जबलपुर धान घोटाला: EOW ने हाईकोर्ट में पेश की रिपोर्ट, राज्य सरकार ने जवाब के लिए मांगे 6 हफ्ते

जबलपुर धान घोटाला: EOW ने हाईकोर्ट में पेश की रिपोर्ट, राज्य सरकार ने जवाब के लिए मांगे 6 हफ्ते


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Jabalpur Dhan Scam: जबलपुर में करीब 43 करोड़ रुपये के कथित धान घोटाले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. EOW ने अपनी कम्प्लायंस रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी है. वहीं, राज्य सरकार और कॉरपोरेशन को जवाब दाखिल करने के लिए 6 सप्ताह का समय मिला है. याचिका में CBI या CID जांच की मांग उठाई गई है.

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सांकेतिक तस्वीर.

Jabalpur News: जबलपुर में चारा घोटाले की तर्ज पर हुए कथित 43 करोड़ रुपये के धान घोटाले में हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान EOW ने कोर्ट में अपनी कम्प्लायंस रिपोर्ट पेश कर दी है. वहीं राज्य सरकार और सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन ने जवाब और रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की.

इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और कॉरपोरेशन को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया है. साथ ही अदालत ने आदेश दिया है कि EOW द्वारा पेश की गई कम्प्लायंस रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उपलब्ध कराई जाए. मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय की गई है.

वर्ष 2023-24 का धान और चावल घोटाला
मामले के अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय बताया कि यह पूरा मामला वर्ष 2023-24 के दौरान धान और चावल की खरीदी में हुई भारी गड़बड़ियों से जुड़ा हुआ है. जबलपुर में गड़बड़ी सामने आने के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने बड़े पैमाने पर जांच की थी. उस समय अकेले जबलपुर जिले में ही करीब 90 से 91 एफआईआर दर्ज कराई गई थीं.

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि यह घोटाला केवल एक जिले तक सीमित नहीं है. यह गड़बड़ी पूरे प्रदेश स्तर की हो सकती है. इसके बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के 28 जिला कलेक्टरों को जांच के निर्देश जारी किए थे. सरकार ने सभी कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में धान खरीदी की पूरी जांच करने और 7 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे.

कोर्ट के सख्त निर्देश पर EOW ने दी रिपोर्ट
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले पर सख्त रुख अपनाया था. कोर्ट ने 28 जिलों के कलेक्टरों, सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन और EOW को अपनी-अपनी एक्शन व स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था. इसी निर्देश के पालन में EOW ने अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंपी. EOW ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के 4 जिलों में लगभग 20 से 40 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. इनमें से कुछ मामलों में जांच जारी है और कुछ में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है. वहीं, राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 28 जिलों से डेटा एकत्र किया जा रहा है, जिसमें थोड़ा समय लग रहा है.

CBI या CID जांच की उठ रही मांग
यह जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से डॉ. पीजीनाथ पांडे और डीआर लखेरा द्वारा दायर की गई है. मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय पैरवी कर रहे हैं. याचिका में मांग की गई कि इस बड़े घोटाले की निष्पक्ष जांच CBI या CID से कराई जाए.



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