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Dehradun News: करीब 340 साल पहले गुरु गोविंद सिंह देहरादून पहुंचे थे. यह आगमन बाबा राम राय के निधन के बाद गद्दी को लेकर पैदा हुए विवाद और दरबार में बढ़ी अशांति के बीच हुआ था. बताया जाता है कि बाबा राम राय की पत्नी माता पंजाब कौर ने मदद के लिए गुरु गोविंद सिंह को पत्र भेजा था, जिसके बाद गुरु साहिब पांवटा साहिब से अपने 500 से ज्यादा अनुयायियों के साथ देहरादून आए. यहां उन्होंने विवाद और अन्याय के मामलों में हस्तक्षेप कर व्यवस्था संभाली और इसके बाद वापस पांवटा साहिब लौट गए. गुरु गोविंद सिंह के इस ऐतिहासिक आगमन की याद में इस बार देहरादून में तीन दिवसीय गुरमत समागम, बाइक रैली और खालसाई मोहल्ले का आयोजन किया जा रहा है.
देहरादून: दून का इतिहास सिख धर्म से भी गहराई से जुड़ा है. करीब 340 साल पहले गुरु गोविंद सिंह देहरादून आए थे. उस समय बाबा राम राय के निधन के बाद उनकी गद्दी को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. हालात ऐसे बन गए थे कि दरबार में बैठे कुछ मसांद सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश करने लगे. ऐसे समय में बाबा राम राय की पत्नी माता पंजाब कौर ने पांवटा साहिब संदेश भेजकर गुरु गोविंद सिंह से मदद मांगी.
माता पंजाब कौर का संदेश मिलते ही गुरु गोविंद सिंह देहरादून के लिए रवाना हुए. बताया जाता है कि वह अपने 500 से ज्यादा अनुयायियों के साथ यहां पहुंचे थे. देहरादून पहुंचकर उन्होंने पूरे मामले में दखल दिया और दरबार में चल रही साजिशों को खत्म कर व्यवस्था ठीक की. गुरु साहिब के इस सहयोग से माता पंजाब कौर को भी हिम्मत मिली और वह आगे कई साल तक दरबार का काम संभालती रहीं.
बाबा राम राय के आने के बाद पड़ा देहरादून नाम
जत्था अकाली बाबा फतेह सिंह दल के सेवादार प्रेम सिंह बताते हैं कि गुरु गद्दी को लेकर हुए मतभेद के बाद बाबा राम राय पंजाब छोड़कर दून घाटी आ गए थे. उन्होंने अपने अनुयायियों के साथ यहां डेरा बनाया. इसी वजह से इस जगह का नाम देहरादून पड़ा. इसके बाद बाबा राम राय का अचानक निधन हो गया. उनकी मृत्यु के बाद गद्दी को लेकर विवाद शुरू हो गया. इसी दौरान माता पंजाब कौर ने गुरु गोविंद सिंह को पत्र भेजकर मदद मांगी थी.
पांवटा साहिब से देहरादून आए थे गुरु गोविंद सिंह
प्रेम सिंह के मुताबिक दसवीं पातशाही श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज माता पंजाब कौर की मदद के लिए पांवटा साहिब से देहरादून आए थे. उनका कहना है कि गुरु साहिब ने यहां आकर धर्म, न्याय और मर्यादा की रक्षा की और विवाद को शांत कराया. बताया जाता है कि गुरु गोविंद सिंह 3 से 4 अक्टूबर के आसपास देहरादून आए थे. वह अपने 500 से ज्यादा अनुयायियों के साथ यहां पहुंचे थे. इसके बाद वह जरूरी कार्रवाई पूरी करके वापस पांवटा साहिब के लिए रवाना हो गए.
340 साल पूरे होने पर होगा तीन दिवसीय आयोजन
गुरु गोविंद सिंह के देहरादून आगमन के 340 साल पूरे होने पर जत्था अकाली बाबा फतेह सिंह दल की ओर से पहली बार यहां बड़ा आयोजन किया जा रहा है. 2 अक्टूबर से तीन दिवसीय गुरमत समागम, बाइक रैली और खालसाई मोहल्ला आयोजित किया जाएगा. आयोजकों का कहना है कि इस कार्यक्रम का मकसद नई पीढ़ी को गुरु गोविंद सिंह और देहरादून से जुड़े इस इतिहास के बारे में जानकारी देना है. कार्यक्रम में उत्तराखंड के अलावा विदेशों से भी लोग पहुचेंगे.