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IAS Dr. Bhagchand Badhal Success Story: जयपुर ग्रामीण के बधाल गांव के रहने वाले डॉ. भागचंद बधाल का आरएएस से आईएएस में प्रमोशन हुआ है. सामान्य किसान परिवार से आने वाले डॉ. बधाल ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और मेहनत के दम पर प्रशासनिक सेवा में अपनी पहचान बनाई. वे मुख्यमंत्री के ओएसडी के साथ-साथ राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड के सचिव और कर्मचारी बीमा विभाग के निदेशक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. वर्तमान में वे जेडीए में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए ‘कैसे बनते हैं आरएएस’ पुस्तक भी लिखी है. उनकी उपलब्धि की जानकारी मिलने के बाद बधाल गांव और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल है.
एक सामान्य किसान परिवार से निकलकर सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने वाले डॉ. भागचंद बधाल ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर प्रशासनिक सेवा में नई पहचान बनाई है. जयपुर ग्रामीण के बधाल गांव के रहने वाले डॉ. भागचंद का आरएएस से आईएएस में उनका प्रमोशन हुआ है. जैसे ही गांव बधाल और आसपास के ग्रामीणों को उनकी इस उपलब्धि की जानकारी मिली, खुशी का माहौल बन गया. ग्रामीण इसे न केवल डॉ. भागचंद की व्यक्तिगत सफलता, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की उपलब्धि बता रहे हैं.
डॉ. बधाल की कहानी खास इसलिए है, क्योंकि उनका शुरुआती सफर किसी बड़े शहर या महंगे शिक्षण संस्थान से नहीं, बल्कि गांव और सरकारी स्कूल से शुरू हुआ. सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और मेहनत, अनुशासन व लगन को अपनी ताकत बनाया. इसके बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई.
प्रशासनिक सेवा में आने के बाद डॉ. भागचंद ने अलग-अलग पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं. वे मुख्यमंत्री के ओएसडी के तौर पर भी काम कर चुके हैं. इसके अलावा राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड के सचिव और कर्मचारी बीमा विभाग के निदेशक जैसी जिम्मेदारियां भी संभालीं. कई बार उपखंड अधिकारी के पद पर रहते हुए भी उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाई. वर्तमान में डॉ. बधाल जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं.
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डॉ. भागचंद ने प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने वाले युवाओं के मार्गदर्शन के लिए कैसे बनते हैं आरएएस नाम से पुस्तक भी लिखी है. इस पुस्तक में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, पढ़ाई की रणनीति और सफलता से जुड़े जरूरी सुझाव दिए गए हैं. उनका उद्देश्य यह रहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को सही दिशा और व्यावहारिक मार्गदर्शन मिल सके. डॉ. भागचंद की व्यक्तिगत सफलता, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की उपलब्धि बता रहे हैं.
डॉ. बधाल की सफलता की कहानी केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है. ग्रामीणों के मुताबिक, वे जरूरतमंद और प्रतिभावान विद्यार्थियों की मदद भी करते रहे हैं. जयपुर में पढ़ाई करने वाले ऐसे विद्यार्थियों को आवास, फीस और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में उन्होंने सहयोग किया है.
ग्रामीणों का कहना है कि किसान परिवार से निकलकर सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने वाले डॉ. बधाल का आरएएस से आईएएस तक पहुंचना गांव के उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखते हैं. ग्रामीणों के अनुसार, अलग-अलग पदों पर काम करते हुए उनकी कार्यशैली, व्यवहार और प्रशासनिक अनुभव की अलग पहचान बनी है.