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PM Dhara Scheme : केंद्रीय कैबिनेट ने ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पीएम धारा नाम से नई योजना शुरू की है. इस योजना के तहत कुल 1.86 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसमें से 54 हजार करोड़ रुपये तो सिर्फ केंद्र सरकार से ही मिलेंगे और बाकी पैसे राज्यों को लगाने होंगे. योजना का फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा, क्योंकि पीक ऑवर में बिजली सप्लाई की व्यवस्था में सुधार आने के साथ ही बैटरी स्टोरेज सुविधा से कटौती में भी कमी आएगी.
पीएम धारा स्कीम को साल 2035 तक पूरा कर लिया जाएगा.
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को एनर्जी सेक्टर के लिए बड़ी योजना पर मुहर लगाई. कैबिनेट ने पीएम धारा नाम से नई योजना शुरू करने का ऐलान किया है. इस योजना का मकसद राज्यों में ग्रीन एनर्जी के ट्रांसमिशन सिस्टम को बेहतर बनाना है. ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3 (GEC-III) नाम से शुरू की जाने वाली इस योजना पर करीब 1.86 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है. इसका का लक्ष्य 5 साल में देशभर के तमाम राज्यों में बैटरी सेविंग और ग्रीन एनर्जी का इन्फ्रा तैयार करना है.
कैबिनेट ने अपने फैसले में कहा है कि योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता विकसित की जाएगी. साथ ही 50 गीगावाट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी लगाया जाएगा. योजना के तहत बैटरी स्टोरेज से जरूरत के समय बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और सौर ऊर्जा की अनियमितता की समस्या कम होगी. इस योजना को वित्तवर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. योजना के तहत 51,126 किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का प्रस्ताव है.
कितना आएगा योजना पर पूरा खर्च
कैबिनेट की ओर से प्रस्तावित GEC-III योजना पर कुल मिलाकर करीब 1.86 लाख करोड़ खर्च होंगे. इसमें से 1,36,378 करोड़ राज्यों के अंदर ट्रांसमिशन सिस्टम विकसित करने पर खर्च होंगे और 50,000 करोड़ 50 गीगावाट बैटरी स्टोरेज सिस्टम पर खर्च किए जाएंगे. इस योजना के लिए केंद्र सरकार की तरफ से कुल 54,082 करोड़ की वित्तीय मदद दी जाएगी. इस सहायता से ट्रांसमिशन का खर्च कम रखने में मदद मिलेगी, जिसका फायदा आखिरकार बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा.
उपभोक्ताओं को कैसे मिलेगा फायदा
बैटरी स्टोरेज से पीक टाइम में बिजली की जरूरत, ग्रिड में भीड़ और बिजली की कमी जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी. इस योजना का मकसद सूरज नहीं निकलने पर भी सोलर एनर्जी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और इसमें मदद करना है.
यह योजना साल 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी. सरकार के मुताबिक, इससे देश की लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत होगी. इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी.
किस तरह की चुनौतियों में मिलेगी मदद
बैटरी की स्टोरेज किए जाने से पीक ऑवर में रुक-रुक कर होने वाली सप्लाई और कटौती से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी. केंद्र से मिलने वाले पैसों की मदद से राज्यों के बीच बिजली सप्लाई पर आने वाला खर्चा कम हो सकेगा. इसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा. योजना के तहत सभी ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स को टैरिफ-बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग (TBCB) मोड से लागू किया जाएगा, जबकि ब्राउनफील्ड अपग्रेडेशन और नेटवर्क को मज़बूत करने के काम ‘कॉस्ट प्लस बेसिस’ (CPB) के तहत किए जाएंगे. राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटीज (STUs) इसकी मुख्य एजेंसी होंगी और ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर्स (TSPs) TBCB के तहत ‘बिल्ड-ऑन-ऑपरेट-मेंटेन’ (BOOM) मॉडल पर काम करेंगे.
बंपर रोजगार भी पैदा होंगे
यह योजना लंबे समय तक देश की ऊर्जा सुरक्षा में भी योगदान देगी. इससे बिजली सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के मैन्युफैक्चरिंग और इस्तेमाल से घरेलू एनर्जी स्टोरेज इंडस्ट्री में भी रोजगार के अवसर बनेंगे. साथ ही यह स्कीम राज्यों में ऑपरेशन, मेंटेनेंस और ग्रिड मैनेजमेंट के क्षेत्रों में लंबे समय के लिए कुशल रोजगार भी पैदा करेगी.