव: जैसे ही किसी पौधे की पत्ती या तने को छुआ जाता है, उसमें कुछ सेकेंड्स के अंदर ही कैल्शियम आयनों की एक तेज सिग्नल वेव पैदा होती है.
  • सेल्युलर प्रेशर चेंज: छूने के कारण पौधे की कोशिका वाल में बहुत हल्का भौतिक खिंचाव आता है, जिससे खास कैल्शियम चैनल खुल जाते हैं.
  • जीन ऐक्टिवेशन: कैल्शियम सिग्नल के मिलते ही पौधे के अंदर सैकड़ों प्रतिरक्षा और डिफेंस जीन ऐक्टिव हो जाते हैं.
  • विकास की दिशा में बदलाव: बार-बार छूने पर पौधे अपनी ऊर्जा लंबाई बढ़ाने के बजाय तने को मजबूत और मोटा करने में लगाने लगते हैं.

छूने के बाद पौधे में क्या-क्या होता है?
वैज्ञानिक भाषा में पौधों के छूने पर मिलने वाली प्रतिक्रिया को थिग्मो मार्फो जेनेसिस (Thigmomorphogenesis) कहा जाता है. जब कोई कीट, बारिश की बूंद या इंसानी उंगली पौधे से टकराती है, तो पौधे की कोशिकाओं में कई तरीके से बदलाव आते हैं. इसे क्रम से समझते हैं.

  1. मैकेनिकल सेंसिंग: छूने से कोशिका झिल्ली पर भौतिक दबाव यानी मैकेनिकल स्ट्रेस बनता है. इसमें कुछ माइक्रो सेकेंड्स का ही समय लगता है.
  2. कैल्शियम का प्रवाह: कोशिका के बाहर मौजूद कैल्शियम आयन तेजी से कोशिका के अंदर प्रवेश करते हैं. इसमें 1 से 3 सेकंड का समय लगता है.
  3. सिग्नल ट्रांसडक्शन: कैल्शियम की यह लहर पूरे पौधे में नर्वस सिस्टम जैसी चेतावनी फैलाती है. इसमें कुछ ही सेकंड का समय लगता है.
  4. हार्मोनल और जेनेटिक रिस्पॉन्स: जैस्मोनिक एसिड (Jasmonic Acid) जैसे हार्मोन बनते हैं और डिफेंसिव जीन ऑन हो जाते हैं. इसमें मिनटों का समय लगता है.

इंसानों के नर्वस सिस्टम से कितना अलग है यह?
इंसानों और जानवरों में दर्द या स्पर्श का अहसास तंत्रिका कोशिकाओं न्यूरॉन और दिमाग के जरिए होता है. पौधों के पास दिमाग या नसें नहीं होतीं, फिर भी वे सिग्नल भेजते हैं. इंसानों की बात करें तो विद्युत संकेतों (electrical action potentials) और न्यूरोट्रांसमीटर के माध्यम से सेकंड के सौवें हिस्से में दिमाग तक सूचना पहुंचाते हैं. वहीं पौधे, वैस्कुलर सिस्टम (Xylem and Phloem) और कैल्शियम की रासायनिक लहरों के माध्यम से एक पत्ती से दूसरी पत्ती तक संदेश भेजते हैं.

खेती और बागवानी के लिए यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?
इस रिसर्च का सीधा फायदा आधुनिक कृषि और फसल सुरक्षा में मिल सकता है.

  • कीटों से प्राकृतिक सुरक्षा: जब कीड़े पत्तियों पर रेंगते हैं, तो स्पर्श सिग्नल पौधे को पहले ही सतर्क कर देता है. पौधा कीटों को बेअसर करने वाले कड़वे रसायन तुरंत बनाने लगता है.
  • तूफान और हवा से बचाव: तेज हवाओं वाले क्षेत्रों में पौधे बार-बार हिले जाने के कारण छोटे और मजबूत तने विकसित करते हैं ताकि वे टूटे नहीं.
  • स्मार्ट वर्टिकल फार्मिंग: ग्रीनहाउस और इंडोर फार्मिंग में हल्की हवा या स्पर्श तकनीक का उपयोग करके बिना केमिकल के पौधों को मजबूत बनाया जा सकता है.

लुंड यूनिवर्सिटी का यह स्टडी साबित करता है कि पौधे निष्क्रिय जीव नहीं हैं. भले ही उनके पास आंखें, कान या दिमाग ना हों, लेकिन उनके पास छूने का एक बेहद रिफाइन्ड और तेज तंत्र मौजूद है. यह तकनीक भविष्य में फसलों को बिना पेस्टिसाइड अधिक मजबूत बनाने के रास्ते खोलेगी.



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