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Bihar: पटना में गंगा के बाढ़ क्षेत्र में बने अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को सख्त निर्देश दिया. कोर्ट ने नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच गंगा के बाढ़ क्षेत्र से सभी अतिक्रमण हटाने के लिए बिहार सरकार को आठ सप्ताह का समय दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह समय आखिरी बार दिया है.
सुप्रीम कोर्ट की बड़ी कार्यवाही. (File Photo)
पटनाः बिहार में गंगा के बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट ने सम्राट सरकार को ‘लास्ट वॉर्निंग’ दी है. कोर्ट ने साफ कहा है कि पटना में नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच गंगा के बाढ़ क्षेत्र से सभी अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने होंगे. इसके लिए बिहार सरकार को 8 हफ्ते का आखिरी मौका दिया गया है. यानी अब गंगा किनारे प्रशासन का पीला पंजा चलेगा और तय समय में कार्रवाई पूरी कर सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देनी होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने 21 जुलाई 2026 को बिहार सरकार को छह सप्ताह के भीतर नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच बाढ़ क्षेत्र में मौजूद सभी अनधिकृत निर्माण हटाने का निर्देश दिया था. 28 सितंबर को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कोर्ट के निर्देशों का कुछ हिस्सा पूरा किया गया है, लेकिन कई अवैध निर्माण अब भी बचे हुए हैं. राज्य सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद गंगा का जलस्तर बढ़ गया था. इससे पूरा इलाका पानी में डूब गया और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में परेशानी आई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बिहार को एक और मौका देते हुए आठ सप्ताह का समय दिया.
कार्रवाई नहीं हुई तो चीफ सेक्रेटरी को बुलाएगा कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने इस बार बिहार सरकार को साफ चेतावनी भी दी है. कोर्ट ने कहा कि अगर तय समय में निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो बिहार के मुख्य सचिव और दूसरे अधिकारियों को कोर्ट में बुलाया जा सकता है. इसके साथ ही अवमानना की कार्रवाई भी की जा सकती है. कोर्ट ने साफ कहा कि आठ सप्ताह के बाद अतिक्रमण हटाने की पूरी अनुपालन रिपोर्ट चाहिए और इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा.
पहले की जांच में मिले थे अवैध निर्माण
गंगा के बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण का यह मामला नया नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की गई रिपोर्ट में पटना में गंगा के बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण की पहचान की गई थी. अप्रैल 2025 में कोर्ट के रिकॉर्ड में बताया गया था कि महात्मा गांधी सेतु से नौजर घाट के बीच के हिस्से में 151 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए थे. इन निर्माणों को हटाने के लिए अतिक्रमण के मामले भी शुरू किए गए थे. कोर्ट के सामने पहले की रिपोर्टों में पटना में गंगा के बाढ़ क्षेत्र को लेकर सर्वे और अतिक्रमण की पहचान की प्रक्रिया का भी उल्लेख है. अधिकारियों ने पुराने सर्वे नक्शों और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर निर्माणों की स्थिति की जांच की थी.
मालिकाना हक का दावा करने वालों को भी मौका
सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों के लिए भी रास्ता बताया है, जो यह दावा कर रहे हैं कि उनका निर्माण उनकी अपनी जमीन पर है और वह बाढ़ क्षेत्र में नहीं आता. ऐसे लोग सक्षम अधिकारी के सामने दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रख सकते हैं. उन्हें जमीन के मालिकाना हक के कागजात के साथ निर्माण की मंजूरी और स्वीकृत नक्शे जैसे दस्तावेज भी देने होंगे. दस्तावेज नहीं होने पर उनके दावे पर विचार नहीं किया जाएगा. अब बिहार सरकार के सामने आठ सप्ताह के भीतर कार्रवाई पूरी करने और अगली सुनवाई में पूरी अनुपालन रिपोर्ट पेश करने की जिम्मेदारी है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस बार इसके बाद कोई और समय नहीं मिलेगा.