Defence Deal: अमेर‍िका का ‘अदृश्य’ फाइटर जेट F/A-XX, जो समंदर से उड़कर करेगा श‍िकार, पेंटागन की बोइंग से डील

Defence Deal: अमेर‍िका का ‘अदृश्य’ फाइटर जेट F/A-XX, जो समंदर से उड़कर करेगा श‍िकार, पेंटागन की बोइंग से डील


समुद्र के बीचोंबीच एक विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात है. उसके डेक पर लड़ाकू विमान तैयार खड़े हैं. लेकिन सामने वाला दुश्मन इतना दूर है कि मौजूदा विमानों के लिए वहां तक पहुंचना और लंबे समय तक लड़ाई जारी रखना आसान नहीं. ऊपर से खतरा ऐसे देश का है, जो लगातार अपने नए लड़ाकू विमान और सैन्य तकनीक विकसित कर रहा है. अमेरिका इसी चुनौती का जवाब तैयार करने में जुटा है. उसकी नेवी को एक ऐसा नया लड़ाकू विमान चाहिए, जो दुश्मन की नजरों से बचते हुए लंबी दूरी तक जा सके और भविष्य की हवाई लड़ाई में अहम भूमिका निभाए.

इसी मिशन के लिए अमेरिका ने बोइंग को चुना है. अमेरिकी नौसेना के अगले दौर के स्टील्थ फाइटर विमान F/A-XX को विकसित करने के लिए कंपनी को 1.8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का शुरुआती विकास ठेका मिला है. यह सिर्फ एक नए विमान का निर्माण नहीं है. इसके पीछे अमेरिका की सैन्य रणनीति, चीन से मुकाबले की तैयारी और भविष्य की हवाई ताकत की पूरी कहानी छिपी है.

आखिर F/A-XX में ऐसा क्या है?

F/A-XX अमेरिकी नौसेना का अगली पीढ़ी का लड़ाकू विमान है. इसे छठी पीढ़ी के फाइटर प्रोग्राम का हिस्सा माना जा रहा है. इसका मकसद मौजूदा F/A-18E/F Super Hornet विमानों की जगह लेना है, जो 1990 के दशक से अमेरिकी नौसेना की ताकत का हिस्सा रहे हैं.

अमेरिकी नौसेना को ऐसे विमान की जरूरत है, जो एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भर सके और समुद्र से दूर स्थित लक्ष्यों तक पहुंचने में मदद करे. आधुनिक युद्ध में यह दूरी बेहद अहम हो गई है. दुश्मन के पास लंबी दूरी की मिसाइलें और उन्नत रडार हों, तो एयरक्राफ्ट कैरियर को भी खतरे से दूर रखना पड़ता है. ऐसे में लड़ाकू विमान की पहुंच और उसकी सुरक्षित वापसी की क्षमता महत्वपूर्ण हो जाती है.

F/A-XX से लंबी दूरी तक अभियान चलाने, दुश्मन की निगरानी से बचने और बिना पायलट वाले लड़ाकू विमानों के साथ काम करने जैसी क्षमताओं की उम्मीद है. हालांकि, इसकी पूरी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. इसलिए इसकी वास्तविक रफ्तार, हथियारों की क्षमता और स्टील्थ तकनीक के सटीक आंकड़ों को लेकर अभी दावे करना जल्दबाजी होगी.

अमेरिका को क्यों चाहिए ऐसा विमान?

  1. मामला प्रशांत महासागर से जुड़ता है. चीन लगातार अपने सैन्य विमान और हवाई युद्ध की क्षमताएं बढ़ा रहा है. ऐसे में अमेरिका को डर है कि भविष्य में अगर दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बनती है, तो उसके पुराने विमान हर परिस्थिति में पर्याप्त साबित नहीं होंगे.
  2. अमेरिकी नौसेना की ताकत का बड़ा हिस्सा एयरक्राफ्ट कैरियर पर आधारित है. ये विशाल युद्धपोत समुद्र में चलते-फिरते सैन्य अड्डे की तरह काम करते हैं. इनसे लड़ाकू विमान उड़ान भरते हैं और दूर के इलाकों में सैन्य अभियान चलाए जा सकते हैं.
  3. लेकिन आधुनिक युद्ध में सिर्फ ज्यादा विमान होना काफी नहीं है. विमान को दुश्मन के रडार से बचना होगा, ज्यादा दूरी तय करनी होगी और बदलते हालात में दूसरे विमानों व सैन्य प्रणालियों के साथ मिलकर काम करना होगा.
  4. यही वजह है कि अमेरिका F/A-XX जैसे नए विमान पर पैसा लगा रहा है. इसका उद्देश्य चीन को लेकर किसी एक युद्ध की तैयारी करना भर नहीं, बल्कि आने वाले दशकों में अमेरिकी नौसेना की हवाई क्षमता को बनाए रखना भी है.

बोइंग ने किसे पीछे छोड़ा?

इस ठेके की दौड़ में बोइंग के सामने Northrop Grumman थी. दोनों कंपनियां अमेरिकी रक्षा उद्योग की बड़ी खिलाड़ी हैं. आखिरकार पेंटागन ने बोइंग को चुना. बोइंग के पक्ष में उसका पुराना अनुभव भी रहा. कंपनी अमेरिकी नौसेना के लिए F/A-18E/F सुपर हार्नेट जैसे विमान बनाती रही है. नया F/A-XX इसी पुराने विमान की जगह लेने के लिए तैयार किया जा रहा है.

हालांकि, बोइंग की राह आसान नहीं थी. अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के सामने यह सवाल था कि क्या कंपनी एक साथ दो बेहद जटिल छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम संभाल सकती है? एक तरफ अमेरिकी वायुसेना के लिए F-47 और दूसरी तरफ नौसेना के लिए F/A-XX.

दोनों परियोजनाओं में बड़े इंजीनियरिंग संसाधन, प्रशिक्षित कर्मचारी, खास तकनीक और मजबूत सप्लाई चेन चाहिए. अगर इनमें fighter jetसे किसी एक में भी देरी होती है, तो लागत बढ़ सकती है और सेना को विमान मिलने में समय लग सकता है. बोइंग का कहना है कि उसने नई उत्पादन सुविधाओं और कर्मचारियों में निवेश किया है. कंपनी के मुताबिक, वह दोनों कार्यक्रमों पर एक साथ काम करने के लिए तैयार है.

बोइंग के लिए यह ठेका इतना बड़ा क्यों है?

  • बोइंग को पिछले कुछ वर्षों में लड़ाकू विमान कारोबार को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था. अब लगातार दो बड़े अमेरिकी फाइटर प्रोग्राम में चयन से उसके रक्षा कारोबार को बड़ा सहारा मिला है.
  • मार्च 2025 में अमेरिकी वायुसेना के नए F-47 स्टील्थ फाइटर कार्यक्रम के लिए भी बोइंग को चुना गया था. अब F/A-XX का ठेका मिलने के बाद कंपनी दोनों अमेरिकी सैन्य सेवाओं के लिए अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की जिम्मेदारी संभालेगी.
  • इससे कंपनी के सेंट लुइस स्थित लड़ाकू विमान उत्पादन केंद्र को भी फायदा हो सकता है. वहां Super Hornet और EA-18G Growler विमानों की उत्पादन लाइनें बंद होने की तैयारी थी. नए कार्यक्रम से भविष्य में इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों और सप्लायर कंपनियों के लिए काम बना रह सकता है.
  • हालांकि, 20 अरब डॉलर के विकास ठेके को कंपनी की तत्काल कमाई नहीं समझना चाहिए. यह परियोजना के विकास और परीक्षण से जुड़ी रकम है. विमान की बड़े पैमाने पर खरीद और लंबे समय तक उत्पादन का खर्च इससे अलग हो सकता है.
  • पूरे कार्यक्रम की लागत आने वाले वर्षों में काफी बढ़ सकती है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने विमान बनाए जाते हैं, विकास में कितना समय लगता है और आगे चलकर दूसरे देशों से कोई ऑर्डर मिलता है या नहीं.

अकेले ही बदल देगा युद्ध का तरीका

F/A-XX को 2030 के दशक में सेवा में लाने की उम्मीद है. उससे पहले विमान का विकास, परीक्षण, हथियार प्रणालियों के साथ तालमेल और दूसरे सैन्य प्लेटफॉर्म के साथ काम करने की क्षमता साबित करनी होगी. अमेरिकी नौसेना चाहती है कि नया विमान बिना पायलट वाले लड़ाकू विमानों के साथ भी काम कर सके. भविष्य की हवाई लड़ाई में एक पायलट वाला विमान कई मानवरहित विमानों के साथ मिलकर मिशन पूरा कर सकता है. इन मानवरहित विमानों का इस्तेमाल निगरानी, खतरे का पता लगाने और अन्य सैन्य कामों में किया जा सकता है. लेकिन F/A-XX के लिए ऐसी क्षमताओं का पूरा ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं है.  नौसेना अपने बेड़े में Lockheed Martin के F-35C विमानों को भी शामिल करती रहेगी. योजना है कि भविष्य में F-35C और F/A-XX साथ काम करें. यानी नया विमान आने के बाद भी मौजूदा आधुनिक लड़ाकू विमानों की भूमिका खत्म नहीं होगी.



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