महाकुंभ की वायरल गर्ल को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव का आदेश किया रद्द

महाकुंभ की वायरल गर्ल को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव का आदेश किया रद्द


मिथिलेश गुप्ता/इंदौर. महाकुंभ-2025 के दौरान अपनी तस्वीरों और वीडियो की वजह से सुर्खियों में आईं मोनालिसा भोंसले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने मोनालिसा के जन्म प्रमाण पत्र में बदलाव करने से जुड़े नगर पालिका के आदेश को रद्द कर दिया है.

कोर्ट ने साफ कहा कि किसी नागरिक के अधिकारों या हितों पर असर डालने वाली कार्रवाई करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना जरूरी है. अदालत ने मामले को दोबारा संबंधित अधिकारी के पास भेजते हुए मोनालिसा के पिता के आवेदन पर नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया है.

क्या है पूरा मामला?
महाकुंभ के दौरान मोनालिसा भोंसले सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हुई थीं. इसके बाद उनकी शादी और उम्र से जुड़ा मामला सामने आया. मार्च 2026 में उनकी अंतरधार्मिक शादी के समय उनकी उम्र को लेकर सवाल उठे और उनके पति के खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए. मामला सामने आने के बाद मोनालिसा के जन्म प्रमाणपत्र की जानकारी भी जांच के दायरे में आई. मोनालिसा के पिता ने महेश्वर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को आवेदन देकर बताया था कि उनकी बेटी का जन्म 1 जनवरी 2009 को महेश्वर में हुआ था.

अस्पताल की ओर से जारी जन्म संबंधी प्रमाणपत्र नगर पालिका के रजिस्ट्रार को भेजा गया. इसके बाद जन्म संबंधी रिकॉर्ड में बदलाव किया गया और पहले दर्ज जानकारी को रद्द कर नई तारीख दर्ज कर दी गई.

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया आदेश?
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि जन्म संबंधी रिकॉर्ड में बदलाव करने से पहले मोनालिसा को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया था. जस्टिस गजेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य या किसी सार्वजनिक प्राधिकरण की ऐसी कार्रवाई, जिससे किसी नागरिक के हित प्रभावित होते हो, उसे बिना सुनवाई का मौका दिए नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने माना कि बिना प्रभावी सुनवाई के रिकॉर्ड में बदलाव करना उचित प्रक्रिया नहीं है.

नगर पालिका का आदेश रद्द
हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने खरगोन जिले के महेश्वर नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा जारी आदेश को रद्द कर दिया. अदालत ने संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि मोनालिसा के पिता के आवेदन पर अब नए सिरे से विचार किया जाए. इस दौरान संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर भी दिया जाए.

स्कूल रिकॉर्ड समेत दूसरे दस्तावेज भी मौजूद
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह भी आया कि मोनालिसा की उम्र और जन्म तिथि से जुड़े अन्य दस्तावेज उपलब्ध हैं. इनमें स्कूल रिकॉर्ड भी शामिल हैं. अदालत ने माना कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के आधार पर जन्मतिथि से जुड़े विवाद का उचित तरीके से समाधान किया जा सकता है.

मोनालिसा की ओर से क्या दलील दी गई?
मोनालिसा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कोर्ट में पक्ष रखा. उन्होंने दलील दी कि जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव की कार्रवाई व्यापक अटकलों के आधार पर की गई. उनकी ओर से यह भी कहा गया कि जन्म प्रमाणपत्र रद्द करने और दूसरी जन्मतिथि दर्ज करने के बाद मोनालिसा की उम्र को लेकर ऐसा विवाद पैदा हुआ, जिसका असर उनके पति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले पर भी पड़ा.

सरकार की ओर से क्या कहा गया?
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि जन्मतिथि से जुड़ा वास्तविक विवाद संबंधित रजिस्ट्रार के स्तर पर नए सिरे से तय किया जाना चाहिए. हाईकोर्ट ने भी मामले को दोबारा संबंधित अधिकारी के पास भेजते हुए नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है.

अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े विवाद पर अब संबंधित अधिकारी दोबारा सुनवाई करेंगे. उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों को सुनने के बाद जन्म संबंधी रिकॉर्ड को लेकर फैसला लिया जाएगा. यानी फिलहाल हाईकोर्ट ने जन्मतिथि को अंतिम रूप से तय नहीं किया है, बल्कि पहले की प्रशासनिक कार्रवाई को रद्द कर मामले की दोबारा सुनवाई का रास्ता साफ किया है.



Source link