मुश्किल वक्त में डायनासोर भी बन जाते थे सीफूड के दीवाने, लाखों साल पुराने दांतों से पता चली हैरान करने वाली बात

मुश्किल वक्त में डायनासोर भी बन जाते थे सीफूड के दीवाने, लाखों साल पुराने दांतों से पता चली हैरान करने वाली बात


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खूंखार डायनासोर भी थे सीफूड के दीवाने, लाखों साल पुराने दांतों से पता चला

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एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि डायनासोर समुद्र तटों पर बहकर आने वाले सीफूड को खाते थे. यूनिवर्सिटी ऑफ अर्कांसस के जियोलॉजिस्ट्स ने डायनासोर के दांतों के फॉसिल का एनालिसिस किया. इसमें मरीन सब्सिडाइजेशन की पुष्टि हुई है. करोड़ों साल पहले क्रेटेशियस काल में भी जानवर मुश्किल समय में समुद्री जीवों को अपना भोजन बनाते थे. यह अपनी तरह की पहली ऐसी स्टडी है.

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सीफूड को भी चाव से खाते थे डायनासोर! (AI Generated Image)

नई दिल्ली: पहली बार यह साबित हुआ है कि डायनासोर और क्रेटेशियस काल के अन्य जानवर अपनी डाइट में सीफूड भी शामिल करते थे. तूफान अक्सर समुद्री जीवों को तटों पर बहा ले आते हैं. जमीन पर रहने वाले जानवर इन्हें अपने भोजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इस पूरी प्रक्रिया को मरीन सब्सिडाइजेशन कहा जाता है. आज के तटीय इकोसिस्टम में भी सूखे जैसे मुश्किल समय में ऐसा देखने को मिलता है. ‘फ्रंटियर्स इन इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन’ में यह नई स्टडी पब्लिश हुई है. इससे पता चलता है कि क्रेटेशियस काल में भी जमीन पर रहने वाले जानवर मरीन सब्सिडाइजेशन का हिस्सा थे. क्रेटेशियस काल 145 से 66 मिलियन साल पहले का समय है. यह जानकारी डायनासोर की ईटिंग हैबिट्स को लेकर नया नजरिया पेश करती है. इस स्टडी से समुद्री और जमीनी इकोसिस्टम के कनेक्शन का भी पता चलता है.

जियोलॉजिस्ट ने डायनासोर के सीफूड खाने को लेकर क्या कहा?

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ अर्कांसस के जियोलॉजिस्ट क्लेटन फोर्स्टर ने इस स्टडी को लीड किया है. क्लेटन फोर्स्टर ने कहा, ‘हम दिखाते हैं कि क्रेटेशियस के ग्रीनहाउस क्लाइमेट में तटीय जानवर समुद्री संसाधनों पर निर्भर थे.’ उन्होंने कहा, ‘वे अपनी डाइट को पूरा करने के लिए आधुनिक जीवों की तरह ही सीफूड खाते थे.’ क्लेटन और उनकी टीम ने डायनासोर के साथ अन्य जानवरों के दांतों के फॉसिल की जांच की. इनमें मगरमच्छ, कछुए और मछलियां भी शामिल हैं.

उन्होंने पाया कि समुद्री संसाधनों का असर फूड चेन के जरिए जानवरों की हड्डियों तक पहुंच जाता है. यह मिनरल्स के रूप में जानवरों के दांतों में भी शामिल हो गया था. यह पहली बार है जब प्रीहिस्टोरिक इकोसिस्टम में मरीन सब्सिडाइजेशन की पहचान की गई है.

क्लेटन फोर्स्टर ने कहा, ‘तटीय जीवों ने समुद्र से किसी प्रकार का ऑर्गेनिक मैटर जरूर खाया होगा.’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह पैटर्न मछली से लेकर बड़े शाकाहारी जानवरों तक में देखा गया है.’ इससे यह साफ होता है कि समुद्री संसाधनों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता था.

कार्बन आइसोटोप के एनालिसिस से डायनासोर की डाइट का कैसे पता चला?

क्लोवरली फॉर्मेशन समूह से पांच नमूने. बाएं से दाएं क्रम में, 3 नमूने मगरमच्छ के दांतों के हैं, चौथा दांत डीनोनिचस एंटिरहोपस का है और चौथा दांत सौरोपेलटा एडवर्डसी का है. (Image Credit: Sam Noble Oklahoma Museum of Natural History/Clayton Forster)

क्या सभी डायनासोर समुद्री जीव या सीफूड खाना पसंद करते थे?

इस डीप एनालिसिस में यह भी पता चला कि सभी डायनासोर भोजन के लिए समुद्री संसाधनों का इस्तेमाल नहीं करते थे. टेनोन्टोसॉरस टिलेटी इसका एक बहुत ही बड़ा और अहम उदाहरण है. यह क्रेटेशियस काल में कई स्थानों पर पाया जाने वाला एक बड़ा शाकाहारी डायनासोर था. इस डायनासोर के फॉसिल में मरीन सब्सिडाइजेशन का कोई भी सबूत नहीं मिला है.

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