Jaymin Patel Vs UPSC : यूपीएसससी की परीक्षाओं में चयन एक-एक अंक तय करते हैं. दिन-रात मेहनत करने वाले कितने ही अभ्यर्थी चंद मार्क्स की कमी से बाहर हो जाते हैं. ऐसा ही कुछ यूपीएससी फॉरेस्ट सर्विस 2024 में गुजरात के जयमिन मुकेशभाई पटेल के साथ हुआ था. उन्हें प्रीलिम्स में 98.29 मार्क्स मिले थे, जबकि सामान्य वर्ग की कटऑफ 100.35 थी. मतलब वह 2.06 मार्क्स से पीछे रह गए थे.
हालांकि जयमिन पटेल ने दावा किया कि जनरल स्टडीज पेपर-1 के प्रश्न संख्या 25 कीर आंसर-की गलत थी. उस प्रश्न के लिए मार्क्स मिलते तो वह कटऑफ पार कर जाते.
पटेल अपने इस दावे के साथ तब से यूपीएससी के खिलाफ मुकदमा लड़ रहे हैं. उनका मामला गुजरात हाईकोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. आइए जानते हैं जैमिन पटेल और पूरे मामले के बारे में.
कौन हैं जयमिन पटेल?
गुजरात के गांधीनगर के रहने वाले जैयमिन पटेल मौजूदा वक्त में गुजरात पीसीएस अधिकारी हैं. उनकी यूपीएससी जर्नी 2016 में शुरू हुई थी. उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा के तीन मेंस और दो इंटरव्यू दिए. 2021 तक UPSC CSE के छह प्रयास पूरे हो गए थे. इसके बाद 2018 में गुजरात लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर ली और डिप्टी कलेक्टर बन गए. लेकिन उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी.
पटेल के मुताबिक, सिविल सेवा परीक्षा के प्रयास पूरे होने के बाद उन्होंने इंडियन फॉरेस्ट सर्विस की तैयारी शुरू की. 2023 में उन्होंने इंटरव्यू दिया और 2024 में उनका उम्र के लिहाज से आखिरी प्रयास था. UPSC IFS 2024 के प्रीलिम्स का रिजल्ट आया तो पता चला कि वह 2.06 से मेन्स के लिए सेलक्ट नहीं हो सके.
द प्रिंट के अनुसार, पटेल ने कहा, मुझे पता था कि मामला सिर्फ एक सवाल का है. पूरे एक साल इंतजार करने के बाद पता चला कि गलती मेरी नहीं, यूपीएससी की थी. अब पटेल ने अपने हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की ठान ली.
जैमिन पटेल ने जुलाई 2025 में गांधीगर में डिप्टी कलेक्टर के पद से छुट्टी ली और दिल्ली आ गए. उनके आईएएस और आईपीएस मित्रों, वकीलों और शिक्षकों समेत कई लोगों ने उन्हें मामला छोड़कर आगे बढ़ने की सलाह दी. लेकिन पटेल ने ऐसा नहीं किया.
उन्होंने RTI के जरिए अपनी OMR शीट हासिल की और उस सवाल की दोबारा जांच की, जिसने उन्हें कई महीनों से परेशान कर रखा था. इसके बाद उन्होंने UPSC के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जहां उन्हें गुजरात हाईकोर्ट जाने को कहा गया.
विवादित सवाल क्या था?
यूपीएससी IFS प्रीलिम्स के जिस सवाल ने पटेल की यूपीएससी जर्नी का रुख बदल दिया, वह केंद्रीय बजट से संबंधित था. सवाल में दो कथन दिए गए थे-
कथन 1: केंद्रीय वित्त मंत्री, प्रधानमंत्री की ओर से, संसद के दोनों सदनों के सामने वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement) प्रस्तुत करते हैं.
कथन 2: केंद्र के स्तर पर राष्ट्रपति की सिफारिश के अलावा किसी अनुदान की मांग नहीं की जा सकती.
उम्मीदवारों को चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनना था:
- केवल कथन 1
- केवल कथन 2
- दोनों कथन
- न तो 1, न ही 2
पटेल ने विकल्प B यानी केवल कथन 2 चुना था.
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
गुजरात हाई कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 112 और 113 के प्रावधानों को आधार बनाया. अदालत के अनुसार वार्षिक वित्तीय विवरण संसद के सामने प्रधानमंत्री की ओर से नहीं, बल्कि राष्ट्रपति की ओर से प्रस्तुत किया जाता है. इसलिए पहला कथन गलत था. दूसरा कथन सही था. इस आधार पर अदालत ने पटेल के उत्तर को सही माना.
2025 में UPSC मेन्स का मौका
गुजरात हाईकोर्ट ने उन्हें 2025 की यूपीएससी मेन्स में बैठने की अनुमति दी. अदालत ने यह राहत अंतरिम व्यवस्था के तौर पर दी और उनके Mains के परिणाम को सीलबंद लिफाफे में रखने का निर्देश दिया. लेकिन इसके बाद भी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं.
पटेल ने UPSC को अदालत के आदेश की प्रति भेजकर अपना रोल नंबर मांगा, लेकिन उनके अनुसार उन्हें जवाब नहीं मिला. परीक्षा शुरू होने से कुछ दिन पहले उन्हें पता चला कि UPSC ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा मामला
UPSC ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. 14 नवंबर को, Mains परीक्षा शुरू होने से सिर्फ दो दिन पहले, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. इसके बाद पटेल ने 2025 की IFS Mains परीक्षा दी. उन्होंने लिखित परीक्षा पास कर ली और इंटरव्यू में बैठने की अनुमति मांगी. UPSC ने उनकी उम्र सीमा को लेकर उनकी उम्मीदवारी का विरोध किया, लेकिन गुजरात हाई कोर्ट ने उन्हें इंटरव्यू में बैठने की अनुमति दे दी.
आखिरकार IFS में चयन नहीं हुआ
पटेल ने Mains और इंटरव्यू दोनों दिए. लेकिन जब उनका परिणाम अदालत के सामने रखा गया तो पता चला कि उनका IFS के लिए चयन नहीं हुआ था.
पटेल ने इसके बाद भी अपनी लड़ाई जारी रखी. उनका कहना है कि UPSC ने उन्हें अब तक उनकी अंतिम मार्कशीट उपलब्ध नहीं कराई है. ताजा स्थिति में वह Mains और इंटरव्यू के अपने अंक तथा उत्तर पुस्तिकाएं हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि यह समझ सकें कि वह चयन से कहां पीछे रह गए.
UPSC का पक्ष
UPSC की ओर से गुजरात हाई कोर्ट में पैरवी करने वाले वकील भाग्योदय मिश्रा ने पटेल के मामले का विरोध किया. उनका कहना था कि पटेल परीक्षा में मेरिट के आधार पर सफल नहीं हुए थे और उन्होंने UPSC को अदालत में चुनौती देकर आयोग की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया. UPSC का यह भी कहना रहा कि उस विवादित सवाल के उत्तर में आयोग की ओर से कोई गलती नहीं हुई थी.