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NCERT Class 9 New Social Science Book 2026: कक्षा 9 में पढ़ाई जाने वाली सोशल साइंस अब छात्रों को सिर्फ इतिहास की घटनाएं या सरकारी संस्थाओं की जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगी.नई NCERT किताब अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2 (Understanding Society: India and Beyond–Part 2)में छात्रों को भारत में गवर्नेंस के विकास को सभा और समिति,राम राज्य और राजधर्म जैसी अवधारणाओं से लेकर संविधान और आधुनिक लोकतंत्र तक समझाया जाएगा. इस नई किताब के गर्वर्नेंस एंड पब्लिक पॉलिसी चैप्टर में महात्मा गांधी के ‘राम राज्य’ के विचार, चोल राजवंश से जुड़ी सेंगोल परंपरा और NEP 2020 जैसी नीतियों को भी जगह दी गई है.
NCERT Class 9 New Social Science Book 2026: एनसीईआरटी की किताब में बदलाव.
NCERT Class 9 New Social Science Book 2026: कक्षा 9 के छात्रों की नई सामाजिक विज्ञान की किताब अब सिर्फ इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र के अलग-अलग अध्यायों तक सीमित नहीं रहेगी. नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2’ में छात्रों को भारत में शासन व्यवस्था के विकास को पुराने भारतीय ग्रंथों और परंपराओं से लेकर आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था तक समझाने की कोशिश की गई है.153 पेज की इस किताब में राम राज्य, राजधर्म और चोल राजवंश की सेंगोल परंपरा का जिक्र है.इसके साथ ही नेशनल एजुकेशन पॉलिसी यानी एनईपी 2020, नेशनल हेल्थ पॉलिसी 2017, खेलो भारत नीति, ई-गवर्नेंस, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी मौजूदा नीतियों और योजनाओं को भी छात्रों के लिए उदाहरण के तौर पर शामिल किया गया है.
पुराने विचारों से आधुनिक लोकतंत्र तक की कहानी
नई किताब के अध्याय 4 का नाम ‘गवर्नेंस एंड पब्लिक पॉलिसी’ है. इसमें बताया गया है कि भारत में शासन को समझने का नजरिया समय के साथ कैसे बदला और विकसित हुआ. इसके लिए चोल राजवंश, महाभारत, रामायण, मुंडक उपनिषद और कौटिल्य के अर्थशास्त्र जैसे स्रोतों और परंपराओं का उदाहरण दिया गया है.किताब में कहा गया है कि भारत में शासन की समझ सभा और समिति, राम राज्य और राजधर्म जैसी अवधारणाओं से आगे बढ़ते हुए संविधान और नागरिकों की भागीदारी पर आधारित आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था तक पहुंची है यानी छात्रों को शासन को केवल आज की सरकारी व्यवस्था के तौर पर नहीं, बल्कि उसके ऐतिहासिक और वैचारिक विकास के रूप में समझाने की कोशिश की गई है.
महात्मा गांधी के ‘राम राज्य’आदर्श शासन मॉडल
इस अध्याय में महात्मा गांधी के ‘राम राज्य’ के विचार को भी जगह दी गई है. किताब के अनुसार, गांधी ने ‘राम राज्य’ को शासन के एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा था. इसमें ईमानदारी, पारदर्शिता, करुणा, कल्याण और शासन तथा सार्वजनिक नीति में लोगों को केंद्र में रखने जैसे सिद्धांतों पर जोर दिया गया है.किताब में ‘राम राज्य’ को भारत में शासन की समझ के विकास की एक कड़ी के रूप में रखा गया है यानी यहां इसे केवल धार्मिक या पौराणिक संदर्भ के रूप में नहीं, बल्कि शासन और सार्वजनिक नीति से जुड़े एक विचार के तौर पर समझाया गया है.
सेंगोल को भी शासन और सुशासन से जोड़कर पढ़ेंगे छात्र
नई किताब में सेंगोल का भी खास उल्लेख है.इसमें सेंगोल को शासन और अच्छे शासन का सांस्कृतिक प्रतीक बताया गया है.किताब के अनुसार राजदंड या सत्ता के प्रतीक के रूप में सेंगोल के इस्तेमाल की परंपरा चोल राजवंश के शासनकाल से जुड़ी रही है.किताब में यह भी बताया गया है कि 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन में सेंगोल स्थापित किया था. इसके साथ ही तमिलनाडु के अधीनम संतों द्वारा जवाहरलाल नेहरू को भारत की आजादी के अवसर पर सेंगोल दिए जाने का संदर्भ भी किताब में शामिल किया गया है.किताब इस पूरे संदर्भ के जरिए यह समझाने की कोशिश करती है कि भारत की संस्थाएं आज भी शासन से जुड़े पारंपरिक विचारों और मूल्यों से जुड़ाव रखती हैं और उन्हें आधुनिक लोकतंत्र की जरूरतों के हिसाब से अपनाती हैं.
एनईपी 2020 को बताया उदाहरण
अध्याय में एनईपी 2020 को पब्लिक पॉलिसी का एक प्रमुख उदाहरण बताया गया है. इसे किताब के ‘डोंट मिस आउट’ हिस्से में रखा गया है इसमें बताया गया है कि एनईपी तैयार करने वाली समिति में शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, टेक्नोलॉजी, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और दूसरे क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे.किताब में एनईपी तैयार करने की प्रक्रिया में बड़े स्तर पर किए गए पब्लिक कंसल्टेशन का भी जिक्र है. इसके अनुसार पॉलिसी बनाने के दौरान 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6,600 ब्लॉक्स, 6,000 अर्बन लोकल बॉडीज और 676 जिलों से सलाह ली गई थी. इस प्रक्रिया में करीब 2 लाख सुझाव मिले और अंतिम पॉलिसी तैयार करने से पहले नागरिकों और संस्थानों की कई सिफारिशों को इसमें शामिल किया गया. इसके बाद इसे 2020 में यूनियन कैबिनेट ने मंजूरी दी.