LPU हिंसा की पूरी कहानी: रेप अफवाह, तोड़फोड़, राजनीति और अब कैम्पस में पसरा सन्नाटा…

LPU हिंसा की पूरी कहानी: रेप अफवाह, तोड़फोड़, राजनीति और अब कैम्पस में पसरा सन्नाटा…


पंजाब के कपूरथला जिले के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्रा से दुष्कर्म के आरोपों के बाद हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन के एक दिन बाद सोमवार को स्थिति शांतिपूर्ण रही. इस बीच पुलिस ने NH-44 पर 15 घंटे से अधिक समय से जारी छात्रों का जाम खुलवाकर यातायात बहाल कर दिया, जबकि 10 दिनों के लिए कक्षाएं निलंबित होने के बाद कई छात्र घर लौटने लगे. मामले को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है. विपक्षी दलों ने भगवंत मान सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं. वहीं बीजेपी ने हिंसा को 30 सितंबर को जालंधर में होने वाली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली से जोड़ते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

एलपीयू के विद्यार्थियों ने रविवार को विश्वविद्यालय परिसर में एक बाहरी व्यक्ति द्वारा एक छात्रा से कथित रूप से ‘दुष्कर्म किए जाने के’ दावों पर रविवार को परिसर में कथित रूप से तोड़फोड़ की थी और परिसर के बाहर नई दिल्ली-अमृतसर राजमार्ग के एक हिस्से को अवरुद्ध कर दिया था. अधिकारियों ने बताया कि रविवार शाम को हिंसा का एक और दौर तब शुरू हुआ, जब प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर पथराव किया और उनकी गाड़ियों पर हमला किया, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. प्रदर्शन के कथित वीडियो में उन्हें कुछ चीज़ों में आग लगाते हुए भी देखा गया. मुख्यमंत्री भगवंत मान के कहने पर, पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने स्थिति का जायज़ा लेने के लिए एलपीयू का दौरा किया.

LPU हिंसा में अब तक क्या हुआ?

पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने तोड़-फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी. जालंधर-फगवाड़ा राजमार्ग पर स्थित इस विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती रही, जहां विद्यार्थी बैग और सूटकेस लेकर विश्विविद्यालय परिसर से निकलते हुए देखे गए. परेशान माता-पिता भी अपने बच्चों को घर ले जाने के लिए वहां पहुंचे. विश्वविद्यालय परिसर में हिंसा के निशान नजर आये. कई जगहों पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा, जबकि कई विद्यार्थियों ने तोड़-फोड़ के लिए बाहरी लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया.

इस बीच, राज्य महिला आयोग ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और चितकारा विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शन की घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को संबंधित जिला प्रशासन और पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी, जिसमें प्राथमिकी की प्रतियां और दोनों परिसर में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा भी शामिल करने का निर्देश दिया गया.

एलपीयू और पटियाला स्थित चितकारा विश्वविद्यालय में विद्यार्थी पिछले दो दिन से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. चितकारा विश्वविद्यालय के विद्यार्थी इन अपुष्ट खबरों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं कि परिसर में दो छात्राओं ने आत्महत्या कर ली.

भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने एलपीयू प्रदर्शन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि 30 सितंबर को जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली से पहले राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने वहां उपद्रवियों को भेजा. रविवार देर रात बिट्टू ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि “अशोक मित्तल के आप छोड़ने के बाद, पार्टी ने कथित तौर पर एलपीयू को बंद करने के लिए मजबूर करने की एक खतरनाक साजिश रची.” राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल एलपीयू के संस्थापक चांसलर हैं.

एलपीयू प्रशासन द्वारा सोमवार से 10 दिन के लिए कक्षाएं स्थगित किए जाने के बाद कई विद्यार्थी अपने घर चले गए. मध्यावधि परीक्षाएं भी अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई हैं. पंजाब की एक छात्रा ने बताया कि अभी हालात सामान्य हैं. उसने कहा कि सभी विद्यार्थी घर लौट रहे हैं और पुलिस तैनात कर दी गई है. उसने हिंसा और तोड़-फोड़ के लिए बाहरी लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया एवं कहा कि कॉलेज के विद्यार्थियों ने कोई तोड़-फोड़ नहीं की.

बिहार के एक छात्र ने बताया कि रविवार को हालात बहुत खराब थे. उसने इसे ‘डरावना’ बताया. उसने कहा कि पुलिस के विश्वविद्यालय परिसर के अंदर आने के बाद ही हालात सामान्य हुए. उसने भी हिंसा के लिए बाहरी लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि विद्यार्थी शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे. एक और छात्रा ने भी यही बात दोहराई कि बाहरी लोगों ने विश्वविद्यालय परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया.

एलपीयू दौरे के दौरान डीजीपी ने कहा कि तोड़-फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी. यादव ने पत्रकारों से कहा कि पुलिस ने विद्यार्थियों की उन शिकायतों को सुलझाने की कोशिश की, जो उन्हें निजी विश्वविद्यालय के प्रशासन से थीं; इसके लिए पुलिस ने छात्रों और अधिकारियों के बीच बातचीत करवाई.

रविवार शाम की हिंसा का ज़िक्र करते हुए यादव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि कुछ लोगों ने माहौल खराब करने की कोशिश की और पुलिस की गाड़ियों पर पत्थर फेंके. उन्होंने कहा, “पुलिस ने बहुत संयम बरता. पुलिस की कोशिश यही थी कि विद्यार्थी हमारे बच्चों की तरह हैं और उनकी शिकायतों का समाधान किया जाए. ज़्यादातर शिकायतें विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़ी थीं. इसके लिए बैठकें भी बुलाई गई थीं.”

तोड़-फोड़ करने वालों को चेतावनी देते हुए डीजीपी ने कहा कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है. विद्यार्थियों के कथित दुष्कर्म की घटना के दावे पर यादव ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और एक एसआईटी बनाई गई है, जो इस मामले की विस्तृत जांच करेगी. हालांकि, विश्वविद्यालय ने परिसर में अपराध होने के दावों को ‘अफ़वाह’ बताया है.

एलपीयू ने विद्यार्थियों को अनुमति दी है कि कक्षाएं निलंबित रहने के दौरान वे चाहें तो अपने माता-पिता या अभिभावकों से परामर्श के बाद इस अवधि के दौरान घर जा सकते हैं. विश्वविद्यालय ने कहा कि परिसर में रुकने वाले विद्यार्थियों को उनकी सुरक्षा के मद्देनजर सलाह दी गई है कि वे छात्रावास या अपने निवास स्थान पर ही रहें, अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें और किसी भी तरह के प्रदर्शन या हंगामे में शामिल न हों.

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) एम. एफ. फारूकी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी रविवार देर रात परिसर में दाखिल हुए और वरिष्ठ अधिकारियों एवं अन्य पुलिसकर्मियों ने फ्लैग मार्च किया. जालंधर के पुलिस आयुक्त सतिंदर सिंह, जालंधर रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) नवीन सिंगला और कपूरथला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव तूरा भी पुलिस बल के साथ मौजूद थे. एलपीयू में हिंसा की घटना पटियाला की चितकारा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा पुलिस की गाड़ी में आग लगाने के एक दिन बाद हुई. विद्यार्थियों ने यह कदम कैंपस में दो छात्राओं की आत्महत्या से मौत की अपुष्ट खबरों के बाद उठाया था.

एलपीयू हिंसा को लेकर राजनीतिक विवाद
एलपीयू में हुई हिंसा सोमवार को एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गई तथा विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) पर निशाना साधा और पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि हिंसा का संबंध 30 सितंबर को जालंधर में होने वाली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली से है. उसने भगवंत मान सरकार पर विश्वविद्यालय में उपद्रवियों को भेजने का आरोप लगाया.

भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आरोप लगाया कि भाजपा की नशा-विरोधी यात्राओं को मिल रहे समर्थन से आप ‘घबरा’ गई है. उन्होंने मान सरकार पर जालंधर में शाह की तय रैली में खलल डालने के लिए दंगे होने देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पंजाब में कुछ महीनों में सरकार बदलने वाली है और अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा. पंजाब में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं. बिट्टू ने आरोप लगाया कि पुलिस ने ‘लापरवाही’ बरती, जिससे उपद्रवियों को आगजनी और तोड़-फोड़ करने का मौका मिला और पुलिसकर्मी एवं विद्यार्थी घायल हो गए.

बिट्टू ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पार्टी नेता मनीष सिसोदिया ने कथित तौर पर बदला लेने के लिए एलपीयू में उपद्रवियों को भेजा था. बिट्टू ने रविवार देर रात ‘एक्स’ पर आरोप लगाया कि अशोक मित्तल के आप छोड़ने के बाद, पार्टी ने कथित तौर पर एलपीयू को बंद कराने के लिए एक खतरनाक साजिश रची. आप से भाजपा में आये मित्तल एलपीयू के संस्थापक कुलाधिपति हैं. बिट्टू ने आरोप लगाया, “30 सितंबर को जालंधर में अमित शाह जी की रैली भी होने वाली है और सरकार जानती है कि इसमें लाखों लोग शामिल होंगे. पंजाब के लोगों से भाजपा को मिल रहे समर्थन से आप घबरा गई है और रैली में बाधा डालने के लिए जालंधर में दंगे होने दे रही है.”

प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि एलपीयू के हालात ‘बेहद चिंताजनक’ हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मान सरकार ‘गहरी नींद में सोई हुई है.’ वडिंग ने कहा, “ऐसे समय में जब विद्यार्थी सुरक्षा, समर्थन और जवाब तलाश रहे हैं, कांग्रेस मजबूती से उनके साथ खड़ी है. हमारे लिए हर विद्यार्थी की सुरक्षा और भलाई सबसे पहले है.” उन्होंने कहा, “मैं एलपीयू के हर विद्यार्थी से अपील करता हूं कि अगर आपको किसी भी तरह की मदद की आवश्यकता हो, तो कृपया मुझसे संपर्क करें. मैं आपके साथ खड़े रहने और हर संभव मदद देने की पूरी कोशिश करूंगा.” उन्होंने कहा, “एलपीयू हुई हिंसा पंजाब में कानून-व्यवस्था की विफलता का सबूत है.”

वरिष्ठ अकाली नेता और बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने एलपीयू विद्यार्थियों पर पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज की निंदा की. उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “रविवार रात फगवाड़ा की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिले. पुलिस जिसे ‘हल्का’ लाठीचार्ज बता रही है, मैं उसकी कड़ी निंदा करता हूं.” उन्होंने कहा, “क्योंकि इन दृश्यों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि ‘खाकी वर्दी वाले’ – जो सीधे गृह मंत्री या मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करते हैं – युवाओं, और खासकर लड़कियों को बेरहमी से पीट रहे हैं, घसीट रहे हैं, उनके साथ बदसलूकी कर रहे हैं और उन्हें जमीन पर गिरा रहे हैं.”

भाजपा नेता प्रीतपाल सिंह बलियावाल ने कहा कि एलपीयू में जो हुआ, वह ‘कानून-व्यवस्था की गंभीर विफलता’ है. उन्होंने कहा, “यह सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि क्या यह अशांति जान-बूझकर भड़काई गई थी और क्या इसका केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के 30 सितंबर के कार्यक्रम से कोई संबंध है. इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच होनी चाहिए, इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.”



Source link