जालोर. राजस्थान के गांवों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत है तो सिर्फ उसे पहचानने और आगे बढ़ने का मौका देने की. इसी सोच के साथ जालोर जिले के रायपुरिया गांव के प्रवासी कारोबारी मोहनलाल माली ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थियों के लिए एक अनूठी पहल शुरू की है. गांव के जिन बच्चों ने पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर टॉप किया है, उन्हें हवाई यात्रा कराई जा रही है. जय आबूराज सेवा संस्थान के माध्यम से शुरू हुई इस पहल के तहत अब तक 250 से ज्यादा छात्र-छात्राएं हवाई सफर कर चुके हैं.
गांव से शुरू हुई पहल ने बनाया अलग मुकाम
रायपुरिया गांव से शुरू हुई यह पहल अब जालोर और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक पहुंच चुकी है. सरकारी स्कूलों के टॉपर बच्चों को उनकी मेहनत के लिए सम्मानित करने के साथ उन्हें ऐसा अनुभव दिया जाता है, जो आमतौर पर ग्रामीण परिवेश के बच्चों के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं होता. कई बच्चे पहली बार हवाई अड्डे पहुंचते हैं और पहली बार विमान में बैठते हैं. ऐसे में पूरी यात्रा उनके लिए यादगार बन जाती है. मोहनलाल माली का मानना है कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है. उन्हें दुनिया को देखने और नए अवसरों को समझने का मौका भी मिलना चाहिए. इसी उद्देश्य से मेधावी विद्यार्थियों को मुंबई जैसे बड़े शहर की यात्रा कराई जाती है.
पढ़ाई की मेहनत का बच्चों को मिलता खास इनाम
इस पहल में सरकारी स्कूलों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को शामिल किया जाता है. पढ़ाई में बेहतर परिणाम देने वाले बच्चों को जब हवाई यात्रा का अवसर मिलता है तो उनमें आगे और मेहनत करने का उत्साह भी बढ़ता है. ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए यह अनुभव उनकी सोच और आत्मविश्वास को व्यापक बनाने में मदद करता है. हवाई यात्रा के दौरान बच्चों को बड़े शहर की व्यवस्था, आधुनिक तकनीक और उद्योगों से जुड़ी गतिविधियों को देखने का अवसर मिलता है. इससे उन्हें शिक्षा के बाद आगे बढ़ने और करियर के अलग-अलग विकल्पों के बारे में सोचने की प्रेरणा मिलती है.
250 से ज्यादा बच्चों ने किया हवाई सफर
जय आबूराज सेवा संस्थान के माध्यम से अब तक 250 से अधिक मेधावी छात्र-छात्राएं हवाई यात्रा कर चुके हैं. संस्था की ओर से विद्यार्थियों की यात्रा का खर्च उठाया जाता है. बच्चों के लिए यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन में पहली बार मिले ऐसे अनुभवों में से एक होता है, जिसे वे लंबे समय तक याद रखते हैं. रायपुरिया के सरकारी स्कूल के शिक्षक राजेंद्र सिंह बताते हैं कि इस तरह की पहल से बच्चों में पढ़ाई को लेकर उत्साह बढ़ता है. उन्हें यह एहसास होता है कि उनकी मेहनत को समाज सम्मान दे रहा है और अच्छे प्रदर्शन के बाद उन्हें नए अनुभव भी मिल सकते हैं.
अब राजस्थान के दूसरे जिलों तक पहुंचाने की तैयारी
बच्चों के लिए उड़ान से बड़ा है सपना