Jitiya 2026 Date 3 or 4 October: जितिया का निर्जला व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखते हैं, लेकिन इस साल जितिया व्रत 3 अक्टूबर को है या फिर 4 अक्टूबर को? जितिया की तारीख को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन की स्थिति है क्योंकि जितिया की अष्टमी तिथि 3 और 4 अक्टूबर को दोनों ही दिन प्राप्त हो रही है. ऐसे में आम लोगों को निश्चित कर पाना आसान नहीं है कि जितिया का व्रत कब रखा जाए? आपको भी जितिया व्रत की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति है तो पंचांग से जानते हैं जितिया की सही तारीख, मुहूर्त और पारण समय के बारे में. जितिया को जिउतिया और जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहते हैं.
जितिया 2026 3 या 4 अक्टूबर?
जितिया की सही तारीख जानने के लिए आपको सबसे पहले पंचांग में आश्विन कृष्ण अष्टमी की सही तिथि का ज्ञान करना होगा. पंचांग के अनुसार, जितिया के लिए अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह में 7 बजकर 59 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगी, लेकिन उस दिन उदयातिथि नहीं होगी क्योंकि सूर्योदय के बाद ही अष्टमी तिथि शुरू हो रही है.
वहीं अष्टमी तिथि का समापन 4 अक्टूबर को सुबह में 5 बजकर 51 मिनट पर हो जाएगा. अब समस्या यह है कि 4 अक्टूबर को सूर्योदय से पहले ही अष्टमी तिथि खत्म हो जा रही है.
ऐसे में जितिया व्रत की तारीख का निर्धारण प्रदोष पूजा मुहूर्त के आधार पर करते हैं क्योंकि इस व्रत में पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होती है. इस आधार पर देखा जाए तो जितिया व्रत के लिए प्रदोष काल 3 अक्टूबर को प्राप्त होगा, न कि 4 अक्टूबर को.
ऐसे में इस साल जितिया व्रत 3 अक्टूबर, दिन शनिवार को रखा जाएगा. प्रदोष मुहूर्त के अलावा सुबह में 7:59 बजे से अष्टमी तिथि रहेगी.
जितिया मुहूर्त 2026
जितिया के लिए पूजा का प्रदोष मुहूर्त शाम 6:05 बजे से प्रारंभ है. इस मुहूर्त से माताएं गंधर्व राजा जीमूतवाहन की पूजा करेंगी. उस समय राजा जीमूतवाहन की कथा सुनती हैं, कई स्थानों पर शाल और चील-सियारिन की कथा भी सुनते हैं.
जितिया के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:38 ए एम से 05:26 ए एम तक रहेगा, वहीं अभिजीत मुहूर्तत्र 11:46 ए एम से दोपहर 12:34 पी एम तक है.
जितिया व्रत का पारण समय
इस साल जो माताएं जितिया का निर्जला व्रत रखेंगी, वो 4 अक्टूबर को सूर्योदय बाद यानि सुबह 06:15 ए एम के बाद पारण करके व्रत को पूरा कर सकती हैं.
जितिया व्रत क्यों रखते हैं?
जितिया का निर्जला व्रत माताएं अपनी संतान के सुरक्षित और सुखी जीवन के लिए रखती हैं. इस दिन संतान प्राप्ति के लिए भी व्रत रखते हैं. महिलाएं व्रत रखकर भगवान वासुदेव की पूजा करती हैं. खीर और घी की आहुति देती हैं, उनको संतान सुख मिलता है. लेकिन यह व्रत पूरे वर्ष अष्टमी को करना होता है.