India Largest Exam 2026: परीक्षाओं के महाकुंभ में बैठते हैं करोड़ों युवा, दुनिया में किस रैंक पर टिके हैं भारत के सबसे बड़े एग्जाम?

India Largest Exam 2026: परीक्षाओं के महाकुंभ में बैठते हैं करोड़ों युवा, दुनिया में किस रैंक पर टिके हैं भारत के सबसे बड़े एग्जाम?


नई दिल्ली (India Largest Exam 2026). भारत में किसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा की तारीख नजदीक आते ही देश का माहौल बदल जाता है. ट्रेनें भर जाती हैं, होटल में कमरे नहीं मिलते और अभ्यर्थियों के साथ ही उनके पेरेंट्स भी परेशान नजर आते हैं. हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रिसर्च की एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जो इन आंकड़ों पर मुहर लगाती है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, नीट यूजी, यूपीएससी सीएसई, जेईई मेन और यूजीसी नेट परीक्षाएं दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षाओं में शामिल हैं.

इससे देश में शिक्षा और सरकारी नौकरी के प्रति जुनून का अंदाजा लगा सकते हैं. हर साल 1 सीट के लिए ऐसी गलाकाट प्रतियोगिता होती है, जो शायद ही कहीं और देखने को मिलती हो. इस ग्लोबल रिसर्च रिपोर्ट में चीन की ‘गाओकाओ’ (Gaokao) पहली रैंक पर है. इसमें लगभग 1.29 करोड़ छात्र बैठते हैं. वहीं, भारत की नीट यूजी परीक्षा करीब 25 लाख आवेदनों के साथ दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी परीक्षा है. यूपीएससी सीएसई में 12 लाख, जेईई मेन में 10 लाख और यूजीसी नेट में 8 लाख से अधिक अभ्यर्थी हिस्सा लेते हैं.

देश की 4 सबसे बड़ी परीक्षाएं

एसबीआई की रिपोर्ट सिर्फ आंकड़ों का पुलिंदा नहीं है. यह इंडियन एग्जाम सिस्टम की ताकत और उसकी कमजोरियों को बेनकाब करती है. इतने बड़े पैमाने पर युवा अपने भविष्य के लिए इम्तिहान दे रहे हैं. ऐसे में यह सोचना जरूरी हो जाता है कि क्या हमारी व्यवस्था इन परीक्षाओं की शुचिता बचा पा रही है?

एसबीआई रिपोर्ट: भारत की 4 बड़ी परीक्षाएं और उनकी ग्लोबल स्थिति

दुनिया की 14 सबसे बड़ी परीक्षाओं में भारत की 4 परीक्षाएं भी शामिल हैं. इनमें सबसे ज्यादा अभ्यर्थी शामिल होते हैं और इनका स्तर भी सबसे ज्यादा कठिन होता है.

नीट यूजी से लेकर यूजीसी नेट तक: आंकड़ों का खेल क्यों खास है?

एसबीआई की रिपोर्ट में भारत की 4 प्रमुख परीक्षाओं को खास जगह मिली है. इनमें मेडिकल के लिए नीट-यूजी (लगभग 25 लाख आवेदन), सिविल सर्विसेज के लिए यूपीएससी सीएसई (लगभग 12 लाख आवेदन), इंजीनियरिंग के लिए जेईई मेन (लगभग 10 लाख आवेदन) और हायर एजुकेशन-रिसर्च के लिए यूजीसी नेट (लगभग 8 लाख आवेदन) शामिल हैं. चीन को छोड़ दिया जाए तो दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश है जो इतने बड़े पैमाने पर परीक्षाएं करवाता हो. हमारे यहां परीक्षा का आयोजन किसी राष्ट्रीय उत्सव या मेगा इवेंट जैसा होता है, जिसमें देश की पूरी प्रशासनिक मशीनरी झोंक दी जाती है.

चीन के ‘गाओकाओ’ से क्या है हमारी तुलना?

इस ग्लोबल लिस्ट में चीन का ‘गाओकाओ’ पहली रैंक पर है. यहां परीक्षा के दौरान मिलिट्री जैसी चौकसी रखी जाती है. स्टील के मजबूत कमरों में मोशन सेंसर और पुलिस के पहरे के बीच एग्जाम होते हैं. इसके उलट, भारत में जब नीट या अन्य परीक्षाएं होती हैं तो पेपर लीक, सेंटर पर हंगामे और मैनेजमेंट में लापरवाही जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ जाती हैं. पिछले कुछ सालों में इन गड़बड़ियों के कारण देश का सियासी और शैक्षणिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया.

अब सिर्फ संख्या नहीं, फुल-प्रूफ सिस्टम की है दरकार

इस रिसर्च का सबसे अहम पहलू है कि यह सिर्फ कमियां गिनाकर चुप नहीं बैठती, बल्कि चीन और अन्य देशों के बेहतर तौर-तरीकों से सीखने की सलाह देती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को ऐसा मजबूत ‘नेशनल टेस्टिंग फ्रेमवर्क’ चाहिए जो डिजिटल मार्किंग, इमरजेंसी रिजर्व सेंटर और शिकायतों के निस्तारण के ट्रांसपेरेंट सिस्टम से लैस हो. देश के करोड़ों युवा अपनी मेहनत के दम पर भविष्य संवारने निकलते हैं तो सिस्टम की जिम्मेदारी है कि उनकी उम्मीदों पर कोई आंच न आए.



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