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Gorakhpur-Siliguri Expressway: बिहार में अब सड़क की रफ्तार तेज होने वाली है. उत्तर बिहार से पूर्वोत्तर का सफर आने वाले समय में और आसान होगा. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे इसी कड़ी की बड़ी परियोजना है. करीब 520 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ेगा. इसका सबसे बड़ा हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा. बिहार में करीब 416 किलोमीटर का हिस्सा होगा और यह पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर गुजरेगा.
एक्सप्रेस-वे (सांकेतिक तस्वीर)
पटनाः बिहार से असम तक सड़क सफर का पूरा खेल बदलने वाला है. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे उत्तर बिहार को सिलीगुड़ी से जोड़ेगा. यही रास्ता आगे पूर्वोत्तर के लिए बड़ा गेटवे बनेगा. इसे चिकन नेक का गेट-वे भी कहा जा रहा है. खास बात यह है कि मिथिला यानी माता सीता की धरती से मां कामाख्या के द्वार तक पहुंचना भी आसान होगा. एक्सप्रेसवे और आगे की कनेक्टिविटी पूरी होने के बाद मधुबनी से कामाख्या मंदिर तक करीब 10 घंटे में पहुंचने का अनुमान है. यानी एक ही सफर में मिथिला से सीधे असम तक तेज कनेक्टिविटी का रास्ता तैयार होगा.
मिथिला से मां कामाख्या तक आसान होगा सफर
इस एक्सप्रेसवे का बिहार वाला हिस्सा मिथिला और सीमांचल के कई इलाकों से होकर गुजरेगा. मधुबनी और आसपास के इलाकों के लोगों को सिलीगुड़ी की ओर जाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. मधुबनी को मिथिला की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा जाता है, जबकि सीतामढ़ी को माता सीता की जन्मभूमि है. यही वजह है कि इस एक्सप्रेसवे को माता सीता की धरती से पूर्वोत्तर के धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंचने वाले नए रास्ते के तौर पर भी देखा जा रहा है. मधुबनी से सिलीगुड़ी और फिर असम की तरफ बढ़ने पर मां कामाख्या मंदिर तक सड़क संपर्क आसान होगा. इस एक्सप्रेस-वे से मधुबनी से सिलीगुड़ी पहुंचने में लगभग 4 घंटे लगेंगे. जबकि सिलीगुड़ी से मां कामाख्या मंदिर जाने के लिए तकरीबन 6 से 6.5 घंटे का समय लगता है. ऐसे में मधुबनी से करीब 10 घंटे का सफर एक अनुमान के तौर पर लिया जा सकता है. हालांकि, वास्तविक समय एक्सप्रेसवे के पूरा होने, रूट और ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर करेगा.
120 की रफ्तार से दौड़ेंगे वाहन
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे 6 लेन का एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा. इस पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चल सकेंगे. एक्सप्रेसवे पर वाहनों की एंट्री और एग्जिट के लिए तय जगहें होंगी. इससे हाईवे पर अचानक वाहनों के आने-जाने की समस्या कम होगी और सफर ज्यादा सुरक्षित हो सकता है. एक्सप्रेसवे जिन गांवों और कस्बों के पास से गुजरेगा, वहां भी इसका असर देखने को मिल सकता है. सड़क बनने के बाद होटल, ढाबे, पेट्रोल पंप, सर्विस सेंटर और छोटे कारोबार बढ़ने की संभावना है. इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं.
किन-किन जिलों से गुजरेगा
गोरखपुर से शुरू होकर गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और देवरिया होते हुए बिहार में प्रवेश करेगा. बिहार में यह पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर गुजरेगा. इसके बाद एक्सप्रेसवे पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर से होते हुए सिलीगुड़ी के पास पहुंचेगा. यानी उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और पश्चिम बंगाल तक यह एक्सप्रेसवे कुल कई जिलों को जोड़ते हुए सिलीगुड़ी तक सीधी कनेक्टिविटी देगा.