Premanand Maharaj | Premanand Maharaj disciple Death | rasik dulari sharan death case

Premanand Maharaj | Premanand Maharaj disciple Death | rasik dulari sharan death case


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Premanand Maharaj Disciple Rasik Dulari Sharan death Case : शांत, सुरम्य और आध्यात्मिक वातावरण में साधना करने की इच्छा से वृंदावन आए 25 वर्षीय नौजवान रसिक दुलारी शरण का यह हश्र होगा, किसी ने सोचा भी न होगा. रसिक दुलारी ने अपनी जान देकर तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्हें अपनी जान देनी पड़ी. पुलिस जांच कर रही है. मगर, इस बीच परिवार के दावों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

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प्रेमानंद महाराज के शिष्य के परिवार का बड़ा दावा.

मथुरा: प्रेमानंद महाराज किसी पहचान के मोहताज नहीं है. उनसे मिलने देश-विदेश से लोग आते हैं. मगर, इस बार मथुरा-वृंदावन उनकी वजह से नहीं बल्कि उनके शिष्य दीपक पटेल उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत के कारण सुर्खियों में छाया हुआ है. उनके शिष्य की मौत की गुत्थी लगातार उलझती जा रही है. एक तरफ जहां पुलिस मामले की तफ्तीश में जुटी हुई है. वहीं परिवार का दावा किसी और तरफ इशारा कर रहा है. परिजनों का कहना है कि जब वह पहुंचे तो उन्हें कई घंटे तक बैठा कर रखा और कोई मिलने नहीं आया. यहां तक कि जब भी कोई परिवार का सदस्य मिलने आता था, तो उनसे मिलने नहीं दिया जाता था. 3-4 दिन चक्कर लगाते रहते थे, लेकिन कभी दुलारी से मिलने नहीं दिया.

यह है मामला

मथुरा के वृंदावन के वराह घाट मार्ग पर गऊ कृपा कुंज आश्रम की छत से कूदकर संत प्रेमानंद महाराज के साधक (परिकर) रसिक दुलारी शरण ने बीते गुरुवार को जान दे दी. छत से नीचे गिरने के बाद अन्य साधक उन्हें अस्पताल लेकर गए लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. साधक का प्राइवेट पार्ट कटा हुआ था. सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और आश्रम पर जांच के लिए पहुंच गई. जांच के दौरान पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को जांच के लिए बुलाया. पुलिस शुरुआती जांच में सुसाइड के एंगल से ही जांच कर रही है. हालांकि, बता दें इस आश्रम में प्रेमानंद महाराज नहीं रहते हैं.

परिवार का क्या दावा?

दीपक पटेल के बहनोई सोनू पटेल ने मीडिया से बात करते हुए कई बड़े आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि दुलारी मेरा साला था. हमें आश्रम से किसी ने फोन करके बताया था कि दुलारी शरण छत से गिर गए हैं. डॉक्टर का कहना है कि उनका ऑपरेशन करना पड़ेगा. आप लोग यहां आ जाओ. इस पर हम लोग तुरंत घर से निकल गए. रात में जब हम लोग पहुंचे तो हमसे कहा गया कि एक काम करो कि अस्पताल नहीं जाओ सीधे, पहले इधर ही आ जाओ.

बहनोई ने आगे बताया कि जब हम लोग 5 बजे पहुंचे तो हमसे कहा गया कि 8 बजे तक इंतजार करो, बैठो… नौ बज गया, लेकिन कोई हमसे मिलने नहीं आया. परिवार का कहना है कि करीब नौ बजे के आसपास वे लोग वहां से निकल गए. इस दौरान भी उन्हें घटना के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया गया. परिजनों के इस दावे ने मामले को लेकर एक सवाल जरूर खड़ा किया है कि घटना के बाद परिवार को जानकारी देने और उन्हें स्थिति समझाने में इतना समय क्यों लगा. हालांकि, इस संबंध में आश्रम की ओर से कोई पक्ष परिवार के बताए इन आरोपों में सामने नहीं आया है.

वहीं, साले ने यह भी कहा कि दुलारी की मौत पर कुछ कह नहीं सकते कि खुद गिरे या क्या और हुआ है. हमें अभी तक सही जानकारी नहीं दी गई है. दुलारी शरण आश्रम में 2024 से रह रहे थे. जब हम लोग मिलने आते थे, तो मिलने नहीं दिया जाता था. घंटों-घंटों तक बैठाए रखते थे, फिर वापस भेज देते थे. 3-4 दिन तक आश्रम के चक्कर काटते रहते थे कि कभी तो मिलने दें, लेकिन नहीं मिलने दिया. जब सोनू से पूछा गया कि पुलिस से शिकायत की थी इस बारे में ? तो उन्होंने कहा कि नहीं हम लोगों ने ऐसा कुछ नहीं किया.



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