महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है. यहां दो कलयुगी मां-बाप ने अपने एक महीने के बच्चे को पैसे के लिए बेच दिया. और फिर बच्चे को बेचने के बाद मिले पैसों से सोने के गहने खरीदे और दो स्मार्ट फोन खरीदे. जब इस घटना की जानकारी पुलिस को हुई तो बच्चे को रेस्क्यू करा लिया गया और बच्चे को जन्म देने वाली महिला को भी बुलाया गया. बच्चे को बेचने की इस कहानी को सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई.
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक मुकुंदवाड़ी में लिव इन में रहने वाले एक दंपती ने अपने एक महीने के बेटे को 1.2 लाख रुपये में बेच दिया. एक जगह से बेचा गया बच्चा तेलंगाना पहुंचने तक तीन बार और बेचा गया और बच्चे की कीमत 3.5 लाख रुपये तक पहुंच गई. वहीं दूसरी ओर बच्चे को जन्म देने वाले माता-पिता ने बच्चे को बेचकर मिले पैसों से अपने एशो-आराम की चीजें खरीदीं. दंपती ने इन पैसों से दो स्मार्टफोन और कुछ सोने की ज्वैलरी खरीदी.
पुलिस ने बताया कि जैसे ही बच्चा बेचने की जानकारी उन्हें मिली रविवार को बच्चे को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया और मानव तस्करी के रैकेट में शामिल सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. इन लोगों में बच्चे के असली माता-पिता भी शामिल हैं.
बच्चे को बेचने की मिली सूचना
पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने बताया, ‘जांच की शुरुआत एक गुमनाम सूचना से हुई कि मुकुंदवाड़ी का एक जोड़ा अपने बच्चे को बेच चुका है. इसके बाद बच्चे की मां वंदना कांबले को पूछताछ के लिए बुलाया गया. 20 सितंबर को वंदना ने खुद अपने बच्चे के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद पुलिस ने तथ्यों को जोड़ते हुए मुकुंदवाड़ी थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 142, 143(4), 3(5) और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 81 के तहत एफआईआर दर्ज की.’
हालांकि जैसे-जैसे जांच बढ़ी कुछ ऐसी परतें खुलती चली गईं कि पुलिस भी मानवीयता के गिरते स्तर को देखकर हैरान रह गई. जांच में पता चला कि वंदना और योगेश कांबले पिछले दो-तीन साल से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे. 5 जुलाई को सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में उनके बेटे का जन्म हुआ. अधिकारी के मुताबिक, वंदना इस बच्चे को रखना नहीं चाहती थी. उसने अपनी सहकर्मी कौशल्या पवार से इसको लेकर मदद मांगी. तब कौशल्या ने अपनी बेटी सीमा रेशवाल से उसको मिलवाया और बच्चे को बेचने के लिए दोनों के बीच सौदा तय हो गया.
बच्चे को करीब एक महीने तक अपने पास रखने के बाद दंपती ने 1.2 लाख रुपये नकद लेकर बच्चे को सीमा रेशवाल को सौंप दिया. रेशवाल ने फिर अपने रिश्तेदार संगीता अव्हड को 2.7 लाख रुपये में बच्चा बेच दिया. वहीं संगीता अव्हड बच्चे को नांदेड़ ले गईं और वहां जगित्याल (तेलंगाना) निवासी सुरेश राजाराम गुंटुका को 3.5 लाख रुपये में बेच दिया. गुंटुका खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बताता था, लेकिन जांच में वह नकली डॉक्टर निकला. उसने बच्चे को हैदराबाद की अपनी रिश्तेदार उमा गंगाधर खटकम को उतनी ही रकम में सौंप दिया.
पुलिस के अनुसार, सीमा रेशवाल को इस पूरे सौदे में 1.1 लाख रुपये मिले, जबकि कौशल्या को 40,000 रुपये मिले, जिन्हें उसने कर्ज चुकाने में खर्च किया. जबकि बच्चे के माता-पिता ने 1.2 लाख रुपये में से 25,000 रुपये का स्मार्टफोन और 62,000 रुपये के सोने के जेवर खरीदे. फिलहाल ये दोनों सामान पुलिस ने जब्त कर लिए हैं.
रविवार को गुंटुका और खटकम खुद बच्चे को लेकर मुकुंदवाड़ी पुलिस स्टेशन पहुंचे और उसे पुलिस को सौंप दिया. इसके बाद बच्चे को (बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया, जिसने उसे सुरक्षा और पुनर्वास के लिए अधिकृत बाल देखभाल संस्थान ‘सकार’ के हवाले कर दिया.
सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं. पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने कहा कि जांच अभी जारी है. यह देखा जा रहा है कि मामला कहीं राज्य की सीमाओं के पार चल रहे बड़े बाल तस्करी नेटवर्क से तो नहीं जुड़ा है.