Pitru Paksha: वाराणसी के पिशाच मोचन तीर्थ में पितृ पक्ष के दौरान मिलती है प्रेत योनि से मुक्ति, पितृ दोष निवारण के लिए आते हैं लाखों श्रद्धालु

Pitru Paksha: वाराणसी के पिशाच मोचन तीर्थ में पितृ पक्ष के दौरान मिलती है प्रेत योनि से मुक्ति, पितृ दोष निवारण के लिए आते हैं लाखों श्रद्धालु


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Pitru Paksha 2026: वाराणसी में नाथों के नाथ बाबा विश्वनाथ के दरबार से करीब 3 किलोमीटर दूर पिशाच मोचन तीर्थ है. इसे विमल तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तीर्थ की स्थापना भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने की थी. उनके कठिन तप से यहां कपद्रीश्वर महादेव प्रकट हुए थे. इसी जगह पर महर्षि वाल्मीकि के कहने पर एक ब्राह्मण जो अपने पूर्व जन्मों के फल के कारण प्रेत योनि में भटक रहा था उसे यहां मुक्ति मिली थी. इस कुंड का वर्णन काशी खंडोक्त में भी मिलता है. तीर्थ के पुरोहित मुन्ना महाराज ने बताया की इस कुंड का इतिहास काशी में गंगा अवतरण से पूर्व का है. गरुण पुराण में इसका उल्लेख भी है.

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वाराणसी: भगवान भोले की नगरी काशी पुरे दुनियां में सबसे निराली है. इस शहर को मोक्ष का शहर भी कहा जाता है.इस प्राचीन शहर में एक ऐसा चमत्कारिक तीर्थ है जहां भटकती आत्माओं के साथ भूत और पिशाचो को भी मुक्ति मिल जाती है. इसके लिए इस तीर्थ पर खास अनुष्ठान होता है. पितृ पक्ष के 15 दिनों के अलावा भी आम दिनों में यहां लोग तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते है. प्रेत योनि से मुक्ति के लिए यह स्थान सबसे प्रधान है.

पिशाचों को भी मिलती है मुक्ति

वाराणसी में नाथों के नाथ बाबा विश्वनाथ के दरबार से करीब 3 किलोमीटर दूर पिशाच मोचन तीर्थ है. इसे विमल तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तीर्थ की स्थापना भगवान शिव के भक्त कपर्दी ने की थी. उनके कठिन तप से यहां कपद्रीश्वर महादेव प्रकट हुए थे. इसी जगह पर महर्षि वाल्मीकि के कहने पर एक ब्राह्मण जो अपने पूर्व जन्मों के फल के कारण प्रेत योनि में भटक रहा था उसे यहां मुक्ति मिली थी. इस कुंड का वर्णन काशी खंडोक्त में भी मिलता है. तीर्थ के पुरोहित मुन्ना महाराज ने बताया की इस कुंड का इतिहास काशी में गंगा अवतरण से पूर्व का है. गरुण पुराण में इसका उल्लेख भी है.

पुरे दुनियां में पिशाच मोचन कुंड एक ऐसा तीर्थ है जहां पितरों के निमित श्राद्ध, पिंडदान और त्रिपिंडी श्राद्ध से उन्हें प्रेत योनि से भी मुक्ति मिल जाती है. जिस किसी के घर में उनके परिजनों की अकाल मृत्यु होती है उनके निमित यदि काशी के इस तीर्थ पर त्रिपिंडी श्राद्ध और नारायण बलि कराई जाए तो उनके मुक्ति का मार्ग प्रस्थत होता है.

गया के बाद वराणसी है सबसे पवित्र स्थान

गया तीर्थ के बाद पितरों के आत्मा की शांति और उनके मुक्ति के लिए यह स्थान सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है. इस स्थान पर पितृ पक्ष के 15 दिनों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है. अलग अलग राज्यों से हर दिन करीब 25 से 30 हजार श्रद्धालु यहां श्राद्ध और तर्पण के लिए आते है.प्रेत योनि, पितृ दोष और ब्रह्म दोष से मुक्ति के लिए यह स्थान प्रसिद्ध है. पिशाचो के मुक्ति का मार्ग खोलने वाले इस प्राचीन और पौराणिक कुंड से जुड़े कई कथाएं है. बैकुंड के स्वामी श्री हरी विष्णु से जुड़ी भी एक कथा प्रचलित है. कहते है इस कुंड को भगवान विष्णु ने ही पिशाच मोचन का वरदान दिया है. ताकि जो भी श्रद्धालु श्रद्धाभाव से यहां स्नान करें उसके पितृ संबंधित सभी दोष दूर हो जाए.



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