पुतिन ने भारत को दिया बड़ा ऑफर, इंडिया-रूस के बीच बनेगा नया ट्रेड रूट, होर्मुज की दादागीरी का ‘दी एंड’

पुतिन ने भारत को दिया बड़ा ऑफर, इंडिया-रूस के बीच बनेगा नया ट्रेड रूट, होर्मुज की दादागीरी का ‘दी एंड’


पश्चिम एशिया में होर्मुज से लेकर लाल सागर तक मचे बवाल ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है. इस भयानक ट्रेड संकट के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के सामने एक ऐसा मास्टरप्लान रखा है, जो न केवल भारत की ऊर्जा और व्यापारिक सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि होर्मुज की मनमानी और दादागीरी को भी पूरी तरह खत्म कर सकता है. पुतिन ने भारत को ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) जैसे नए और सुरक्षित ट्रांसपोर्ट रास्तों का मिलकर इस्तेमाल करने का बड़ा ऑफर दिया है. ये प्रपोजल न सिर्फ भारत और रूस के आर्थिक रिश्तों को एक नया आयाम देगा, बल्कि आने वाले समय में दुनिया के नक्शे पर व्यापार की पूरी बाजी ही पलट सकता है.

होर्मुज संकट: क्यों ठप पड़ रहा है दुनिया का समुद्री व्यापार?

दुनिया के नक्शे पर होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित एक बहुत ही संकरा समुद्री रास्ता है. ये रास्ता पूरी दुनिया के लिए कितना जरूरी है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि दुनिया का लगभग एक-चौथाई कच्चा तेल और भारी मात्रा में कार्गो जहाज इसी छोटे से रास्ते से होकर गुजरते हैं. लेकिन जंग के बाद से ये रास्ता ब्लॉक कर दिया गया है. इस रास्ते पर ईरान और अमेरिका दोनों ही दादागीरी दिखा रहे हैं.

यहां भयंकर गोलाबारी और मिसाइल हमलों के कारण व्यापारी जहाजों पर हमला होने का जोखिम कई गुना बढ़ गया है. जहाजों का बीमा करने वाली कंपनियों ने अपनी दरें आसमान पर पहुंचा दी हैं और कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से अपने जहाज भेजने से साफ इनकार कर दिया है. जब दुनिया का सबसे बड़ा तेल सप्लाई रूट बंद होने के कगार पर पहुंच गया, तब दुनिया को समझ आया कि किसी एक समुद्री रास्ते पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहना कितना भारी पड़ सकता है.

पुतिन का भारत को खुला ऑफर: ‘नए रास्तों पर साथ मिलकर बढ़ाएं कदम’

इसी वैश्विक उथल-पुथल के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के सामने एक बेहतरीन प्रस्ताव रखा है. पुतिन का मानना है कि भारत और रूस के बीच केवल सामान की खरीद-बिक्री का ही रिश्ता नहीं होना चाहिए, बल्कि दोनों देशों को ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी एक-दूसरे का हाथ थामना चाहिए.

पुतिन ने इस बात का खुलासा किया कि रूस पहले ही इस नए कॉरिडोर का सफल ट्रायल कर चुका है. उन्होंने बताया कि रूस ने चीन और दक्षिण कोरिया के व्यापारिक जहाजों को इन नए अंतरराष्ट्रीय समुद्री और जमीनी रास्तों से सुरक्षित निकाला है.

पुतिन ने कहा है कि ‘हमारे पास भारत के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने का बहुत बड़ा मौका है, और ये सिर्फ सामान बेचने तक सीमित नहीं है. हमने चीन और दक्षिण कोरिया के कंटेनर जहाजों को इन रास्तों से निकालकर ट्रायल कर लिया है. अब हम अपने भारतीय दोस्तों के साथ भी इस पर बात कर रहे हैं. हम चाहते हैं कि भारत और रूस मिलकर इन नए और सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय गलियारों का इस्तेमाल करें’.

क्या है INSTC प्रोजेक्ट और इसमें कहां फंसा है पेच?

पुतिन ने जिस सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का जिक्र किया, उसका नाम है ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC). ये प्रोजेक्ट भारत, ईरान और रूस को आपस में जोड़ने वाला एक मल्टी लेवल ट्रांस्पोर्ट नेटवर्क है. इस रूट में जहाजों, रेल लाइनों और सड़कों का ऐसा तालमेल बनाया गया है, जिससे भारत से रूस तक सामान भेजने का सफर स्वेज़ नहर वाले पारंपरिक रास्ते के मुकाबले बहुत छोटा हो जाएगा. इससे सामान पहुंचने का समय और किराया दोनों लगभग आधे रह जाएंगे.

रूस इस प्रोजेक्ट को लेकर कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुतिन ने इस कॉरिडोर के लिए अपनी तरफ से पैसा और कर्ज देने तक का ऐलान कर दिया है. हालांकि, इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरे होने में एक छोटा सा पेच फंसा हुआ है. पुतिन ने साफ-साफ बताया कि इस प्रोजेक्ट की रफ्तार इस बात पर निर्भर करती है कि ईरान अपनी सीमा के अंदर रेल और सड़क का काम कितनी जल्दी पूरा करता है.

पुतिन के शब्दों में ‘जहां तक नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर की बात है, तो ये अकेले हमारे हाथ में नहीं है. हम इसके निर्माण के लिए जरूरी पैसा और लोन देने के लिए बिल्कुल तैयार हैं. लेकिन इस वक्त हमारे ईरानी दोस्तों को अपने हिस्से का काम जल्द से जल्द पूरा करना होगा’.

इसके साथ ही पुतिन ने राहत की बात ये बताई कि इस कॉरिडोर का जो हिस्सा अज़रबैजान से होकर गुजरता है, वहां काम बहुत तेजी से चल रहा है. अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ बातचीत में कोई अड़चन सामने नहीं आई है और वे इस प्रोजेक्ट के लिए पूरी तरह सहमत हैं.

हिंद महासागर तक रेल नेटवर्क: रूस का नया मास्टरप्लान

होर्मुज की खाड़ी में मची तबाही को देखते हुए रूस सिर्फ एक रास्ते पर निर्भर नहीं रहना चाहता. पुतिन के इस बयान से कुछ समय पहले, अगस्त के महीने में रूस के उप-प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने एक और चौंकाने वाले मास्टरप्लान का जिक्र किया था.

उन्होंने कहा था कि रूस को बोस्फोरस और होर्मुज जैसे खतरनाक समुद्री रास्तों का विकल्प तलाशना ही होगा. इसके लिए रूस को हिंद महासागर तक पहुंचने के लिए एक सीधी रेलवे लाइन बिछाने की संभावनाओं पर काम करना चाहिए. ये रेल नेटवर्क रूस से शुरू होकर तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते सीधे हिंद महासागर तक पहुंच सकता है.

रूस का मानना है कि भारत के बाजार तक पहुंचने के लिए जो भी सुरक्षित रास्ता मिलेगा, रूस उस पर काम करने के लिए तैयार है. ये योजना दिखाती है कि रूस पश्चिमी देशों के व्यापारिक समुद्री रास्तों से अलग हटकर अपना एक सुरक्षित नेटवर्क खड़ा कर रहा है.

‘दोस्त भी हैं और शांतिदूत भी’: पुतिन ने की पीएम मोदी की दिल खोलकर तारीफ

व्यापारिक गलियारों की बात करते-करते रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक कूटनीति की जमकर सराहना की. पुतिन ने कहा कि यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर पीएम मोदी का रुख हमेशा से बेहद संतुलित और शांति को बढ़ावा देने वाला रहा है.

पुतिन ने बेहद सम्मान के साथ कहा कि भारत और रूस के बीच जितने गहरे और मजबूत दोस्ताना रिश्ते हैं, उसके बावजूद पीएम मोदी लगातार युद्ध को रोकने और शांति की बात करते हैं.

पुतिन ने कहा ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन गिने-चुने वैश्विक नेताओं में से हैं, जो हमारे इतने अच्छे और निजी संबंधों के बावजूद हमेशा इस मुद्दे को उठाते हैं और यूक्रेन में चल रही लड़ाई को खत्म करने की बात कहते हैं. उनके पास ऐसे बेहतरीन विचार और सुझाव हैं जो दोनों पक्षों को मंजूर हो सकते हैं. वो इस मामले में पूरी तरह निष्पक्ष हैं, लेकिन दिल से चाहते हैं कि ये जंग जल्द से जल्द खत्म हो. मैं खुले दिल से उनके इन शांति प्रयासों के लिए उनका धन्यवाद करता हूं’.

पुतिन का ये बयान साफ दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का कद कितना बढ़ चुका है. भारत केवल व्यापार करने वाला देश नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी ताकतों के बीच मध्यस्थता करने वाला एक शांतिदूत भी बन चुका है.

भारत के लिए इस नए ट्रेड रूट के 3 सबसे बड़े फायदे-

  1. होर्मुज की दादागीरी से आजादी: अभी तक भारत का ज्यादातर समुद्री व्यापार उन संकरे रास्तों से होकर गुजरता है जिन पर मिडिल ईस्ट के तनाव या अमेरिका की दादागीरी का सीधा असर पड़ता है. नया ट्रेड रूट भारत को एक सुरक्षित और आजाद विकल्प देगा.
  2. समय और पैसे की बड़ी बचत: INSTC के चालू होने से भारत से रूस और मध्य एशिया सामान भेजना 30% से 40% तक सस्ता हो जाएगा. साथ ही, जहां पहले सामान पहुंचने में 40 से 45 दिन लगते थे, वहीं अब केवल 20 से 22 दिनों में डिलीवरी हो जाएगी.
  3. पश्चिमी प्रतिबंधों से सुरक्षा: अमेरिका और यूरोपीय संघ अक्सर अपनी मर्जी से दूसरे देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाते रहते हैं. ये नया कॉरिडोर एक ऐसा आजाद ढांचा होगा जिस पर पश्चिमी देशों का कोई नियंत्रण नहीं होगा, जिससे भारत का व्यापार हमेशा सुरक्षित रहेगा.

होर्मुज की खाड़ी में जारी जंग ने दुनिया को ये एहसास करा दिया है कि पुराने रास्तों के भरोसे बैठकर व्यापार नहीं चलाया जा सकता. ऐसे मोड़ पर रूस का भारत को एक नए और सुरक्षित कॉरिडोर का ऑफर देना केवल दो देशों के फायदे की बात नहीं है, बल्कि ये पूरी दुनिया के व्यापार को एक नया रास्ता दिखाने जैसा है. पुतिन का ये प्रपोजल भारत की आर्थिक ताकत, रणनीतिक सुरक्षा और वैश्विक साख को कई गुना बढ़ा देता है. अगर ईरान अपने हिस्से का काम जल्द पूरा कर लेता है, तो आने वाले दिनों में भारत और रूस का ये नया ट्रेड रूट दुनिया के नक्शे से होर्मुज की दादागीरी को हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर देगा.



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