‘कंजूस’ नहीं दरियादिल थे संजीव कुमार, पेट के खातिर कीं C-ग्रेड फिल्में, दोस्तों को दिए ₹96 लाख, कभी नहीं मांगे वापस

‘कंजूस’ नहीं दरियादिल थे संजीव कुमार, पेट के खातिर कीं C-ग्रेड फिल्में, दोस्तों को दिए ₹96 लाख, कभी नहीं मांगे वापस


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Sanjeev Kumar Was Generous Not Miser: शोहरत की ऊंचाइयों तक पहुंचने वाले दिग्गज एक्टर संजीव कुमार यानी ‘हरी भाई’ ने कभी बेहद तंगहाली में भी दिन गुजारे थे. काम की तलाश में उन्हें छोटे बजट की फिल्मों का हिस्सा बनना पड़ा. लेकिन वक्त बदला और संजीव बॉलीवुड के बड़े सितारों में शामिल हो गया. खास बात ये रही कि दौलत आने के बाद भी उनका दिल छोटा नहीं हुआ. दोस्तों की मदद में उन्होंने लाखों रुपये खर्च किए.

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा में कुछ सितारे ऐसे रहे हैं, जिनकी अदाकारी ने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया. संजीव कुमार उन्हीं नाम में से एक है. कभी पर्दे पर कभी गंभीर तो कभी बेहद सहज अंदाज में नजर आने वाले संजीव कुमार ने अपनी जिंदगी में पैसों की तंगी भी देखी और शोहरत के शिखर तक भी पहुंचे. शुरुआती दिनों में हालात ऐसे थे कि परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें जैसी फिल्में मिलती थीं, वे कर लेते थे. लेकिन जब कामयाबी मिली तो ये दिग्गज एक्टर अपने दोस्तों की मदद के लिए बिना हिसाब-किताब के लाखों रुपये देने लगा. असल में वो कंजूस नहीं बल्कि दरियादिल थे. फोटो साभार-@IMDb

संजीव कुमार को बॉलीवुड में ‘हरी भाई’ के नाम से भी जाना जाता था. ‘शोले’, ‘आंधी’, ‘त्रिशूल’, ‘कोशिश’ और ‘मौसम’ जैसी फिल्मों में अपनी अदाकारी से उन्होंने खास पहचान बनाई. लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था. फिल्म पत्रकार हनीफ जावेरी ने ‘मेरी सहेली पॉडकास्ट’ पर बातचीत के दौरान संजीव कुमार के शुरुआती स्ट्रगल के बारे में खुलकर बात की. फोटो साभार-@IMDb

हनीफ जावेरी ने इस बातचीत में बताया, ‘जब संजीव फिल्मों में काम तलाश रहे थे, तब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी. उनकी मां, पिता के घाटे में चल रहे कारोबार को संभाल रही थीं. संजीव के पास पहनने के लिए केवल दो जोड़ी कपड़े थे. ऐसे में परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए उन्होंने मिलने वाले काम को करने का फैसला किया. हनीफ ने बताया कि संजीव को शायद यह भी अंदाजा नहीं था कि वे जिन फिल्मों में काम कर रहे हैं, वे C-ग्रेड श्रेणी की हैं. उस वक्त उनके लिए काम मिलना और पैसे कमाना ज्यादा जरूरी था. फाइल फोटो. 

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संजीव कुमार को लेकर अकसर कहा जाता था कि वे काफी कंजूस थे. लेकिन हनीफ जावेरी ने इस धारणा को गलत बताया. उनके मुताबिक, संजीव ने अपने दोस्तों को करीब 96 लाख रुपये उधार दिए थे, जो उन्हें कभी वापस नहीं मिले. उन्होंने अपने ड्राइवर की शादी का खर्च भी उठाया था और एक दोस्त को कार तक गिफ्ट की थी. फोटो साभार-@IMDb

उन्होंने बताया इतना ही नहीं, संजीव कुमार ने अपनी वसीयत में ड्राइवर के बेटे की पढ़ाई के लिए भी दो लाख रुपये रखे थे. हनीफ ने कहा कि जो व्यक्ति दूसरों पर इस तरह पैसा खर्च करता हो, उसे कंजूस कहना सही नहीं है. लेकिन संजीव बस फिजूलखर्ची के खिलाफ थे. फोटो साभार-@IMDb

हनीफ ने बताया कि संजीव कुमार की दोस्ती शत्रुघ्न सिन्हा के साथ बेहद गहरी थी. जब शत्रुघ्न को पैसों की जरूरत पड़ी तो संजीव ने खुद आगे बढ़कर उनकी मदद की. उन्होंने करीब पांच से सात लाख रुपये दिए थे. यह मदद उन्होंने बिना किसी औपचारिक मांग के की थी. फोटो साभार- रेडिट

इसी तरह, बोनी कपूर को भी जरूरत के वक्त संजीव ने पैसे दिए थे. इस लेन-देन का कोई दस्तावेज नहीं बनाया गया था और संजीव के परिवार को भी इसकी जानकारी नहीं थी. संजीव के निधन के बाद बोनी कपूर ने वह रकम उनके परिवार को लौटा दी. फोटो साभार- रेडिट

संजीव कुमार की पर्सनल जिंदगी भी काफी चर्चा में रही. उनकी जिंदगी में हेमा मालिनी और नूतन के साथ रिश्तों के किस्से जुड़े रहे. बाद में सुलक्षणा पंडित भी उनसे प्यार करने लगी थीं. हालांकि, हनीफ जावेरी के मुताबिक, संजीव सुलक्षणा को पसंद करते थे, लेकिन उनसे शादी नहीं करना चाहते थे. फोटो साभार-@IMDb

हनीफ ने बताया कि संजीव को लगता था कि उनकी जिंदगी ज्यादा लंबी नहीं होगी. उनके परिवार में पुरुषों की मौत 50 साल की उम्र से पहले हो गई थी. इसके अलावा, सुलक्षणा से मिलने तक उन्हें दो बार हार्ट अटैक आ चुका था. इसी वजह से उन्हें डर था कि वे भी कम उम्र में दुनिया छोड़ देंगे. वह किसी से शादी करके उसकी जिंदगी दुखों से नहीं भरना चाहते थे. उन्होंने बताया कि यही संजीव की शादी न करने की सबसे बड़ी वजह थी. फोटो साभार-@IMDb

संजीव कुमार ने 6 नवंबर 1985 को महज 47 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया था. पर्दे पर अपनी हर सांस से किरदारों में जान फूंकने वाले इस अजीम कलाकार की दास्तान सिर्फ शोहरत, कामयाबी और तालियों तक सीमित नहीं थी. उनकी असली जिंदगी संघर्षों के कांटे, रिश्तों की गहराई, बेपनाह दर्द और दिल खोलकर लुटाए गए प्यार की एक ऐसी मिसाल है, जो भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा अमर रहेगी. फोटो साभार-@IMDb

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