रूस में नौकरी के नाम पर भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में भर्ती होने की खबरों के बीच विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर कड़ी चेतावनी जारी की है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पिछले दो वर्षों में वह कई मौकों पर भारतीयों को विदेश में नौकरी के ऑफर स्वीकार करते समय सावधानी बरतने की सलाह देती रहा है. खास तौर पर ऐसे ऑफर से दूर रहने को कहा गया है, जिनके जरिये किसी व्यक्ति को रूसी सशस्त्र सेनाओं में शामिल होने का रास्ता दिखाया जा रहा हो.
विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि रूसी सेना में भर्ती होना बेहद जोखिम भरा कदम है और भारत सरकार इसे सख्ती से हतोत्साहित करती है. मंत्रालय के मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिक ऐसे ऑफर खुद तलाश रहे हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि सेना में शामिल होने के बदले अच्छा पैसा मिलेगा और फिर भारत सरकार के दखल से वे वहां से निकल जाएंगे. सरकार ने इस सोच को खतरनाक बताते हुए भारतीय नागरिकों से ऐसे कदम से दूर रहने को कहा है.
पैसे के लालच में रूसी सेना में हो रहे भर्ती
MEA के मुताबिक, कई मामलों में भारतीय नागरिकों ने अपनी मर्जी से रूसी सेना में भर्ती होने के ऑफर स्वीकार किए हैं. ऐसे लोगों के सामने मोटी सैलरी का लालच रखा गया और उन्हें यह उम्मीद रही कि बाद में भारतीय सरकार से संपर्क करके सेना से रिहाई हासिल की जा सकेगी.
विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि ऐसा रास्ता अपनाना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है. किसी विदेशी सेना में शामिल होने के बाद पैदा होने वाली परिस्थितियों को केवल आर्थिक फायदे या बाद में सरकारी मदद के भरोसे पर नहीं छोड़ा जा सकता.
सरकार ने भारतीय नागरिकों को सलाह दी है कि विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले किसी भी ऑफर की पूरी जांच करें और केवल भरोसेमंद माध्यमों से ही विदेश में रोजगार के अवसर तलाशें.
भारतीय नागरिकता छोड़कर रूसी पासपोर्ट लेने की कोशिश
MEA की एडवाइजरी में एक और गंभीर पहलू सामने आया है. मंत्रालय के मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिकों ने भारतीय नागरिकता छोड़कर रूसी पासपोर्ट हासिल करने और उसके बाद रूसी सशस्त्र सेनाओं में भर्ती होने की कोशिश की है.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ लोग आर्थिक फायदे के लालच में बिना भारतीय अधिकारियों से सलाह किए ऐसे कदम उठा चुके हैं. सरकार ने ऐसे लोगों को इस फैसले की गंभीरता समझने की सलाह दी है.
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि रूसी सेना में शामिल होने के बाद संबंधित व्यक्ति खुद को गंभीर और जानलेवा खतरों में डाल सकता है. इसलिए भारतीय नागरिकों को इस तरह का कदम नहीं उठाने की स्पष्ट सलाह दी गई है.
विदेश में नौकरी के ऑफर पर रहे सावधान
सरकार ने भारतीय नागरिकों को ऐसे एजेंटों से भी सावधान रहने को कहा है जो विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को रूस ले जाने का दावा करते हैं. एमईए के अनुसार, उसे ऐसी जानकारी मिली है कि गैर-सार्वजनिक संस्थाओं और स्वैच्छिक समूहों समेत कुछ माध्यमों से विदेशी नागरिकों की रूसी सेना में भर्ती की जा रही है. ऐसे में विदेश मंत्रालय ने भारतीयों से कहा है कि किसी भी एजेंट से नौकरी का प्रस्ताव मिलने पर उसकी पूरी जांच-पड़ताल करें.
खास तौर पर उन एजेंटों से सावधान रहने को कहा गया है जो विदेश मंत्रालय के साथ पंजीकृत नहीं हैं. यानी रूस में नौकरी के नाम पर किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले उसके स्रोत, एजेंसी और नौकरी की वास्तविक प्रकृति की पुष्टि करना जरूरी है.
‘नौकरी’ के नाम पर कहीं सेना में तो नहीं भेजा जा रहा?
विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी का सबसे अहम संदेश यही है कि विदेश में रोजगार के आकर्षक ऑफर को बिना जांचे स्वीकार न किया जाए. कई बार एजेंट बेहतर वेतन, बोनस या दूसरे आर्थिक लाभ का लालच देकर लोगों को विदेश भेजने की कोशिश कर सकते हैं.
MEA ने भारतीय नागरिकों से कहा है कि वे ऐसे लोगों के झांसे में न आएं. किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले यह पता लगाना जरूरी है कि नियोक्ता कौन है, नौकरी असल में किस प्रकार की है और संबंधित एजेंसी रजिस्टर्ड है या नहीं.
खासकर रूस की सेना से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को सामान्य विदेशी नौकरी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर सैन्य सेवा और उससे जुड़े गंभीर जोखिम शामिल हो सकते हैं.
रूस के संपर्क में भारत, भारतीयों की जल्द रिहाई की कोशिश
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा है कि भारत सरकार रूसी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में है. इसका मकसद रूसी सशस्त्र सेनाओं में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, उनके कल्याण और जल्द रिहाई को सुनिश्चित करना है.
सरकार की नई एडवाइजरी में एक तरफ ऐसे मामलों में फंसे भारतीयों के लिए रूस के साथ संपर्क जारी रखने की बात कही गई है, वहीं दूसरी तरफ नए लोगों को इस रास्ते पर जाने से रोकने की कोशिश की गई है.