2 फरवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड डील होने जा रही है. फिर क्या था, लगा कि अब बस डील पर साइन ही होने वाले हैं. लेकिन 8 महीने बीत जाने के बाद बातचीत वहीं अटकी पड़ी है. दोनों पक्ष कहते हैं कि बातचीत अच्छी चल रही है, लेकिन नतीजा अब तक नहीं.
आइए आप भी सिग्नल पकड़िए
1. गोयल-ग्रीयर बातचीत: भारत को सिर्फ कम टैरिफ नहीं, प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त चाहिए
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका की यात्रा पर हैं. बातचीत का एक अहम मुद्दा यह है कि भारतीय निर्यातकों को वियतनाम, बांग्लादेश, थाईलैंड और दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले कैसी टैरिफ रियायत मिलेगी.
- सिग्नल: भारत के लिए समझौते की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि अमेरिकी टैरिफ कितना है. यह भी जरूरी है कि प्रतिस्पर्धी देशों पर कितना टैरिफ लगता है और भारतीय कंपनियों को वास्तविक कारोबारी फायदा कितना मिलता है.
2. रूस पर नया कानून: ट्रेड डील में क्या बनेगा सबसे बड़ी बाधा
अमेरिका ने एक कानून पास किया है कि अगर कोई रूस से तेल खरीदता है तो उस पर ट्रंप 100 फीसदी तक टैरिफ लगा सकते हैं. अमेरिकी बार-बार यही दिखाकर खुश हो रहे हैं. भारत अपना कंसर्न अमेरिका के साथ शेयर कर चुका है. कुछ दिनों पहले जब जयशंकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मिले थे, तब भी उन्होंने सुनाया था. तो क्या यह ट्रेड डील में सबसे बड़ी बाधा बन सकता है?
- सिग्नल: भारत को ट्रेड डील की शर्तों के साथ यह भी देखना होगा कि रूस से ऊर्जा खरीदने की नीति पर अमेरिकी कार्रवाई उसके निर्यात की लागत को किस तरह प्रभावित कर सकती है. अगर एक हाथ दे, दूसरे हाथ ले वाला हाल होगा और भारतीय निर्यातकों को कोई फायदा नहीं होगा तो भारत आगे शायद ही बढ़े.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को लेकर अमेरिका की संवेदनशीलता की कमी का असर ट्रेड डील की बातचीत पर पड़ता है. अगर मेरा साथी मेरी किसी मुख्य चिंता को नहीं समझता है तो जाहिर है कि इसका असर हमारे रिश्तों पर पड़ेगा. इसके अलावा उन्होंने अमेरिका की घरेलू राजनीति और लोगों की आवाजाही से जुड़े मतभेदों को भी उन कारणों में शामिल किया जो ट्रेड डील की बातचीत पर असर डालते हैं.
- सिग्नल: भारत-अमेरिका संबंधों को सिर्फ टैरिफ की बातचीत तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता. सुरक्षा, आतंकवाद और इमिग्रेशन जैसे मुद्दे भी व्यापक रिश्तों के माहौल को प्रभावित कर सकते हैं. जयशंकर खुलकर अमेरिका को यह एहसास दिलाते रहे हैं कि आप हमें समझेंगे तभी हम आपको समझ पाएंगे.
- सिग्नल: अमेरिका कुछ क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को राहत दे रहा है, लेकिन इससे पूरी ट्रेड डील पर सहमति बन रही है, यह कहना जल्दबाजी होगी. हां, जो अमेरिका अकड़कर बातें कर रहा था, वह अगर ढील देता है तो यह अच्छा संकेत जरूर है.
- सिग्नल: यह मैसेज है कि भारतीय बिजनेस ग्रुप्स अमेरिकी मार्केट में सिर्फ एक्सपोर्ट नहीं कर रहे, वे वहां फैक्ट्री भी लगाना चाहते हैं, ताकि प्रोडक्शन कर सकें. वहां ज्यादा से ज्यादा माल बेच सकें. हालांकि यह भी ध्यान रखना होगा कि अमेरिकी स्टील पर भारी इंपोर्ट ड्यूटी के बीच वहां प्रोडक्शन करने का फैसला और भारत से स्टील निर्यात करना दो अलग कारोबारी मॉडल हैं.