Pakistan Qatar Iran US Deal : क्या है वो ईरान का ‘7 दिन वाला प्लान’, जिस पर अटकी बात, बिचौलिए पाकिस्तान-कतर कर क्या रहे हैं?

Pakistan Qatar Iran US Deal : क्या है वो ईरान का ‘7 दिन वाला प्लान’, जिस पर अटकी बात, बिचौलिए पाकिस्तान-कतर कर क्या रहे हैं?


ईरान और अमेरिका भले ही दुनिया के सामने मार देंगे-फूंक देंगे जैसे डायलॉग्स बोल रहे हैं लेकिन पर्दे से पीछे कुछ और ही खेल चल रहा है. अंदर की खबर है कि पाकिस्तान और कतर दोनों के बीच बातचीत करवाने की कोशिश में जुटे पड़े हैं. दोनों देश बिचौलिया पहले भी बने थे लेकिन फेल रहे, हालांकि अभी तक इस रोल से उन्हें आउट नहीं किया गया है. बताया तो यहां तक जा रहा था कि संयुक्त राष्ट्र के मंच से इतर न्यू यॉर्क शहर में ईरान-अमेरिका के बीच बात करने की कोशिश हुई लेकिन वो भी फुस्स हो गई. अब बातचीत ईरान की उस ‘7 दिन वाले ऑफर’ पर फंसी हुई है.

‘इनडायरेक्ट टॉक्स’, कतर और पाकिस्तान बने बिचौलिए

न्यू यॉर्क में इस वक्त कूटनीतिक हलचल काफी तेज है. सूत्रों के मुताबिक, कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थ अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकें कर रहे हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस वक्त न्यू यॉर्क में ही मौजूद हैं और उन्होंने कतरी मध्यस्थों से मुलाकात की है. हालांकि, अमेरिकी पक्ष से कौन-कौन प्रतिनिधि टेबल पर बैठ रहे हैं, उनके नामों को अभी गुप्त रखा गया है.

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ISNA ने भी इस बात की पुष्टि की है कि विदेश मंत्री अराघची कतरी मध्यस्थों से मिलकर मौजूदा स्थिति और नए प्रस्तावों पर चर्चा कर रहे हैं. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बगाई ने बाद में ये साफ किया कि अराघची का न्यू यॉर्क दौरा बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और वो अपने तय शेड्यूल के हिसाब से ही तेहरान लौटेंगे. लेकिन पर्दे के पीछे जारी इस बातचीत ने नई उम्मीद जरूर जगा दी है.

ईरान का ‘7 दिनों वाला प्लान’, जिसके इर्द-गिर्द घूम रही बातचीत

इस पूरी इनडायरेक्ट बातचीत के सेंटर में ईरान का एक खास प्रस्ताव है, जिसे ‘7-डे प्लान’ कहा जा रहा है. ईरान ने इस प्रपोजल में अपनी तरफ से कई बड़ी शर्तें रखी हैं और अमेरिका के सामने एक पैकेज डील की पेशकश की है.

  1. युद्ध रोकने की शर्त: ईरान का प्रस्ताव है कि ईरान और लेबनान में जारी सभी तरह की सैन्य कार्रवाइयां और हमले तुरंत रोक दिए जाएं.
  2. फ्रीज फंड और पाबंदियां: अमेरिका में जब्त और फ्रीज पड़े ईरान के अरबों डॉलर के एसेट्स को तुरंत बहाल किया जाए.
  3. तेल और बंदरगाह से बैन हटे: ईरानी तेल के व्यापार पर लगी अमेरिकी पाबंदियों को पूरी तरह खत्म किया जाए और ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी हटाई जाए.
  4. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलना: अगर अमेरिका ये शर्तें मानता है, तो ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोल देगा.
  5. न्यूक्लियर डील पर चर्चा: इसके साथ ही ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत की मेज पर आने को तैयार है.

ट्रंप ने पहले खारिज किया, फिर बातचीत का रास्ता भी खुला रखा

ईरान के इस 7 दिनों वाले प्लान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख काफी दिलचस्प और उलझाने वाला रहा है. पहले तो ट्रंप ने सरेआम ईरान के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. ट्रंप का तर्क था कि ईरान इस वक्त बेहद गंभीर आर्थिक बदहाली और भारी दबाव से गुजर रहा है, इसलिए वो जल्दबाज़ी में कोई भी समझौता करना चाहता है.

लेकिन इसके ठीक अगले ही दिन, एक्सियोस को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप का सुर थोड़ा बदला हुआ नजर आया. ट्रंप ने संकेत दिया कि वो अमेरिकी वार्ताकारों को इस हफ्ते ईरान के साथ आगे की बातचीत में शामिल होने की इजाजत दे सकते हैं. इसका मतलब साफ है कि अमेरिका भले ही ऊपरी तौर पर सख्त रुख दिखा रहा हो, लेकिन वो कूटनीति का दरवाजा पूरी तरह बंद करने के मूड में बिल्कुल नहीं है.

ईरान की मांग- ‘हवा में नहीं, लिखित में दो जवाब’

दूसरी तरफ, तेहरान का कहना है कि उसे मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के आधिकारिक और स्पष्ट जवाब का इंतजार है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि कतर या अन्य मध्यस्थों ने उन्हें अभी तक अमेरिका की तरफ से किसी औपचारिक इनकार की जानकारी नहीं दी है.

ईरान का मानना है कि जब तक वाशिंगटन अपना अंतिम और आधिकारिक रुख तय नहीं कर लेता, तब तक तेहरान अपने अगले कदम का ऐलान नहीं करेगा. ईरान ये समझना चाहता है कि क्या अमेरिका सच में शांति चाहता है या सिर्फ वक्त बिताने के लिए टेबल पर बैठा है.



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